चीन को कोरोना का बड़ा झटका, 1000 कंपनियां भारत आने को तैयार! जानें क्या कह रहे अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया
मुख्य बातें
- चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है और इसका सीधा असर लोगों की जान के साथ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है
- ऐसे में चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिन सकता..

चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है और इसका सीधा असर लोगों की जान के साथ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिन सकता है। इस महामारी के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बीच लगभग 1000 विदेशी कंपनियां सरकार के अधिकारियों से भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाने को लेकर बातचीत कर रही हैं।
बिजनस टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स तथा सिंथेटिक फैब्रिक्स की इनमें से कम से कम 300 कंपनियां भारत में फैक्ट्रियां लगाने के लिए सरकार से सक्रिय रूप से संपर्क में हैं। वहीं दूसरी ओर जानेमाने अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर संभव है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से अपने परिचालन को दूसरी जगह ले जाएंगी, जिसका भारत को उठाना चाहिए और औपचारिक क्षेत्र में अच्छे वेतन वाली नौकरियां तैयार करने के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ काम करना चाहिए।
दूर की सोचने का वक्त, संकट को व्यर्थ गवां देना ठीक नहीं
पनगढ़िया कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मौजूदा संकट ने यह उजागर किया है कि किसी आघात से भारतीय श्रमिक कितने असुरक्षित हैं। पनगढ़िया ने पीटीआई-भाषा से कहा कोविड-19 महामारी ''दूर की सोचने का वक्त है। इस संकट को व्यर्थ गवां देना ठीक नहीं होगा। टीका उपलब्ध होने के बाद ही मौजूदा संकट खत्म होगा। निश्चित रूप से हमें उससे आगे सोचना होगा।
भारत को बेहतर भुगतान वाली औपचारिक क्षेत्र की नौकरियों की जरूरत
उन्होंने कहा, ''विकास के लिए 70 सालों के प्रयास के बाद भी हमने अपने श्रमिकों को मुख्य रूप से छोटे-छोटे खेतों (उसमें से सात करोड़ औसतन चौथाई हेक्टेयर से कम आकार के हैं) और अनौपचारिक क्षेत्र में या स्वरोजगार के छोटे-मोटे धंधों में काम करने के लिए छोड़ दिया है, जिससे उन्हें हर दिन मुश्किल से गुजारा करने भर की आमदनी हो पाती है। पनगढ़िया ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 संकट ने यह साफ कर दिया है कि भारत को बेहतर भुगतान वाली औपचारिक क्षेत्र की नौकरियों की जरूरत है और इसके लिए जरूरी है कि श्रमिक छोटे खेतों और कामधंधों से निकलकर अधिक उत्पादक तथा बेहतर भुगतान करने वाली नौकरियों में लगें।
उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि औद्योगिक और सेवा गतिविधियां कटीर उद्योगों से छोटे, मझोले और बड़े उद्योगों की ओर बढ़ें। इस संकट से एक यह अवसर पैदा होता हुआ दिख रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से दुनिया के दूसरे हिस्सों की ओर तेजी से जाएंगी। पनगढ़िया ने कहा, ''बहुराष्ट्रीय कंपनियां कोरोना महामारी के मद्देनजर अपनी गतिविधियों का अधिक से अधिक विकेंद्रीकरण करना चाहेंगी। भारत को यह मौका नहीं चूकना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संकट के समय सरकार को भूमि और श्रम बाजारों के क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए, जिन्हें आमतौर पर सामान्य समय में लागू करना कठिन है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह श्रम बाजारों में अधिक लचीलापन आवश्यक है।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


