ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News Business148000 Crore Fraud In 18 Public Banks In Last Financial Year RTI Revealed

आरटीआई में खुलासा: बीते वित्त वर्ष में 18 सरकारी बैंकों में 1.48 लाख करोड़ की धोखाधड़ी

भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक क्षेत्र के तत्कालीन 18 बैंकों द्वारा कुल 1,48,427.65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 12,461 मामले सूचित किए गए...

आरटीआई में खुलासा: बीते वित्त वर्ष में 18 सरकारी बैंकों में 1.48 लाख करोड़ की धोखाधड़ी
Drigraj Madheshiaएजेंसी,इंदौरThu, 23 Jul 2020 03:57 PM
ऐप पर पढ़ें

भारतीय रिजर्व बैंक ने बताया है कि पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में सार्वजनिक क्षेत्र के तत्कालीन 18 बैंकों द्वारा कुल 1,48,427.65 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के 12,461 मामले सूचित किए गए हैं।  प्रदेश के नीमच निवासी सूचना के अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने बृहस्पतिवार को "पीटीआई-भाषा" को बताया कि रिजर्व बैंक ने उन्हें आरटीआई के तहत उन्हें यह जानकारी दी है।  

सबसे ज्यादा फ्रॉड का शिकार एसबीआई बना

आरटीआई से मिले आंकड़ों पर गौर करें, तो पिछले वित्त वर्ष में धोखाधड़ी का सबसे बड़ा शिकार सरकारी क्षेत्र का शीर्ष बैंक भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) बना। एसबीआई द्वारा इस अवधि के दौरान 44,612.93 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से जुड़े 6,964 मामले सूचित किए गए। यह रकम बीते वित्त वर्ष के दौरान 18 सरकारी बैंकों में धोखाधड़ी की जद में आयी कुल धनराशि का करीब 30 प्रतिशत है। 

बैंक धोखाधड़ी की रकम मामले
एसबीआई 44,612.93 करोड़ रुपये 6,964
पंजाब नेशनल बैंक 15,354 करोड़ रुपये 395
बैंक ऑफ बड़ौदा 12,586.68 करोड़ रुपये 349
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 9,316.80 करोड़ रुपये 424
बैंक ऑफ इंडिया 8,069.14 करोड़ रुपये 200
केनरा बैंक 7,519.30 करोड़ रुपये 208
इंडियन ओवरसीज बैंक 7,275.48 करोड़ रुपये 207
इलाहाबाद बैंक 6,973.90 करोड़ रुपये 896
यूको बैंक 5,384.53 करोड़ रुपये 119

यह भी पढ़ें: आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा, ऋण का मौद्रिकरण फिलहाल सरकार के एजेंडा में नहीं

रिजर्व बैंक ने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक द्वारा एक अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 की अवधि में धोखाधड़ी के 395 मामले सूचित किए गए, जिसमें 15,354 करोड़ रुपये की धनराशि शामिल है।  इस फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर बैंक ऑफ बड़ौदा रहा जिसमें 349 मामलों के साथ 12,586.68 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आयी। गौरतलब है कि बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय एक अप्रैल, 2019 से अमल में आया था। 

इन बैंकों को भी लगी चपत

आलोच्य अवधि के दौरान यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 424 मामलों में 9,316.80 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ इंडिया ने 200 मामलों में 8,069.14 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 208 मामलों में 7,519.30 करोड़ रुपये, इंडियन ओवरसीज बैंक ने 207 मामलों में 7,275.48 करोड़ रुपये, इलाहाबाद बैंक ने 896 मामलों में 6,973.90 करोड़ रुपये और यूको बैंक ने 119 मामलों में 5,384.53 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी।

 रिजर्व बैंक ने सूचना के अधिकार के तहत बताया कि एक अप्रैल, 2019 से 31 मार्च, 2020 की अवधि में ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स ने 329 मामलों में 5,340.87 करोड़ रुपये, सिंडिकेट बैंक ने 438 मामलों में 4,999.03 करोड़ रुपये, कॉरपोशन बैंक ने 125 मामलों में 4,816.60 करोड़ रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने 900 मामलों में 3,993.82 करोड़ रुपये, आंध्रा बैंक ने 115 मामलों में 3,462.32 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने 413 मामलों में 3,391.13 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया ने 87 मामलों में 2,679.72 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक ने 225 मामलों में 2,254.11 करोड़ रुपये और पंजाब एंड सिंध बैंक ने 67 मामलों में 397.28 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की जानकारी दी।

यह भी पढ़ें: सोने-चांदी की कीमतों में बड़ा बदलाव, जानें 23 जुलाई का ताजा भाव

बहरहाल, रिजर्व बैंक की ओर से आरटीआई के तहत मुहैया करायी गई जानकारी में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों की प्रकृति और छल के शिकार तत्कालीन 18 सरकारी बैंकों या उनके ग्राहकों को हुए नुकसान का विशिष्ट ब्योरा नहीं दिया गया है।  गौरतलब है कि गुजरे बरसों में सिलसिलेवार एकीकरण के बाद देश में सरकारी क्षेत्र के बैंकों की संख्या फिलहाल 12 रह गई है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें