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अनिल अंबानी की कंपनी बिक्री पर मतभेद! अब एलआईसी-EPFO पर है नजर

रिलायंस कैपिटल के लिए चार बोलियां प्राप्त हुई हैं। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 नवंबर थी। कॉस्मिया फाइनेंशियल और पीरामल ने संयुक्त रूप से 5,231 करोड़ रुपये के साथ सर्वाधिक ऊंची बोली लगायी है।

अनिल अंबानी की कंपनी बिक्री पर मतभेद! अब एलआईसी-EPFO पर है नजर
Deepak Kumarएजेंसी,नई दिल्लीMon, 05 Dec 2022 07:56 PM

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कर्ज में फंसी अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कैपिटल की बिक्री पर पेंच फंसता ही जा रहा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई सूत्रों के मुताबिक कंपनी के कर्जदाताओं और सलाहकारों के बीच मतभेद है। सूत्रों ने बताया कि कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) की मंगलवार को बैठक होने वाली है। 

दरअसल, कंपनी की बाध्यकारी बोलियों के बेहद कम मूल्य पर आने के साथ सलाहकारों और कर्जदाताओं की समिति के सदस्यों की समाधान प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राय हैं। उनके पास लिक्विडेशन के लिये कदम उठाना या फिर चल रही बोली प्रक्रिया को जारी रखने का विकल्प है।

क्या है आपत्ति: रिलायंस कैपिटल के प्रशासक वाई नागेश्वर राव के प्रक्रिया सलाहकार डेलॉयट की राय है कि बोलियों का मूल्य लिक्विडेशन वैल्यू 13,000 करोड़ रुपये से 70 प्रतिशत कम है। ऐसे में रिलांयस कैपिटल लिक्विडेशन के लिए जाती है तो ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता (आईबीसी) के तहत कंपनी को लगभग 13,000 करोड़ रुपये मिलेंगे।

वहीं दूसरी तरफ, कर्जदाताओं की समिति की सलाहकार केपीएमजी का कहना है कि उन्हें मौजूदा प्रक्रिया के साथ कदम बढ़ाना चाहिए और ऊंची बोली को स्वीकार कर समाधान प्रक्रिया को निष्कर्ष पर पहुंचाना चाहिए। सूत्रों ने कहा कि दो प्रक्रिया सलाहकारों के बीच अलग-अलग राय तो है ही, कर्जदाताओं की समिति के सदस्यों के बीच भी समाधान के विकल्पों को लेकर एक राय नहीं है।

ई-नीलामी पर जोर: कर्जदाताओं की समिति के कुछ सदस्यों का कहना है कि उच्च बोली लगाने वाले की बोली स्वीकार की जानी चाहिए। वहीं कुछ सदस्यों का कहना है कि अधिकतम राशि प्राप्त करने के लिये ई-नीलामी का विकल्प अपनाया जाना चाहिए, जो कीमत तय करने को लेकर अधिक पारदर्शी होगा और इस प्रक्रिया को देश में तरजीह भी दी जाती है।

ईपीएफओ-एलआईसी पर नजर: एजेंसी सूत्रों ने कहा कि मतभेदों को दूर करने में एलआईसी और ईपीएफओ (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन दोनों के सीओसी में 35 प्रतिशत मतदान अधिकार हैं। बता दें कि रिलांयस कैपिटल के ऊपर एलआईसी और ईपीएफओ का बकाया क्रमश: 3,400 करोड़ रुपये और 2,500 करोड़ रुपये है।

अहम है बैठक: सूत्रों ने कहा कि इन सबको देखते हुए सीओसी की मंगलवार को होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण है। बैठक में सभी पक्षों को स्वीकार्य समाधान निकालने के लिये सभी विकल्पों और सुझावों पर विचार किया जाएगा। 

किसने लगाई बोली: बता दें कि रिलायंस कैपिटल के लिए चार बोलियां प्राप्त हुई हैं। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 नवंबर थी। कॉस्मिया फाइनेंशियल और पीरामल ने संयुक्त रूप से 5,231 करोड़ रुपये के साथ सर्वाधिक ऊंची बोली लगायी है। इसके बाद हिंदुजा का स्थान है, जिसने 5,060 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। 

टॉरेंट और ओकट्री ने क्रमश: 4,500 करोड़ रुपये और 4,200 करोड़ रुपये की बोलियां लगायी है। स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं ने अपनी-अपनी रिपोर्ट में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएल) के परिसमापन मूल्य को क्रमशः 12,500 करोड़ रुपये और 13,200 करोड़ रुपये आंका है।

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