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बचत स्टोरीः होम लोन लेना चाहते हैं तो पहले जान लिजिए ये जरूरी बातें

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रिजर्व बैंक ने लगातार दो मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दर बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दी है, हालांकि बैंकों ने ब्याज दरों में मामूली बढ़ोतरी ही की है। ऐसे में अभी भी मकान की कीमतें और आवास ऋण की दरें बेहद आकर्षक बनी हुई हैं। अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ बारीकियों पर ध्यान देकर सस्ती ईएमआई पर होम लोन पा सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, होम लोन के लिए सिर्फ बैंक के भरोसे न रहें, बल्कि अपनी जरूरतों और प्राथमिकता के हिसाब से फिक्स्ड, फ्लोटिंग या फ्लेक्सी होम लोन के विकल्प को चुनें। होम लोन की खास बातों पर पेश है हिन्दुस्तान टीम की रिपोर्ट....

निर्णय लेने से पहले होमवर्क करें 
होम लोन का फैसला कभी भी जल्दबाजी में न लें। होम लोन के लिए बैंक का चयन करने से पहले अच्छी तरह होमवर्क जरूर करें। पहली बार किसी बैंक से बात कर लेने का मतलब यह नहीं है कि उसी बैंक से लोन लें। अलग-अलग बैंकों की पेशकश और ब्याज दर की तुलना करते हुए होम लोन के लिए सबसे अच्छे बैंक का चयन करें। बैंक का चयन करने में ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस, लोन अवधि के दौरान टर्म आदि बातों पर गौर करें। कई बार लोग हड़बड़ी में किसी भी बैंक से कर्ज ले लेते हैं और बाद में दूसरे बैंक की पेशकश इससे अच्छी लगती है। 

एनबीएफसी की जगह बैंक को दें तवज्जो
होम लोन लेने में एनबीएफसी की बजाय बैंक से संपर्क करें। ऐसा इसलिए की अधिकांश एनबीएफसी की ब्याज दर बैंकों से कुछ ज्यादा होती है। यानी एनबीएफसी से लोन लेंगे तो अधिक ईएमआई देनी होगी। हां, यह जरूर है कि एनबीएफसी से आपको कम कागजी कार्रवाई करनी परे और जल्द लोन मिल जाये लेकिन यह हमेशा महंगा सौदा होगा। वहीं, बैंक से लोन लेने में पूरी कागजी कार्रवाई पूरी करनी हो लेकिन यह हमेशा सस्ते का सौदा होगा। 

क्रेडिट स्कोर पर मोलभाव करें 
बैंक के पास कर्ज का आवेदन करने करते वक्त उससे संभावित ब्याज दर के बारे में पता करें और फिर मोलभाव के लिए अपना क्रेडिट स्कोर दिखाएं। बेहतर क्रेडिट स्कोर देखने के बाद निश्चित तौर पर बैंक आपसे वसूली जाने वाली ब्याज दर में कुछ कमी कर देगा। यहां आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि लोन के लिए किसी भी बैंक की कोई तय ब्याज दर नहीं होती, यह संभावित ग्राहक की प्रोफाइल के हिसाब से बदलती रहती है। यदि आपकी प्रोफाइल बेहतर है, तो काफी संभव है कि आपको उस ग्राहक के मुकाबले कम ब्याज दर की पेशकश की जाए, जिसकी प्रोफाइल आपसे कमतर है। 

कौन है बेहतर लोन प्लान

फिक्स्ड होम लोन प्लान
फिक्स्ड होम लोन प्लान में बैंक एक तय दर पर लोन देते हैं। अगर किसी कारण से बाजार में उतार-चढ़ाव या आरबीआई द्वारा रेपो रेट में बदलाव किया जाता है तो भी ईएमआई में कोई बदलाव नहीं आता है। 
फायदा: फिक्स्ड होम लोन का फायदा है कि भविष्य में ब्याज दर बढ़ने पर आपके ऊपर इसका तत्काल असर नहीं होता है। 
नुकसान: भविष्य में ब्याज दर में कटौती होने पर बैंक आपके ब्याज दर में कटौती नहीं करते हैं।  फिक्स्ड रेट पर होम लोन की ब्याज दर हमेशा 1 या 2 फीसदी अधिक होती है। वहीं, बैंक पूरे लोन अवधि के लिए फिक्स्ड रेट पर लोन नहीं देते हैं। यह कुछ साल के लिए ही होता है। इसके बाद बैंक इसको फ्लोटिंग में बदल देते हैं। 

फ्लोटिंग होम लोन प्लान
फ्लोटिंग लोन में ब्याज बैंक के बेस रेट से जुड़ा होता है। इसलिए, बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के आधार पर बेस रेट चेंज होता है जिससे ब्याज दर घट या बढ़ जाता है।

फायदा:

फ्लोटिंग में ब्याज दर फिक्स्ड प्लान के मुकाबले कम होता है। ईएमआई कम आती है।
नुकसान:

अगर, भविष्य में बैंक ब्याज दर बढ़ाते हैं तो फ्लोटिंग रेट पर अधिक ईएमआई चुकाना पड़ सकता है।

फ्लेक्सी होम लोन प्लान
फ्लेक्सी होम लोन प्लान फ्लोटिंग और फिक्स्ड प्लान का मिश्रण है। इसे हाइब्रिड प्लान भी कहा जाता है। इस प्लान में लोन लेने पर कुछ साल तक इंटरेस्ट फिक्स्ड रेट से और उसके बाद फ्लोटिंग हो जाता है। 

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फायदा:

इस प्लान के तहत भविष्य में ब्याज दर बढ़ने पर भी ईएमआई नहीं बढ़ता है। इसको ऐसे समझ सकते हैं कि भविष्य में ब्याज बढ़ने पर आप फिक्स्ड और घटन पर फ्लोटिंग में कनवर्ट करा सकते हैं।

नुकसान:

फि़क्स्ड से फ्लोटिंग या फ्लोटिंग से फिक्स्ड आप पूरे लोन अवधि में सिर्फ एक बार करा सकते हैं।

ज्वाइंट होम लोन भी बढ़िया विकल्प  
अगर पति-पत्नी दोनों कमाऊ हैं तो उनके लिए ज्वाइंट होम लाने एक बेहतर विकल्प है। इसमें लोन की  पात्रता में इजाफा के साथ आयकर छूट का लाभ भी मिलता है। साथ ही ईएमआई के भुगतान में भी सहूलियत होती है। ज्वाइंट होम लोन में जितनी-जितनी हिस्सेदारी होती है उस अनुपात में वह धारा 80सी और धारा 24 के तहत लाभ मिलता है। ज्वाइंट होम लोन में मूलधन पर 3 लाख रुपए और ब्याज पर 4 लाख रुपए की टैक्स छूट मिलती है। 

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ये भी आजमा सकते हैं 
आंशिक प्री-पेमेंट: ये ईएमआई कम करने का सबसे आसान उपाय है। इसके लिए आप बोनस में मिलने वाली रकम, आय के साथ मिले एरियर,  शेयरों से हुई कमाई, संपत्ति बेचने, डिपॉजिट से मिल रकम आदि का इस्तेमाल करके आप होमलोन का प्री-पेमेंट कर सकते हैं। इसके लिए आपको कई शुल्क भी बैंक को नहीं देना होगा। एक बार में भुगतान किए जाने वाली रकम से आप लोन की मूल राशि घटा सकते हैं। और जो बची हुई ईएमआई जारी रहती है, प्रिंसीपल अमाउंट कम होने से ईएमआई भी सस्ती हो जाती है। इस तरह आपका ईएमआई चुकाने का समय कम हो जाता है। 

सस्ती ब्याज दरों पर लोन स्विच: अगर होम लोन लेने के बाद लगे कि बैंक आपसे अधिक व्याज वसूल रहा है तो आप दूसरे बैंक में लोन को ट्रांसफर करा सकते हैं। हालांकि, लोन स्विच करने से पहले प्रोसेसिंग फीस और ब्याज दर को अच्छी तरह से समझ लें। इसके बाद ही लोन को ट्रांसफर कराएं। 

होम लोन के बारे में जानिए सब कुछ
ब्याज दर:  8.45% से 14.5% 
ऋण राशि: संपत्ति मूल्य का 90% तक 
प्रोसेसिंग फीस:  ऋण राशि का 1% तक या अधिकतम 10,000 रुपये
ऋण अवधि: अधिकतम 30 साल
प्रति लाख रुपये पर न्यूनतम ईएमआई 769
प्रीपेमेंट शुल्क:  फ्लोटिंग रेट पर जीरो

फोटो क्रेडिटः लाइव मिंट 

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