भीषण गर्मी और कम बारिश ने बढ़ाई महंगाई की चिंता, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Weather Impacts: इस साल गर्मी और कम बारिश के कारण सब्जियों, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ना तय है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान मिडिल क्लास और गरीब परिवारों को उठाना पड़ेगा, जिनकी आय का एक बड़ा हिस्सा खाने पर ही खर्च होता है।

भीषण गर्मी और कम बारिश ने बढ़ाई महंगाई की चिंता, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

भारत इस साल दोहरी मुसीबत का सामना कर रहा है। एक भीषण गर्मी और दूसरी सामान्य से कम बारिश होने का मौसम विभाग का अनुमान। इसकी वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। यह उस समय हो रहा है, जब देश पहले से ही ऊर्जा के बढ़ते दामों से जूझ रहा है। इससे किसानों की कमाई घटेगी और ग्रामीण इलाकों में मंदी आ सकती है। रिजर्व बैंक के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। एक तरफ महंगाई काबू करनी है तो दूसरी तरफ विकास दर को भी बनाए रखना है।

47 डिग्री तापमान, बिजली की रिकॉर्ड खपत

उत्तरी भारत में इस हफ्ते पारा 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। लोग एसी और पंखे चलाकर गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

वहीं, मौसम विभाग ने जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश कम रहने का अनुमान जताया है। कम बारिश का सीधा असर खेती पर पड़ता है, क्योंकि भारत की अधिकांश फसलें इसी पर निर्भर हैं।

महंगाई और बढ़ने के आसार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल सब्जियों के दाम गिरने से महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे थी, लेकिन इस साल मौसम खराब होने से महंगाई 5% से ऊपर जा सकती है। RBI ने 4.6% का अनुमान लगाया था, लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यह आंकड़ा पार हो जाएगा।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया एंड न्यूजीलैंड बैंक के अर्थशास्त्री धीरज ने कहा, “गर्मी और बेमौसम बारिश से खाने-पीने के सामानों के दाम बढ़ेंगे।” वहीं, कच्चे तेल के ऊंचे दाम और खेती में लगने वाली लागत भी बढ़ेगी, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।

खाने-पीने की चीजों का महंगा होना सबसे बड़ा झटका

आम लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि खाने-पीने की चीजों का दाम बढ़ेगा। भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में खाद्य पदार्थों का वजन 37% है। हालाँकि पहले यह 46% था, लेकिन अब भी यह सबसे बड़ा हिस्सा है।

अगर फसल खराब होगी तो गांवों में लोगों की कमाई घट जाएगी। भारत की 60% से अधिक आबादी गांवों में रहती है और खेती पर निर्भर है। इससे ग्रामीण इलाकों में मांग घटेगी और देश की आर्थिक विकास दर पर भी असर पड़ेगा।

RBI की मुश्किलें बढ़ीं

महंगाई और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों से RBI की आगे की राह मुश्किल हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले ही संकेत दे दिया था कि ब्याज दरों में अभी कटौती नहीं होगी, लेकिन अगर बारिश कम हुई और महंगाई बढ़ी तो RBI को ब्याज दरें बढ़ाने पर भी विचार करना पड़ सकता है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अभिषेक गुप्ता का कहना है कि अगर मानसून सामान्य से कम रहा तो महंगाई 5.8% तक पहुंच सकती है। 2023 में जब बारिश सामान्य से 5.4% कम हुई थी तो फसल उत्पादन 3.5% गिर गया था और खाद्य महंगाई 8% तक बढ़ गई थी।

किसानों पर अतिरिक्त बोझ

कम बारिश होने पर किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए डीजल पंपों का इस्तेमाल करेंगे। ईरान युद्ध की वजह से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है, जिससे डीजल महंगा हो गया है। इससे किसानों की लागत बढ़ेगी और फिर उपज के दाम पर असर पड़ेगा। प्राइवेट मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, सूखे जैसे हालात बनने की 30% संभावना है। असली खतरा तब और बढ़ेगा, जब जुलाई-अगस्त में बारिशअगर कम हुई , क्योंकि ये फसल बोने के सबसे अहम महीने होते हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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