बिजनेस

इलेक्ट्रिक वाहन और बीएस 6 के बीच फंसी ऑटो कंपनियां

सौरभ शुक्ल , नई दिल्ली Published By: Rakesh Last Modified: Tue, 18 Jun 2019 12:22 AM
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इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्पष्ट नीति का इंतजार लंबा होने और एक अप्रैल 2020 से बीएस 6 इंजन अनिवार्य होने के कारण ऑटो कंपनियों दुविधा में हैं। ऐसे में दिग्गज ऑटो कंपनियों ने नए निवेश की योजनाओं की रफ्तार फिलहाल रोक दी है। सरकार के इलेक्ट्रिक गाड़ियों के तरफ बढ़ते रुझान को देखते हुए बीएस 6 इंजन के लिए 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश कर चुकी कंपनियां अब परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है अगर इलेक्ट्रिक की तरफ भविष्य की सरकारी नीतियां जा रही हैं तो ऐसे में इस निवेश का क्या किया जाए।

उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हॉन्डा, टीवीएस जैसी कंपनियों ने टूव्हीलर इलेक्ट्रिक वाहनों पर नया निवेश फिलहाल रोक दिया है। ऑटो कंपनियों को फेम 2 पॉलिसी में सफाई का इंतजार है। फेम 2 लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक के दाम बढ़ गए हैं, जिसके चलते इनके खरीदार नदारद है। इन गाड़ियों पर मिलने वाली सब्सिडी में कमी के चलते गाड़ियों की कीमत अब बढ़ गई है। रही सही कसर देश में न के बराबर मौजूद गाड़ियों के चार्जिंग बुनियादी ढांचे ने पूरी कर दी है। कंपनियों की सबसे बड़ी दिक्कत इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े पेशेवरों की कमी भी है।

बीएस 6 इंजन में निवेश को लेकर चिंतित उद्योग
सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटो मोबाइल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन यानी सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने हिंदुस्तान को बताया कि ऑटो इंडस्ट्री बीएस 6 इंजन पर मेहनत कर रही है ऐसे में अगर सरकार को भविष्य में पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों को बंद करना है तो इसका क्या फायदा? देश में इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाने पर फोकस करना है तो कंपनियों को दोगुना निवेश करना होगा। 

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