लॉकडाउन के दौरान 12 लाख लोगों के खाते में आए 3,360 करोड़ रुपये, मोदी सरकार की इस स्कीम से मिली राहत

Drigraj Madheshia एजेंसी, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • लॉकडाउन के दौरान सरकार गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी समेत हर एक नागरिक को राहत देने की कोशिश में लगी हुई है
  • देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी सरकार  20 लाख करोड़ का बूस्टर डोज दे चुकी है
लॉकडाउन के दौरान 12 लाख लोगों के खाते में आए 3,360 करोड़ रुपये, मोदी सरकार की इस स्कीम से मिली राहत

लॉकडाउन के दौरान सरकार गरीब, मजदूर, किसान, कर्मचारी समेत हर एक नागरिक को राहत देने की कोशिश में लगी हुई है। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मोदी सरकार  20 लाख करोड़ का बूस्टर डोज दे चुकी है। वहीं नौकरीपेशा के लिए भी सरकार कई घोषणाएं कर चुकी है। पिछले दिनों वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के करीब 12 लाख सदस्यों ने लॉकडाउन के दौरान 3,360 करोड़ रुपये की निकासी की है। 

ईपीएफओ ने कर्मचारियों को राष्ट्रव्यापी पाबंदी की वजह से पैदा हुई दिक्कतों के मद्देननजर 28 मार्च को ईपीएफओ से अग्रिम निकालने की अनुमति दी थी। श्रमिकों को यह राशि वापस जमा नहीं करानी होगी। कोरोना वायरस महामारी की वजह से देश में 25 मार्च से लॉकडाउन लागू है।  सीतारमण ने रविवार को आर्थिक पैकेज की पांचवीं किस्त की घोषणा करते हुए कहा कि पिछले दो माह के दौरानर ईपीएफओ के 12 लाख सदस्यों ने 3,360 करोड़ रुपये की निकासी की है। 

यह भी पढ़ें: वित्त मंत्री का ऐलान- सरकार देगी 15 हजार से कम सैलरी वालों का ईपीएफ, टेक होम सैलरी बढ़ाने के लिए उठाया यह कदम

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत आने वाले कर्मचारी भविष्यि निधि संगठन (ईपीएफओ) ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत 12 लाख दावों का निपटान किया है।  ईपीएफ येाजना से विशेष निकासी का प्रावधान सरकार द्वारा घोषित पीएमजीकेवाई योजना का हिस्सा है। 

यह है प्रावधान

इस प्रावधान के तहत सदस्य तीन महीने के मूल वेतन और महंगाई भत्ते के बराबर या सदस्य के खाते में पड़ी राशि का 75 प्रतिशत, जो भी कम हो, निकाल सकते हैं। इस राशि को उन्हें वापस जमा कराने की जरूरत नहीं होगी। सीतारमण ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान 2.2 करोड़ भवन और निर्माण श्रमिकों को पीएमजीकेवाई योजना के तहत 3,950 करोड़ रुपये दिए गए। इससे पहले मार्च में श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने सभी राज्यों से 52,000 करोड़ रुपये के निर्माण उपकर से 3.5 करोड़ निर्माण श्रमिकों को वित्तीय मदद देने को कहा था। 

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Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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