
शेयर मार्केट में खलबली, 3 दिन में 1300 अंक टूटा सेंसेक्स, क्या हैं कारण
Stock Market Updates: तीन दिनों के दौरान, सेंसेक्स में 1,300 अंकों (1.6%) और निफ्टी 50 में 440 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। केवल शुक्रवार को ही सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक गिरकर 82,670.95 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों के शेयरों में भी तेजी से बिकवाली हुई।
Stock Market Updates: घरेलू शेयर मार्केट के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 में शुक्रवार, 7 नवंबर को भारी गिरावट देखने को मिली। यह उनकी लगातार तीसरे दिन चल रही गिरावट थी। इन तीन दिनों के दौरान, सेंसेक्स में 1,300 अंकों (1.6%) और निफ्टी 50 में 440 अंकों (1.7%) से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। केवल शुक्रवार को ही सेंसेक्स 600 अंकों से अधिक गिरकर 82,670.95 के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों के शेयरों में भी तेजी से बिकवाली हुई।
भारतीय शेयर बाजार गिर क्यों रहा है? यहां हैं पांच प्रमुख कारण
वैश्विक बाजारों का नकारात्मक रुख
भारतीय शेयर बाजार में हालिया गिरावट का एक बड़ा कारण दुनिया भर के बाजारों में आई कमजोरी है। वैश्विक स्तर पर, अमेरिकी शेयर बाजार में शेयरों के बढ़े हुए मूल्यांकन को लेकर निवेशक सतर्क हो गए हैं। 7 नवंबर को जापान के निक्केई और दक्षिण कोरिया के कोस्पी जैसे एशियाई बाजारों में भी 2-2 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो अमेरिकी बाजारों में पिछले दिन हुई गिरावट का असर था। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने और अमेरिका में सरकारी शटडाउन के चलते आर्थिक आंकड़ों की कमी ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
भारत में टेक और कमोडिटीज क्षेत्र का प्रभावी न होना
इस साल वैश्विक बाजारों में होने वाली तेजी मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी (टेक) कंपनियों, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्साह के कारण है। भारत में इन क्षेत्रों की बड़ी वैश्विक कंपनियों की कमी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक प्रमुख कारण है कि इस साल भारतीय शेयर बाजार वैश्विक बाजारों से पिछड़ गया है।
आर्थिक आंकड़ों में चिंताएं
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1FY26) में भारत की सकल घरेल उत्पाद (जीडीपी) विकास दर 7.8 प्रतिशत रही, जो कि प्रभावशाली है। हालांकि, मुद्रास्फीति को समायोजित करने से पहले की विकास दर घटकर 8.8 प्रतिशत रह गई, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। यह आर्थिक कमजोरी का संकेत देती है। साथ ही, अक्टूबर में भारत के सेवा क्षेत्र की विकास दर भी पांच महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई। विशेषज्ञों का कहना है कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ कंपनियों की कमाई को प्रभावित करती है और इसके कमजोर रहने से बाजार के लिए समस्याएँ पैदा हो रही हैं।
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) मिले-जुले कॉर्पोरेट नतीजों, रुपये में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी फेड की ब्याज दर में कटौती की संभावना कम होने के कारण लगातार भारतीय शेयरों को बेच रहे हैं। नवंबर महीने में अब तक FIIs ने 6,214 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। जुलाई से लेकर अब तक उन्होंने कुल मिलाकर लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की शेयर बिकवाली की है। बाजार में FIIs की यह भारी बिकवाली, घरेलू निवेशकों (DIIs) की खरीदारी पर भारी पड़ रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे संबंधों के बावजूद, भारत-अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जो भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालाँकि गुरुवार को ट्रंप ने कहा कि व्यापार समझौते पर बातचीत अच्छी चल रही है और वह अगले साल भारत की यात्रा कर सकते हैं।





