ताइवान के बाद साउथ कोरिया ने भी भारत को पछाड़ा, स्टॉक मार्केट कैप रैंकिंग में 7वें स्थान पर ढकेला
मुख्य बातें
- भारत में AI स्टॉक्स की कमी के कारण निफ्टी इस साल 2026 में 15% तक गिर गया है
- रुपये के कमजोर होने, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, $100 प्रति बैरल से ऊपर क्रूड ऑयल की कीमतों और लगातार जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने हालात को और खराब कर दिया है
साउथ कोरिया ने भारत को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक स्टॉक मार्केट कैपिटलाइजेशन रैंकिंग में छठा स्थान हासिल कर लिया है। भारत खिसक कर अब सातवें नंबर पर आ गया है। दोनों बाजारों के बीच यह अंतर एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी और दोनों अर्थव्यवस्थाओं के सामने आने वाली अलग-अलग चुनौतियों के कारण हुआ है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक ताइवान 5.15 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के मार्केट कैप के साथ पांचवें स्थान पर है, जबकि दक्षिण कोरिया 5.04 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ छठे और भारत 4.84 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के स्टॉक मार्केट कैप के साथ सातवें स्थान पर आ गया है।
दक्षिण कोरिया और ताइवान की तेजी के राज
एआई बूम के चलते दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2026 में 100% से अधिक चढ़ा है। सैमसंग और SK हाइनिक्स दोनों ही 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के मार्केट कैपिटलाइजेशन क्लब में शामिल हो गए हैं, और सेमीकंडक्टर कंपनियां अब दोनों बाजारों का लगभग 60% हिस्सा हैं। ताइवान की चिप दिग्गज TSMC में 49% की तेजी देखी गई है।
भारत में गिरावट के कारण
भारत में AI स्टॉक्स की कमी के कारण निफ्टी इस साल 2026 में 15% तक गिर गया है। रुपये के कमजोर होने, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, $100 प्रति बैरल से ऊपर क्रूड ऑयल की कीमतों और लगातार जियो-पॉलिटिकल टेंशन ने स्थिति को और खराब कर दिया है।
भारत की अर्थव्यवस्था कोरिया से काफी बड़ी
इन सबके बावजूद , IMF के अनुसार भारत की 4.15 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था दक्षिण कोरिया के 1.93 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से काफी बड़ी है। विश्लेषकों का सुझाव है कि दक्षिण कोरिया के लिए असली परीक्षा अपने वैल्युएशन को बनाए रखना होगा, जबकि भारत के लिए मुद्रास्फीति और कमजोर कॉरपोरेट प्रॉफिटेबिलिटी के कारण रिकवरी का रास्ता अनिश्चित बना हुआ है।
आगे क्या होगा
ब्लूमबर्ग के मुताबिक आर्थिक सुधार की राह अनिश्चित नजर आ रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के थमने के कोई संकेत नहीं हैं, जबकि भारतीय मौसम विभाग के सामान्य मानसूनी बारिश का केवल 90 प्रतिशत रहने के अनुमान से महंगाई का दबाव और बढ़ने का खतरा है। कच्चे तेल और दूसरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतें भी कंपनियों की कमाई के लिए सीधी चुनौती बनती जा रही हैं।
विश्लेषकों ने आगाह किया है कि ऊंची कच्चे माल की लागत, सप्लाई चेन में रुकावटें और कीमतें बढ़ाने की कमजोर क्षमता पूरे वित्त वर्ष के दौरान मुनाफे पर असर डाल सकती है। क्रिसिल, एम्बिट कैपिटल और फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया म्यूचुअल फंड सभी ने हाल ही में विभिन्न क्षेत्रों में मुनाफे के मार्जिन पर बढ़ते दबाव को चिह्नित किया है, क्योंकि कंपनियाँ बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने के लिए संघर्ष कर रही हैं।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


