Hindi Newsबिज़नेस न्यूज़All Amrapali home buyers may get their home by March 2025 said R Vekatramani attorney general

आम्रपाली के सभी बायर्स को मार्च 2025 तक मिल जाएगा अपना घर 

आम्रपाली समूह के 21000 निवेशकों को इसी साल अपना घर मिलने की उम्मीद है। आम्रपाली के कोर्ट रिसीवर और अटार्नी जनरल ऑफ इंडिया आर वैंकटरामानी ने कहा कि सभी होम बायर्स को मार्च 2025 तक घर मिल जाएगा।

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्लीFri, 23 Feb 2024 06:53 AM
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आम्रपाली के बायर्स को अपने फ्लैट मिलने की एक उम्मीद जगी है। ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली प्रोजेक्ट में हजारों लोगों को उनके फ्लैट नहीं मिले हैं। गुरुवार को आम्रपाली के कोर्ट रिसीवर और अटार्नी जनरल ऑफ इंडिया आर वैंकटरामानी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फ्लैट मिलने की डेडलाइन बताई है। मार्च 2025 तक अम्रपाली के सभी बायर्स को घर मिलने का दावा किया गया है। 

इस साल के अंत तक 21000 को मिल जाएंगे घर: आम्रपाली समूह के 21000 निवेशकों को इसी साल अपना घर मिलने की उम्मीद है। एनबीसीसी ने दिसंबर 2024 तक सभी 21000 खरीदारों को फ्लैट देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ग्रेनो प्राधिकरण ने भी आम्रपाली की पांच आवासीय परियोजनाओं में करीब 75 एकड़ जमीन के विकास करने की अनुमति एनबीसीसी को दे दी है। आम्रपाली के घर खरीदारों को आश्वासन दिया गया कि उनके अधिकांश घर इस साल के अंत तक और बाकी मार्च 2025 तक मिल जाएंगे। 

2019 में प्रोजेक्ट अपने हाथ में लेने के बाद से एनबीसीसी ने अब तक 38,500 फ्लैटों में से 16,000 को पूरा कर लिया है। इनमें से 6,000 फ्लैट खरीदारों को सौंप दिए गए हैं और 10,000 डिलीवरी पाइपलाइन में हैं और खरीदारों के डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का काम चल रहा है। 

एनबीसीसी के सीएमडी केपी महादेवस्वामी ने संवाददाताओं से कहा, "हम बाकी के 21,000 फ्लैट दिसंबर 2024 तक और अन्य 1,000 फ्लैट, जो आदर्श आवास योजना के तहत बनाए जाने हैं, मार्च 2025 तक पूरा कर लेंगे।" 

देश की सबसे कठिन रियल एस्टेट चुनौती थी : दरअसल आम्रपाली प्रोजेक्ट के तहत 38,500 फ्लैट या तो अधूरे थे या नहीं बने थे। प्रमोटर पैसों की हेराफेरी के आरोप में जेल में थे। आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा नहीं था। 2018 में जब यह सुप्रीम कोर्ट के सामने यह केस आया तो आम्रपाली पैमाने के हिसाब से देश की सबसे कठिन रियल एस्टेट चुनौती थी। इतना कि कोर्ट को खुद ही हस्तक्षेप करना पड़ा।

कोर्ट ने दी अनोखी व्यवस्था, पांच साल बाद नजर आ रही मंजिल: कोर्ट ने पब्लिक सेक्टर के बिल्डर एनबीसीसी को बुलाया और एक रोडमैप तैयार किया। फॉर्मूला दिया कि एनबीसीसी फ्लैट्स का काम पूरा करेगी और कोर्ट रिसीवर के जरिए निगरानी करेगा। इसने इस कार्य के लिए वर्तमान अटॉर्नी-जनरल को नियुक्त किया। यह एक अनोखी व्यवस्था थी, लेकिन पांच साल बाद अंतिम मंजिल नजर आ रही है।
 

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