Bank Merger Boost Indian Economy Pros Cons of bank Merger - मजबूत बैंकों से अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार; जानिए, विलय के फायदे और नुकसान DA Image

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मजबूत बैंकों से अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार; जानिए, विलय के फायदे और नुकसान

bank merger  rajeevkumr twitter 30 august  2019

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को दस बैंकों को मिलाकर चार मजबूत बैंक बनाने का ऐलान कर अर्थव्यवस्था को तेज रफ्तार देने का फैसला किया है। यह निर्णय ऐसे वक्त किया गया है जब विकास दर वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में घटकर पांच फीसदी पर आ गई है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले शुक्रवार को भी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बैंकिंग सुधारों का ऐलान किया था। इसमें बैंकों को 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी मुहैया कराने और कर्ज सस्ता करने जैसी घोषणाएं शामिल थीं। सीतारमण ने कहा कि सरकार का इरादा बैंकों को मजबूती के साथ उनकी स्वायत्तता देने का है। सरकार चाहती है कि बैंक ज्यादा प्रतिस्पर्धी माहौल में काम करें और ग्राहकों को ज्यादा बेहतर सेवाएं दे पाएं।

पीएनबी दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा : बैंक विलय की इन घोषणाओं के बाद  पीएनबी का कारोबार आकार 17.94 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा और वह दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक होगा। सबसे बड़े बैंक एसबीआई का कारोबार 52.05 लाख करोड़ रुपये है। वहीं केनरा बैंक विलय के बाद 15.20 लाख करोड़ के कारोबार के साथ चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनेगा। उसके बाद यूनियन बैंक होगा जिसका कारोबार 14.59 लाख करोड़ रुपये होगा। 

इलाहाबाद बैंक के इंडियन बैंक में विलय के बाद वह 8.08 लाख करोड़ के साथ सातवां सबसे बड़ा बैंक बनेगा। विजया बैंक और देना बैंक के विलय के बाद बैंक आफ बड़ौदा 16.13 लाख करोड़ रुपये के कारोबार के साथ देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बना है। हालांकि बैंक आफ इंडिया और सेंट्रल बैंक के साथ इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, बैंक आफ महाराष्ट्र तथा पंजाब एंड सिंध बैंक पूर्व की तरह अपना काम करते रहेंगे। 

विलय से फंसा कर्ज घटेगा, बैंकों की ताकत बढ़ेगी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बैंकों के विलय के साथ आर्थिक सुधार तेज करने का संकेत दिया। उन्होंने पिछले शुक्रवार को भी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बैंकिंग सुधारों का ऐलान किया था। सरकार का कहना है कि बैंकों के विलय से फंसा कर्ज घटेगा और ताकत बढ़ेगी। केंद्र का इरादा कम मगर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंकों को सामने लाने का है, ताकि विकास दर तेज की जा सके। इससे बैंकों की बैलेंसशीट सुधरेगी और कर्ज देने की क्षमता भी बढ़ेगी।

पीएनबी में ओरियंटल और यूनाइटेड बैंक
कुल शाखाएं  :     11,437
कुल कर्मचारी :     100649
सकल एनपीए :     6.61%
16000 करोड़ रुपये की पूंजी मिली पंजाब नेशनल बैंक को

इंडियन बैंक और इलाहाबाद बैंक
शाखाएं  :     6104
कर्मचारी :     42,814
एनपीए :     4.39%
2500 करोड़ रुपये की पूंजी मिली इंडियन बैंक को

केनरा और सिंडिकेट बैंक का विलय
शाखाएं :     10,324
कर्मचारी :     898485
कुल एनपीए :     5.62%
6500 करोड़ रुपये की पूंजी मिली केनरा बैंक को

यूनियन बैंक में आंध्र व कारपोरेशन
शाखाएं :     9609
कर्मचारी :     75,384
कुल एनपीए :     6.30%
11700 करोड़ रुपये की पूंजी मिली यूनियन बैंक को
7000 करोड़ रुपये की पूंजी मिली बैंक ऑफ बड़ौदा को

उदारीकरण के दौर से चल रही विलय प्रक्रिया
सरकारी बैंकों के विलय की प्रक्रिया उदारीकरण के दौर से चल रहीहै। मोदी सरकार के पहले न्यू बैंक ऑफ इंडिया का पीएनबी में विलय हो चुका है। निजी बैंक रत्नाकर बैंक और श्री कृष्णा बैंक का केनरा बैंक में विलय हुआ। आईएनजी वैश्य का कोटक महिंद्रा बैंक में विलय हुआ। 

ये 12 बैंक बचेंगे अब
प्रक्रिया पूरी होने के बाद 19 की जगह 12 सरकारी बैंक बचेंगे। विलय के बाद सरकारी क्षेत्र में भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और यूको बैंक रह जाएंगे। 

फायदे
मजबूती मिलने से बैंक सस्ता और ज्यादा कर्ज बांट सकेंगे।
बैंकों के परिचालन की लागत घटेगी।
बैंकों की नए राज्यों और क्षेत्रों में पहुंच बढ़ेगी।
नई तकनीक-विशेषज्ञता आ सकेगी।
बैंक कर्मियों के वेतन में असमानता दूर होगी।

नुकसान
बैंकों के विकेंद्रीकरण से क्षेत्रीय लाभ खत्म होंगे।
बड़े बैंकों में आर्थिक संकट के वक्त ज्यादा जोखिम होगा।
फंसे कर्ज में कमी,सुशासन बिना विलय का लाभ नहीं।
बैंक कर्मचारियों को तकनीकी स्तर पर चुनौती बढ़ेगी।

नरसिम्हन समिति बनी
वर्ष 1991 में बैंकिंग सुधार पर एमएल नरसिम्हन की अध्यक्षता में समिति का गठन हुआ। नरसिम्हन समिति ने देश में तीन-चार अंतरराष्ट्रीय स्तर के बैंक और दस राष्ट्रीय बैंकों की सिफारिश 
की थी। 

2017 : एसबीआई में पांच बैंकों का विलय
एसबीआई में उसके पांच सहायक बैंकों और महिला बैंक का विलय हुआ जो 2017 में प्रभावी हुआ।

2019 :तीन बैंकों का विलय किया गया
बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया और देना बैंक का विलय 2018 में घोषित हुआ था और अप्रैल 2019 से प्रभावी हुआ। 

इनका भारी एनपीए 
पीएनबी           16.49%
यूनाइटेड बैंक      15.89%
ओरियंटल बैंक      12.56%
केनरा बैंक         8.77%
सिंडिकेट           11.76%
यूनियन बैंक         15.18%
कारपोरेशन बैंक      15.44%
आंध्रा बैंक        16.44%
इलाहाबाद बैंक      17.43%
इंडियन बैंक        7.33%

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