हैंड सैनेटाइजर की मांग में होगा इजाफा, देश की 732 कंपनियां निर्माण में जुटीं

Drigraj Madheshia नई दिल्ली | सुहेल हामिद,
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कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में मास्क और हैंड सैनेटाइजर की अहम भूमिका है। तीसरे दौर के लॉकडाउन में कुछ रियायत और चौथे दौर के लॉकडाउन में मिलने वाली छूट से हैंड सैनेटाइजर की मांग में एकदम इजाफा...

हैंड सैनेटाइजर की मांग में होगा इजाफा, देश की 732 कंपनियां निर्माण में जुटीं

कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में मास्क और हैंड सैनेटाइजर की अहम भूमिका है। तीसरे दौर के लॉकडाउन में कुछ रियायत और चौथे दौर के लॉकडाउन में मिलने वाली छूट से हैंड सैनेटाइजर की मांग में एकदम इजाफा होगा। इसलिए, सरकार ने बड़ी संख्या में कंपनियों को हैंड सैनेटाइजर बनाने के लाइसेंस जारी किए हैं। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के मुताबिक हैंड सैनेटाइजर और मास्क को आवश्यक वस्तु अधिनियम का दायरे में लाने के निर्णय के बाद करीब साढ़े सात सौ कंपनियों को हैंड सैनेटाइजर बनाने के लिए लाइसेंस जारी किए हैं ताकि सैनेटाइजर की मांग और आपूर्ति में संतुलन के साथ कीमतों पर अंकुश रखा जा सके।

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देश में सबसे अधिक हैंड सैनेटाइजर की कंपनियां हिमाचल प्रदेश में हैं। हिमाचल प्रदेश की 160 कंपनियों को सैनेटाइजर बनाने का लाइसेंस दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा सोलन में स्थित हैं। इसके बाद गुजरात का नंबर है। गुजरात में करीब सौ कंपनिया हैंड सैनेटाइजर बना रही हैं। सैनेटाइजर बनाने में उत्तर प्रदेश तीसरे नंबर पर है।

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मंत्रालय ने इन कंपनियों की हैंड सैनेटाइजर बनाने की प्रतिदिन क्षमता के साथ दस मई तक सप्लाई किए गए सैनिटाइजर की जानकारी भी साझा की है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इससे हैंड सैनेटाइजर की प्रतिदिन के उत्पादन पर नजर रखने में आसानी होती है ताकि मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाए रखा जा सके।

देश की 732 कंपनियां निर्माण में जुटीं

विभाग ने पूरे देश में हैंड सैनेटाइजर बनाने वाली कंपनियों की सूची भी जारी की है। इसके मुताबिक पूरे देश में 732 कंपनियां हैंड सैनिटाइजर बना रही हैं। इन कंपनियों को हैंड सैनेटाइर बनाने के लिए विभाग ने 25 मार्च से लेकर अप्रैल के मध्य तक लाइसेंस जारी किए हैं। हालांकि, कई कंपनियों के पास पहले से भी लाइसेंस था।

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दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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