चीनी के दाम धड़ाम: 11 दिन में दिल्ली-कानपुर में ₹8.50 किलो तक सस्ती; आपके शहर में कितना घटा भाव?

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मुख्य बातें

  • 11 सितंबर के आंकड़ों में खुदरा बाजार में कानपुर और दिल्ली में चीनी ₹53 किलो है, जो इन शहरों में सबसे कम है
  • वहीं चेन्नई में ₹58 किलो के साथ भाव सबसे ज्यादा है
  • यानी इन आंकड़ों में सबसे सस्ते और सबसे महंगे शहर के बीच ₹5 किलो का अंतर है

Sugar prices
सरकार की सख्ती के बाद चीनी के भाव तेजी से गिरने लगे हैं।

चीनी खरीदने वाले ग्राहकों के लिए सितंबर में राहत की खबर है। देश के प्रमुख शहरों में चीनी के दाम लगातार नीचे आए हैं। 10 सितंबर के बंद फुटकर भाव की तुलना में चीनी 4 रुपये किलो तक सस्ती हो चुकी है। जबकि, 1 सितंबर से 11 सितंबर के बीच दिल्ली और कानपुर में थोक भाव ₹850 प्रति क्विंटल यानी ₹8.50 किलो तक घट गया। वहीं रिटेल प्राइस की बात करें तो रायपुर और चेन्नई में ₹4 किलो, जबकि मुंबई में ₹2 किलो की गिरावट दर्ज की गई।

दिल्ली में ₹8.50 किलो तक सस्ती हुई चीनी

ChiniMandi के आंकड़ों के मुताबिक 1 सितंबर को दिल्ली में चीनी का थोक भाव ₹5,800 प्रति क्विंटल था। 11 सितंबर को यह घटकर ₹4,950 रह गया। यानी 10 दिनों में कीमत ₹850 प्रति क्विंटल या करीब 14.7 फीसदी कम हुई।

कानपुर में भी यही तस्वीर रही। यहां भाव 5,850 से गिरकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। यानी 850 रुपये प्रति क्विंटल की कमी। दूसरी ओर रायपुर में कीमत 5,500 से घटकर 5,100, जबकि चेन्नई में 6,000 से घटकर 5,600 रुपये प्रति क्विंटल रह गई।

किस शहर में कितनी सस्ती हुई चीनी?

1 सितंबर से 11 सितंबर के बीच दिल्ली में चीनी 5,800 रुपये प्रति क्विंटल से 4,950 पर आ गई है। इसमें 850 रुपये की कमी दर्ज की गई है। कानपुर की बात करें तो इस अवधि में चीनी का थोक भाव ₹850 ही घटकर 5,850 से 5,000 पर आ गया है। रायपुर में यह 5,500 रुपये से 5,100, मुंबई में 5,300 से 5,100 रुपये पर आ गई है। जबकि, रांची में चीनी का होलसेल रेट 5,500 से 5,150 रुपये पर आ गया है।

चीनी कोलकाता में 5,500 से 5,150 और गुवाहाटी में 5,550 से 5,200 रुपये पर आ गई है। यही चीनी हैदराबाद में 11 दिन पहले 5,400 रुपये की थी और आज 5,180 रुपये पर आ गई है। चेन्नई में 1 क्विंटल चीनी का दाम 6,000 से घटकर 5,600 रुपये पर आ गया है। सबसे ज्यादा गिरावट दिल्ली और कानपुर में हुई, जबकि मुंबई में इस अवधि में गिरावट सबसे कम रही।

खुदरा बाजार में भी ₹8 तक की राहत

खुदरा कीमतों का आंकड़ा देखें तो 1 सितंबर को दिल्ली में चीनी 61 रुपये किलो थी। 11 सितंबर को यह घटकर 53 रुपये किलो रह गई। यानी ग्राहक को सीधे ₹8 प्रति किलो की राहत मिली। कानपुर में भी भाव 62 से घटकर 53 रुपये किलो रह गया। यानी यहां ₹9 किलो की गिरावट हुई। रायपुर में 62 से 55, मुंबई में 61 से 54 और रांची में 61 से 55 रुपये प्रति किलो भाव रह गया। चेन्नई में खुदरा कीमत 63 से घटकर 58 रुपये किलो पर आ गई।

क्यों गिर रहे चीनी के दाम

सरकार की नजर सिर्फ कीमत पर नहीं, सप्लाई पर भी: सरकार का फोकस अब यह सुनिश्चित करने पर है कि त्योहारों के दौरान चीनी की कृत्रिम कमी न बने। इसके लिए मिलों को पर्याप्त मात्रा में बाजार में चीनी उपलब्ध कराने और उचित कीमत पर बिक्री करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार पहले ही चीनी के स्टॉक और बिक्री पर कई कदम उठा चुकी है। सितंबर से मिलों के लिए पखवाड़े के आधार पर बिक्री कोटा तय करने की व्यवस्था शुरू की गई है, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो और सप्लाई सुचारु बनी रहे।

दुकानदारों पर भी स्टॉक लिमिट का शिकंजा: सरकार ने चीनी कारोबारियों के स्टॉक पर भी सीमा लगाई है। 15 सितंबर से डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट घटाकर 2,000 क्विंटल की जा रही है। यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि कोलकाता में क्षेत्रीय सप्लाई जरूरतों को देखते हुए 4,000 क्विंटल की सीमा रखी गई है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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