DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिजनेस  ›  एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस जैक मा ने जापान के सॉफ्टबैंक के बोर्ड से दिया इस्तीफा

बिजनेसएशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस जैक मा ने जापान के सॉफ्टबैंक के बोर्ड से दिया इस्तीफा

एजेंसी,टोक्योPublished By: Drigraj
Mon, 18 May 2020 04:32 PM
एशिया के दूसरे सबसे बड़े रईस जैक मा ने जापान के सॉफ्टबैंक के बोर्ड से दिया इस्तीफा

चीनी अरबपति जैक मा ने जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप कॉरपोरेशन के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि जापानी टेक्नालॉजी कंपनी के ऑफिस साझेदारी उद्यम वीवर्क जैसे जोखिमपूर्ण निवेश को लेकर संघर्षपूर्ण स्थितियों के कारण मा ने इस्तीफा दिया। टोक्यो स्थित सॉफ्टबैंक ने वित्तीय परिणामों को जारी करने से पहले सोमवार को जैक मा के इस्तीफे की घोषणा की। हालांकि, कंपनी ने उनके इस्तीफे की वजह नहीं बताई। 

यह भी पढ़ें: फेसबुक-जियो डील से मुकेश अंबानी फिर बने एशिया के सबसे बड़े रईस, चीन के जैक मा अब इस स्थान पर

चीन की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के सह-संस्थापक मा ने हाल में कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में मदद के लिए मास्क और परीक्षण किट दान देने जैसे कई परोपकार के कार्य किए हैं।  सॉफ्टबैंक ने बोर्ड में तीन नए सदस्यों की घोषणा की, जिनमें सॉफ्टबैंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी योशिमित्सु गोटो और वासेदा विश्वविद्यालय के प्राध्यापक युको क्वामोटो शामिल हैं। सॉफ्टबैंक ने अलीबाबा में काफी निवेश किया है। मा 2007 में सॉफ्टबैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे और सॉफ्टबैंक के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी मासायोशी सोन के साथ उनके करीबी संबंध हैं। 

महामारी के बीच जापान की वृद्धि दर घटी, आने वाला वक्त हो सकता है और खराब

कोरोना वायरस महामारी के चलते चालू वर्ष की पहली तिमाही के दौरान जापान की अर्थव्यवस्था मंदी की गिरफ्त में आ गई। इस दौरान वहां उत्पादन, निर्यात और खर्च में कमी देखने को मिली और आशंका जताई जा रही है कि आने वाला समय अधिक खराब हो सकता है। जापान के कैबिनेट ऑफिस ने सोमवार को बताया कि जनवरी-मार्च अवधि के दौरान समायोजित वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी की वार्षिक वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत घट गई है। वार्षिक वृद्धि से पता चलता है कि अगले एक साल के दौरान वृद्धि दर क्या होगी। सिर्फ एक तिमाही के लिए ये गिरावट 0.9 प्रतिशत रही। 

इस दौरान निर्यात में 21.8 प्रतिशत की कमी आई। निजी आवासीय निवेश लगभग 17 प्रतिशत फिसल गया और घरेलू उपभोग 3.1 प्रतिशत गिर गया। विश्लेषकों का कहना है कि हालात के बदतर होने की आशंका है, क्योंकि विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ी चुनौती से जूझ रही है। 

संबंधित खबरें