Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़big shock to China 1000 foreign companies are ready to come to India economist Arvind Panagariya said it is better oppartunity for india

चीन को कोरोना का बड़ा झटका, 1000 कंपनियां भारत आने को तैयार! जानें क्या कह रहे अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया

चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है और इसका सीधा असर लोगों की जान के साथ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिन सकता...

Drigraj Madheshia एजेंसी लाइव हिन्दुस्तान, न्यूयॉर्क नई दिल्लीTue, 21 April 2020 01:56 PM
पर्सनल लोन

चीन से निकला कोरोना वायरस पूरी दुनिया में तबाही मचा रहा है और इसका सीधा असर लोगों की जान के साथ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में चीन से दुनिया का पसंदीदा मैन्युफैक्चरिंग हब होने का तमगा छिन सकता है। इस महामारी के कारण पैदा हुई दिक्कतों के बीच लगभग 1000 विदेशी कंपनियां सरकार के अधिकारियों से भारत में अपनी फैक्ट्रियां लगाने को लेकर बातचीत कर रही हैं।

बिजनस टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेज, टेक्सटाइल्स तथा सिंथेटिक फैब्रिक्स की इनमें से कम से कम 300 कंपनियां भारत में फैक्ट्रियां लगाने के लिए सरकार से सक्रिय रूप से संपर्क में हैं। वहीं दूसरी ओर जानेमाने अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर संभव है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से अपने परिचालन को दूसरी जगह ले जाएंगी, जिसका भारत को उठाना चाहिए और औपचारिक क्षेत्र में अच्छे वेतन वाली नौकरियां तैयार करने के लिए दीर्घकालिक सोच के साथ काम करना चाहिए।

दूर की सोचने का वक्त, संकट को व्यर्थ गवां देना ठीक नहीं

पनगढ़िया कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि मौजूदा संकट ने यह उजागर किया है कि किसी आघात से भारतीय श्रमिक कितने असुरक्षित हैं।  पनगढ़िया ने पीटीआई-भाषा से कहा कोविड-19 महामारी ''दूर की सोचने का वक्त है। इस संकट को व्यर्थ गवां देना ठीक नहीं होगा। टीका उपलब्ध होने के बाद ही मौजूदा संकट खत्म होगा। निश्चित रूप से हमें उससे आगे सोचना होगा।

भारत को बेहतर भुगतान वाली औपचारिक क्षेत्र की नौकरियों की जरूरत

उन्होंने कहा, ''विकास के लिए 70 सालों के प्रयास के बाद भी हमने अपने श्रमिकों को मुख्य रूप से छोटे-छोटे खेतों (उसमें से सात करोड़ औसतन चौथाई हेक्टेयर से कम आकार के हैं) और अनौपचारिक क्षेत्र में या स्वरोजगार के छोटे-मोटे धंधों में काम करने के लिए छोड़ दिया है, जिससे उन्हें हर दिन मुश्किल से गुजारा करने भर की आमदनी हो पाती है।  पनगढ़िया ने जोर देकर कहा कि कोविड-19 संकट ने यह साफ कर दिया है कि भारत को बेहतर भुगतान वाली औपचारिक क्षेत्र की नौकरियों की जरूरत है और इसके लिए जरूरी है कि श्रमिक छोटे खेतों और कामधंधों से निकलकर अधिक उत्पादक तथा बेहतर भुगतान करने वाली नौकरियों में लगें। 

उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी है कि औद्योगिक और सेवा गतिविधियां कटीर उद्योगों से छोटे, मझोले और बड़े उद्योगों की ओर बढ़ें। इस संकट से एक यह अवसर पैदा होता हुआ दिख रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से दुनिया के दूसरे हिस्सों की ओर तेजी से जाएंगी।   पनगढ़िया ने कहा, ''बहुराष्ट्रीय कंपनियां कोरोना महामारी के मद्देनजर अपनी गतिविधियों का अधिक से अधिक विकेंद्रीकरण करना चाहेंगी। भारत को यह मौका नहीं चूकना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संकट के समय सरकार को भूमि और श्रम बाजारों के क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाना चाहिए, जिन्हें आमतौर पर सामान्य समय में लागू करना कठिन है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण कानून में सुधार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह श्रम बाजारों में अधिक लचीलापन आवश्यक है।

 जानें Hindi News , Business News की लेटेस्ट खबरें, Share Market के लेटेस्ट अपडेट्स Investment Tips के बारे में सबकुछ।

ऐप पर पढ़ें