
यस बैंक में हिस्सेदारी नहीं बढ़ाएगा SMBC ग्रुप, शेयर टूटकर 23 रुपये के नीचे आया
संक्षेप: आरबीआई और सरकार ने मार्च, 2020 में, कोविड संकट शुरू होने से कुछ सप्ताह पहले यस बैंक को बाजार में बनाये रखने के लिए कदम उठाए। इसके तहत एसबीआई के नेतृत्व वाले बैंकों ने यस बैंक में 79 प्रतिशत हिस्सेदारी ली और इसे बाजार में बनाये रखने में मदद की।
जापानी लेंडर सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन की भारत के यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी 24.99% से आगे बढ़ाने की तत्काल कोई योजना नहीं है। इस खबर के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी यस बैंक के शेयर में बड़ी गिरावट देखी गई। शुक्रवार को यस बैंक के शेयर करीब 5 पर्सेंट गिरकर 22.06 रुपये के निचले स्तर पर आ गए। बैंक के शेयर के 52 हफ्ते का लो 16.02 रुपये है। शेयर का यह भाव मार्च 2025 में था।

क्या कहा कंपनी के अधिकारी ने?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की खबर के मुताबिक एसएमबीसी समूह के भारत प्रभाग के समूह कार्यकारी अधिकारी और प्रमुख राजीव कन्नन ने कहा कि बैंक, यस बैंक के बोर्ड में सबसे बड़े शेयरधारक के रूप में योगदान देने पर केंद्रित है और ऋणदाता में कार्यकारी भूमिका निभाने का इरादा नहीं रखता है। कन्नन ने कहा कि हम यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी नियामक द्वारा निर्धारित 24.99% की सीमा से आगे बढ़ाने पर सक्रिय रूप से विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा-ऐसे कई क्षेत्र हैं जिन पर यस बैंक को अभी भी काम करने की जरूरत है, और हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि जिन क्षेत्रों पर काम करने की उनकी योजना है, उन पर अमल हो रहा है।
कितनी है हिस्सेदारी?
सितंबर महीने में जापान की सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (एसएमबीसी) ने यस बैंक में 4.22 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल कर ली थी। इस अधिग्रहण के साथ, यस बैंक में एसएमबीसी की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत से बढ़कर 24.22 प्रतिशत हो गई है। एसएमबीसी ने 22 सितंबर को बाजार से इतर खरीद-बिक्री के माध्यम से 132.39 करोड़ शेयर हासिल किए। एसएमबीसी इस सौदे के साथ, यस बैंक का सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया है, जबकि एसबीआई के पास 10 प्रतिशत से अधिक की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनी हुई है।
एसबीआई और सात निवेशक वित्तीय संस्थानों ने मार्च, 2020 में यस बैंक पुनर्निर्माण योजना के तहत बैंक में निवेश किया था। सार्वजनिक क्षेत्र के एसबीआई के पास एक समय यस बैंक में 24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। उसके पास अब 10 प्रतिशत से थोड़ी अधिक हिस्सेदारी बची है।





