Stock Market Crash: सेंसेक्स 2000 अंक टूटा, निवेशकों के ₹9 लाख करोड़ डूबे, मार्केट क्रैश होने के ये हैं 5 कारण
मुख्य बातें
- Stock Market Crash: तीन दिनों से जारी तेजी का सिलसिला अचानक थम गया और बाजार में बिकवाली का तूफान आ गया
- सेंसेक्स 2000 अंक गिरा, निवेशकों के ₹9 लाख करोड़ डूबे
- जानिए बाजार में गिरावट की 5 बड़ी वजह

भारतीय शेयर मार्केट में गुरुवार, 19 मार्च को भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा। तीन दिनों से जारी तेजी का सिलसिला अचानक थम गया और बाजार में बिकवाली का तूफान आ गया। सेंसेक्स आज 2000 अंकों से ज्यादा टूटकर 74,685 के स्तर तक गिर गया, जबकि Nifty 50 भी 600 अंक लुढ़ककर 23,180 के करीब पहुंच गया।
₹9 लाख करोड़ का नुकसान
इस भारी गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप ₹439 लाख करोड़ से घटकर ₹430 लाख करोड़ रह गया। यानी सिर्फ कुछ घंटों में निवेशकों के करीब ₹9 लाख करोड़ डूब गए।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी नहीं बचे
गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 2% गिरा और स्मॉल कैप इंडेक्स में भी 2% की कमजोरी है। यानी पूरे बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
क्यों टूटा शेयर बाजार? जानिए 5 बड़ी वजह
1. ईरान-अमेरिका तनाव से घबराए निवेशक
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में डर बढ़ा दिया है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों से अनिश्चितता और बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की एक प्रमुख गैस सुविधा पर हमले के बाद ईरानी राष्ट्रपति ने इसके "अनियंत्रित परिणामों" की चेतावनी दी है, जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्ष ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं, जिससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आ रहा है।
2. कच्चा तेल 110 डॉलर के पार
ब्रेंट क्रूड 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। महंगा तेल यानी महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के मुताबिक, युद्ध को लेकर अनिश्चितता और गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 110 डॉलर से ऊपर बना रहता है, तो भारत के आर्थिक परिदृश्य पर इसका बुरा असर पड़ेगा और वित्त वर्ष 2027 में जीडीपी ग्रोथ और कंपनियों की कमाई पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
3. HDFC Bank के चेयरमैन का इस्तीफा
बैंक के चेयरमैन के इस्तीफे के बाद शेयर 8% टूट गया, जिससे बाजार पर बड़ा असर पड़ा। उन्होंने बैंक के भीतर "कुछ घटनाओं और प्रथाओं" का हवाला दिया, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। इस खबर के बाद एचडीएफसी बैंक का शेयर 772 रुपये के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया और यह गुरुवार को बाजार में सबसे बड़ा ड्रैग बना रहा।
4. फेड का सख्त रुख
अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों में कटौती को लेकर उम्मीदें कम कर दी हैं। इस बार फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे बाजार को इस साल कम से कम दो बार दरों में कटौती की उम्मीद थी, जो अब टूट गई है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते मुद्रास्फीति जोखिमों के कारण फेड इस साल दरों में कोई कटौती नहीं कर सकता है। इससे ग्लोबल लिक्विडिटी पर असर पड़ा।
5. रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर
डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर ₹92.89 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ। घरेलू शेयर मार्केट पर वैश्विक बाजारों का भी असर हुआ। अमेरिकी बाजार 1% से ज्यादा गिरे और एशियाई बाजारों में 3% तक गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
आगे क्या करें निवेशक?
विशेषज्ञों के अनुसार शॉर्ट टर्म में अस्थिरता बनी रह सकती है। तेल की कीमत और युद्ध की स्थिति अहम होगी और लॉन्ग टर्म निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। कुल मिलाकर ग्लोबल टेशन, महंगा तेल और घरेलू फैक्टर्स के चलते भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट आई है। निवेशकों के लिए यह समय सावधानी और रणनीति के साथ निवेश करने का है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


