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चांदी बाजार में हाहाकार, भारत की जबरदस्त मांग से मचा संकट, 45 सालों में पहली बार हुआ ये

चांदी बाजार में हाहाकार, भारत की जबरदस्त मांग से मचा संकट, 45 सालों में पहली बार हुआ ये

संक्षेप:

चांदी के दाम 54 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गए, जिसके बाद एक ही दिन में लगभग 6.7% की गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति 45 साल पहले हंट ब्रदर्स द्वारा बाजार पर कब्जे की कोशिश के बाद सबसे बड़ा संकट मानी जा रही है।

Mon, 20 Oct 2025 06:26 AMVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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Silver Demand: दीवाली से पहले जिस तेजी की उम्मीद भारत में चाँदी के कारोबारियों को थी, उसने दुनिया के चाँदी बाजार को हिला कर रख दिया। भारत की रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी ने न सिर्फ घरेलू बाजार खाली कर दिए, बल्कि लंदन जैसे वैश्विक ट्रेडिंग हब में भी हड़कंप मचा दिया। चांदी के दाम 54 डॉलर प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर तक पहुंच गए, जिसके बाद एक ही दिन में लगभग 6.7% की गिरावट दर्ज की गई। यह स्थिति 45 साल पहले हंट ब्रदर्स द्वारा बाजार पर कब्जे की कोशिश के बाद सबसे बड़ा संकट मानी जा रही है।

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भारत में शुरू हुई चादी की दीवानगी

भारत में दीवाली और धनतेरस के मौके पर लाखों लोग देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए सोना-चांदी खरीदते हैं। आमतौर पर यह मांग सोने की ओर झुकती है, लेकिन इस बार तस्वीर उलट गई। सोशल मीडिया और निवेश विशेषज्ञों की सलाह से लोगों ने चाँदी की ओर रुख किया। इंवेस्टमेंट बैंकर और कंटेंट क्रिएटर सार्थक आहूजा ने अप्रैल में एक वायरल वीडियो में कहा था कि “सोने के मुकाबले चांदी का रेशियो 100:1 है, यानी अब चांदी की बारी है।” इसके बाद से देशभर में ‘सिल्वर बूम’ की लहर दौड़ गई। दिल्ली के एम.डी. ओवरसीज बुलियन के जनरल मैनेजर अमित मित्तल ने कहा, “इतनी भारी मांग हमने अपने 28 साल के करियर में कभी नहीं देखी।” चांदी की प्रीमियम दरें, जो सामान्यतः वैश्विक बाजार से कुछ सेंट अधिक होती हैं, बढ़कर 5 डॉलर प्रति औंस तक पहुँच गईं। कई बड़े रिटेलर्स और रिफाइनर्स के पास स्टॉक खत्म हो गया।

वैश्विक सप्लाई पर पड़ा असर

भारत की बढ़ती मांग के बीच चीन में छुट्टियां होने के कारण सप्लाई प्रभावित हुई। ऐसे में डीलरों ने लंदन का रुख किया, लेकिन वहां के वॉल्ट भी लगभग खाली मिले। लंदन के कीमती धातु भंडारों में करीब 36 अरब डॉलर की चांदी रखी होती है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा ETF निवेशकों के कब्जे में था। 2025 की शुरुआत से अब तक निवेशकों ने 10 करोड़ औंस से ज्यादा चाँदी खरीद ली, जिससे बाजार में फिजिकल चांदी की भारी कमी आ गई। जेपी मॉर्गन चेस, जो भारत को चांदी की बड़ी सप्लायर है, ने अपने ग्राहकों को बताया कि अक्टूबर में नई आपूर्ति संभव नहीं है और अब नवंबर में ही डिलीवरी दी जा सकेगी।

भारतीय ETF फंडों पर भी रोक

चांदी की इस अभूतपूर्व कमी ने निवेश फंडों को भी प्रभावित किया। कोटक एसेट मैनेजमेंट, UTI AMC और SBI म्यूचुअल फंड ने अपने सिल्वर फंड्स में नई सब्सक्रिप्शन को रोक दिया। कोटक के फंड मैनेजर सतीश डोंडापाटी ने कहा, “बाजार में FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) फैक्टर ने लोगों को चाँदी की ओर आकर्षित किया है। ऐसी तेजी हमने 14 साल में नहीं देखी।”

लंदन में पैनिक और बाजार ठप

लंदन में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई बड़े बैंक भाव बताने से पीछे हट गए। ओवरनाइट सिल्वर लोन की ब्याज दरें 200% वार्षिक तक पहुंच गईं। एक वरिष्ठ बैंकर ने बताया कि कई क्लाइंट्स फोन पर चिल्ला रहे थे क्योंकि वे अपनी चाँदी की डिलीवरी आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे। कई ट्रेडर्स ने दावा किया कि बाजार में इतने अलग-अलग भाव मिल रहे थे कि वे एक बैंक से खरीदकर दूसरे को बेचकर तुरंत मुनाफा कमा पा रहे थे — यह बाजार की असामान्यता का स्पष्ट संकेत था।

सोलर इंडस्ट्री और अमेरिकी टैरिफ

पिछले पांच सालों से वैश्विक चांदी की मांग, उत्पादन से अधिक रही है। सोलर पैनल उद्योग में चांदी की खपत दोगुनी हो चुकी है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ को लेकर डर के कारण कई ट्रेडर्स ने 200 मिलियन औंस चांदी न्यूयॉर्क भेज दी, जिससे लंदन के भंडार खाली होने लगे। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत तक लंदन के बाजार में उपलब्ध “फ्री फ्लोट” चांदी घटकर 150 मिलियन औंस से भी कम रह गई थी, जबकि प्रतिदिन लगभग 250 मिलियन औंस का कारोबार होता है।

संकट तोड़ने की कोशिशें और आगे का रास्ता

कॉमेक्स भंडारों से पिछले दो हफ्तों में 20 मिलियन औंस से अधिक चांदी निकाली गई, ताकि लंदन की सप्लाई को बहाल किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली है — कस्टम में देरी, फ्लाइट शेड्यूल और लॉजिस्टिक लागत ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषक डैनियल घाली, जो लंबे समय से इस संकट की चेतावनी दे रहे थे, ने कहा, “हमने उम्मीद नहीं की थी कि खुदरा निवेशक इतनी बड़ी भूमिका निभाएंगे। यह वाकई अभूतपूर्व स्थिति है।”

Varsha Pathak

लेखक के बारे में

Varsha Pathak
वर्षा पाठक बतौर डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर करीब 2 साल से हिन्दुस्तान डिजिटल से जुड़ी हुई हैं। मूल रूप से मधुबनी (बिहार) की रहने वाली वर्षा लाइव हिन्दुस्तान में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय वर्षा ने यहां से पहले दैनिक भास्कर और नेटवर्क 18 में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। करियर की छोटी अवधि में ही वर्षा के काम की ना सिर्फ सराहना हुई है बल्कि सम्मानित भी किया गया है। वर्षा ने जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री ली। और पढ़ें
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