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लोन-क्रेडिट कार्ड के नियम बदले, बैंक से ग्राहकों तक पर कितना असर, समझें

हाल ही में केंद्रीय रिजर्व बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए असुरक्षित माने जाने वाले पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड जैसे कर्ज से जुड़े नियम को सख्त कर दिया है।

लोन-क्रेडिट कार्ड के नियम बदले, बैंक से ग्राहकों तक पर कितना असर, समझें
Deepak Kumarएजेंसी,नई दिल्लीSat, 18 Nov 2023 10:58 AM
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रिजर्व बैंक के असुरक्षित माने जाने वाले कर्ज के लिए नियम सख्त करते हुए रिस्क वेटेज बढ़ाए जाने से बैंकों को 84,000 करोड़ रुपये कैपिटल की जरूरत होगी। देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने यह बात कही है। बता दें कि रिजर्व बैंक ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए असुरक्षित माने जाने वाले पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड जैसे कर्ज से जुड़े नियम को सख्त कर दिया है। इसके तहत लोन पर रिस्क वेटेज में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।

क्या है रिपोर्ट में: अर्थशास्त्रियों ने रिपोर्ट में यह भी कहा कि चूंकि रेपो रेट उच्चस्तर पर है, ऐसे में आरबीआई वृद्धि और मुद्रास्फीति को लेकर तय लक्ष्यों को हासिल करने के लिये नकदी प्रबंधन और सूझबूझ वाले वृहद आर्थिक उपायों का सहारा ले रहा है। एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने कहा, ''बढ़े हुए रिस्क वेटेज का तत्काल प्रभाव यह होगा कि बैंकों को अतिरिक्त पूंजी की आवश्यकता होगी। हमारा अनुमान है कि बैंक उद्योग को इससे 84,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी की जरूरत होगी।''

एसबीआई के अर्थशास्त्रियों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रिस्क वेटेज बढ़ाने के निर्णय के जरिये संभवत: आरबीआई ने एक मजबूत संदेश दिया है। इसके जरिये उसने संदेश दिया है कि वह किसी भी शुरुआती वित्तीय स्थिरता को लेकर रिस्क से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आरबीआई ने जो कदम उठाया है, वह बैंकों और एनबीएफसी में संपत्ति के मोर्चे पर दबाव और उससे नुकसान की पहचान की दिशा में उठाये जा रहे कदमों के अनुरूप है। 

ग्राहकों पर क्या होगा असर: इस बीच, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि आरबीआई के फैसले से लोन पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होगी, ऋण वृद्धि कम होगी और कमजोर वित्तीय संस्थानों के लिए पूंजी जुटाने की जरूरत बढ़ेगी। दूसरी तरफ, एसेट क्वालिटी बेहतर होगी। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषक गीता चुघ ने कहा, ''वित्तीय कंपनियां इससे भी बुरी तरह प्रभावित होंगी क्योंकि उनकी बढ़ने वाले बैंक कर्ज में लागत में वृद्धि होगी, साथ ही पूंजी पर्याप्तता पर भी प्रभाव पड़ेगा।''

रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि इन बदलावों का भारत के वित्तीय क्षेत्र की साख पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा। इससे रेटिंग वाले बैंकों और वित्तीय कंपनियों के लिये जोखिम-समायोजित पूंजी अनुपात भी प्रभावित नहीं होगा। बता दें कि देश में पिछले कुछ साल में असुरक्षित पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ऋण तेजी से बढ़े हैं। सितंबर, 2023 को समाप्त 12 महीनों में ऐसे कर्जों में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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