होम लोन जल्दी चुकाएं या पैसा निवेश करें? जानिए किसमें होगा ज्यादा फायदा
मुख्य बातें
- अगर आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती के बाद आपकी होम लोन ईएमआई कम हो गई है या लोन का पीरियड घट गया है
- तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि अब एक्स्ट्रा पैसा होम लोन चुकाने में लगाना सही रहेगा या उसे कहीं निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होगा

अगर आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती के बाद आपकी होम लोन ईएमआई कम हो गई है या लोन का पीरियड घट गया है। तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि अब एक्स्ट्रा पैसा होम लोन चुकाने में लगाना सही रहेगा या उसे कहीं निवेश करना ज्यादा फायदेमंद होगा। इसका जवाब सभी के लिए एक जैसा नहीं है। यह आपके लोन, फाइनेंशियल और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है।
होम लोन चुकाते हुए कितने साल हो गए?
अगर आपका होम लोन अभी शुरुआती सालों में है, तो एक्स्ट्रा रकम से प्रीपेमेंट करना फायदेमंद हो सकता है। इसकी वजह यह है कि शुरुआती सालों में आपकी ईएमआई का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में जाता है। ऐसे में थोड़ा भी प्रीपेमेंट करने से मूलधन तेजी से कम होता है और पूरे लोन पर चुकाया जाने वाला ब्याज काफी घट सकता है।
वहीं, अगर आपका लोन खत्म होने के करीब है, तो स्थिति अलग होती है। उस समय ईएमआई का ज्यादातर हिस्सा मूलधन चुकाने में जाता है। ऐसे में प्रीपेमेंट करने से ब्याज में बहुत ज्यादा बचत नहीं होती। इसलिए ऐसी स्थिति में एक्स्ट्रा पैसे को लंबे पीरियड के निवेश में लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
रिटर्न को करें चेक?
निवेश और लोन के बीच फैसला करते समय सिर्फ रिटर्न का आंकड़ा नहीं देखना चाहिए। शेयर बाजार या इक्विटी म्यूचुअल फंड में मिलने वाला रिटर्न तय नहीं होता, जबकि होम लोन का ब्याज बचाना एक निश्चित फायदा है। इसलिए हमेशा टैक्स के बाद मिलने वाले वास्तविक रिटर्न और लोन की ब्याज दर की तुलना करें।
इमरजेंसी सेविंग न करें खत्म
एक और जरूरी बात यह है कि होम लोन चुकाने के चक्कर में अपनी इमरजेंसी सेविंग खत्म न करें। अचानक बीमारी, नौकरी जाने या किसी बड़े खर्च की स्थिति में यही फंड आपके काम आता है। अगर पूरा पैसा लोन में लगा देंगे, तो बाद में फिर कर्ज लेने की नौबत आ सकती है।
चेक कर लें किसमें है ज्यादा फायदा
साथ ही यह भी चेक लें कि आपके बैंक ने आरबीआई की ब्याज दरों में कटौती का फायदा आपके लोन पर लागू किया है या नहीं। कई फ्लोटिंग रेट लोन में नई ब्याज दर अगली रीसेट डेट पर लागू होती है। आखिर में फैसला सिर्फ गणित का नहीं, आपकी मानसिक शांति का भी है। अगर कम कर्ज होने से आपको सुकून मिलता है तो प्रीपेमेंट सही हो सकता है।


