चीनी के दाम में बड़ी गिरावट, 22 दिन में ₹16 तक हुई सस्ती; सरकार ने मिलों पर कसा शिकंजा

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मुख्य बातें

  • Sugar Prices:  नौ शहरों में चीनी के भाव ₹12 से ₹16 तक नीचे आए हैं
  • सबसे बड़ी गिरावट रांची, कोलकाता और गुवाहाटी में ₹15 की है
  • कानपुर में ₹16 की गिरावट है
  • इस बीच यूपी को सबसे बड़ा 4.20 लाख टन का कोटा मिला है

sugar Prices
त्योहारों शुरू होते ही सरकार ने चीनी मिलों पर सख्ती तेज कर दी है।

त्योहारों से पहले चीनी के बाजार में नरमी देखने को मिल रही है। देश के प्रमुख शहरों में 22 अगस्त के मुकाबले 12 सितंबर को चीनी के भाव 12 से 16 रुपये तक नीचे आ गए हैं। कानपुर में कीमत 69 से घटकर 53 और रांची में 70 से 55 रुपये पर आ गई हैं। वहीं कोलकाता और गुवाहाटी में भी 22 दिन में करीब 15 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज हुई है। चीनी के रिटेल रेट ChiniMandi से लिए गए हैं।

सरकार ने मिलों से कहा, 'कोटे के हिसाब से ही चीनी बेचें'

इसी बीच केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को पखवाड़े के लिए तय कोटे के मुताबिक ही चीनी बेचने और उसकी आपूर्ति करने का सख्त निर्देश दिया है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक, तय मात्रा से कम या ज्यादा बिक्री और डिस्पैच करने पर मिलों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

सरकार ने साफ किया है कि सितंबर के दूसरे पखवाड़े के चीनी कोटे में पहले पखवाड़े की बची हुई मात्रा को आगे बढ़ाने की कोई अतिरिक्त गुंजाइश नहीं होगी। यानी मिलों को जिस अवधि के लिए जितना कोटा मिला है, उसी के मुताबिक बिक्री और डिस्पैच करना होगा।

किस शहर में कितना कम हुआ चीनी का दाम

शहर

22 अगस्त के रेट

रुपये प्रति किलो

12 सितंबर के रेट

रुपये प्रति किलो

गिरावट

रुपये प्रति किलो

दिल्ली685513
कानपुर695316
रायपुर685513
मुंबई685414
रांची705515
कोलकाता705515
गुवाहटी715615
हैदराबाद705416
चेन्नई705812

587 मिलों और दो रिफाइनरियों के लिए 13 लाख टन का कोटा

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने 30 अगस्त की अधिसूचना के जरिए सितंबर के पहले पखवाड़े के लिए 587 चीनी मिलों और दो रिफाइनरियों को कुल 13 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी का कोटा आवंटित किया था।

इस व्यवस्था के तहत मिलों को अपने आवंटित कोटे का कम से कम 40 प्रतिशत पहले सप्ताह में और बाकी मात्रा अगले सप्ताह में बेचनी है।

उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा कोटा: राज्यों में उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा करीब 4.20 लाख टन का कोटा मिला है। इसके बाद महाराष्ट्र को करीब 4.10 लाख टन और कर्नाटक को 1.77 लाख टन आवंटित किया गया है। तमिलनाडु, गुजरात, बिहार और पंजाब को करीब 24 हजार से 44 हजार टन के बीच कोटा मिला है।

स्टॉक छिपाया तो खैर नहीं

सरकार ने चीनी मिलों के स्टॉक पर भी निगरानी बढ़ा दी है। सभी मिलों को सितंबर के पखवाड़े के लिए ओपनिंग स्टॉक, उत्पादन, बिक्री, डिस्पैच, रिलीज और क्लोजिंग स्टॉक का ब्योरा 18 सितंबर तक ऑनलाइन जमा करना होगा।

मिलों को बिक्री के बाद चीनी का डिस्पैच सात दिन के भीतर सुनिश्चित करने को कहा गया है। डिस्पैच से जुड़े GST बिलों का केंद्रीय और राज्य अधिकारियों की संयुक्त विशेष जांच में मिलान किया जाएगा। 31 अगस्त को घोषित क्लोजिंग स्टॉक का भी भौतिक सत्यापन किया जाएगा। स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

गलत जानकारी देने वाली मिलों पर भी कार्रवाई

सरकार पहले ही जुलाई 2026 के P-II रिटर्न में गलत या फर्जी जानकारी देने वाली कुछ मिलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुकी है। नियमों का पालन नहीं करने वाली मिलों को अगले पखवाड़े का चीनी रिलीज कोटा नहीं देने की चेतावनी भी दी गई है। मिलों को चीनी की अनिवार्य पैकेजिंग से जुड़े नियमों का पालन करने को भी कहा गया है। इसके तहत 20 प्रतिशत चीनी की पैकिंग जूट बैग में करना अनिवार्य है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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