
1,07,000 पर जाएगा सेंसेक्स! शेयर बाजार की जबरदस्त तेजी की उम्मीद, मॉर्गन स्टैनली की भविष्यवाणी
संक्षेप: मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिधम देसाई और नयनत पारिख का मानना है कि नीतिगत बदलाव और रिफ्लेशन पॉलिसी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत नोमिनल ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग्स की ओर ले जा रहे हैं।
Stock Market Outlook: भारतीय शेयर बाजार, जिसने 2025 में उभरते बाजारों (EM) के मुकाबले पिछले 31 साल का सबसे कमजोर प्रदर्शन दिया, वह 2026 में दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है। मॉर्गन स्टैनली के एनालिस्ट्स ने अपनी नई इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस ने दिसंबर 2026 के लिए सेंसेक्स का बुल-केस टारगेट 1,07,000 और बेस-केस टारगेट 95,000 तय किया है। मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट रिधम देसाई और नयनत पारिख का मानना है कि नीतिगत बदलाव और रिफ्लेशन पॉलिसी भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत नोमिनल ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग्स की ओर ले जा रहे हैं।

शेयर बाजार का 31 सालों का सबसे कमजोर प्रदर्शन
भारतीय शेयर बाजार, जिसने 2025 में उभरते बाजारों (EM) की तुलना में 31 सालों का सबसे कमजोर प्रदर्शन दिया, 2026 में दोबारा मजबूती हासिल कर सकता है। मॉर्गन स्टैनली ने अपनी नई इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में यह अनुमान जताया है और दिसंबर 2026 के लिए सेंसेक्स का बेस-केस लक्ष्य 95,000 तथा बुल-केस लक्ष्य 1,07,000 तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार, नीतिगत बदलाव और रिफ्लेशन पॉलिसीज़ भारतीय अर्थव्यवस्था में तेज़ नोमिनल ग्रोथ और कॉर्पोरेट अर्निंग्स की वापसी का रास्ता तैयार कर रही हैं। अक्टूबर में वैल्यूएशन में भारी सुधार देखा गया और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर है। इसके उलट, घरेलू निवेशकों का शेयर बाजार में बढ़ता निवेश बाजार को मजबूत आधार दे रहा है।
मॉर्गन स्टैनली की रिपोर्ट में क्या-क्या
मॉर्गन स्टैनली का मानना है कि RBI और सरकार की संयुक्त रिफ्लेशन रणनीति जैसे ब्याज दरों में कटौती, CRR कट, बैंकिंग डिरेग्युलेशन, लिक्विडिटी सपोर्ट, फ्रंट-लोडेड कैपेक्स और लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के GST कट्स, भारतीय अर्थव्यवस्था को अपेक्षा से बेहतर ग्रोथ दिला सकते हैं। इसके साथ ही चीन के साथ रिश्तों में सुधार और संभावित भारत–अमेरिका ट्रेड डील बाजार भावना को अतिरिक्त मजबूती देंगे।
ब्रोकरेज हाउस ने कहा कि भारत के लिए वैल्यूएशन रीरेंटिंग का मजबूत आधार बन रहा है। GDP में तेल पर निर्भरता कम होने, सेवा निर्यात में बढ़ोतरी और वित्तीय अनुशासन से बचत–निवेश अंतर घटेगा, जिससे रियल रेट्स नीचे आएंगे। वहीं, फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टार्गेटिंग से महंगाई और ब्याज दरों में अस्थिरता कम होगी, जो उच्च P/E मल्टीपल्स को सपोर्ट करती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की अर्निंग्स साइकिल अभी मध्य चरण में है और आगे और मजबूत होगी। इसके पाँच प्रमुख ड्राइवर बताए गए हैं—निजी कैपेक्स का उभरता चक्र, कॉरपोरेट बैलेंस शीट्स का मजबूत होना, बैंकिंग सिस्टम का स्वस्थ रहना, तेल निर्भरता कम होना और वैश्विक व्यापार में बढ़ती भागीदारी, तथा डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन का बढ़ना।
कितना है टारगेट
सेंसेक्स लक्ष्य के लिए मॉर्गन स्टैनली ने तीन आउटलुक पेश किए हैं। बेस केस, जिसकी संभावना 50% है, में सेंसेक्स का लक्ष्य 95,000 बताया गया है। इसमें वित्तीय अनुशासन, मजबूत घरेलू ग्रोथ, स्थिर वैश्विक माहौल, कम तेल कीमतें, 25 bps दर कटौती और रिटेल निवेशकों की भागीदारी जारी रहने जैसी शर्तें शामिल हैं। इस परिदृश्य में अर्निंग्स FY28 तक 17% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। बुल केस, जिसकी संभावना 30% है, में सेंसेक्स लक्ष्य 1,07,000 रखा गया है। इसमें तेल की कीमतें $65 प्रति बैरल से नीचे रहने, रिफ्लेशन पॉलिसीज़ के बेहतर असर और वैश्विक व्यापार तनाव में कमी जैसी स्थितियाँ शामिल हैं। इस केस में FY25–28 के दौरान अर्निंग्स 19% CAGR की दर से बढ़ सकती हैं। बियर केस, जिसकी संभावना 20% है, में सेंसेक्स का लक्ष्य 76,000 बताया गया है। यह परिदृश्य तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर रहने, RBI की कड़ी मौद्रिक नीति, वैश्विक मंदी, भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों में गिरावट और इक्विटी वैल्यूएशन कम होने जैसी चुनौतियों पर आधारित है। इसमें FY25–28 के लिए अर्निंग्स ग्रोथ 15% बताई गई है, जबकि FY26 अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है।
इन शेयरों पर भी नजर
पोर्टफोलियो रणनीति के तहत मॉर्गन स्टैनली ने बताया कि बाजार अब मैक्रो-ड्रिवन होता जा रहा है, जहां स्टॉक पिकिंग की भूमिका कम होती जाएगी। ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल्स, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी और इंडस्ट्रियल्स सेक्टर पर ओवरवेट रेटिंग बनाए रखी है, जबकि एनर्जी, मैटेरियल्स, यूटिलिटीज और हेल्थकेयर पर अंडरवेट रुख अपनाया है। कंपनी ने कहा कि वह कैपिटलाइजेशन-एग्नॉस्टिक है, यानी स्मॉल, मिड या लार्ज कैप किसी स्पेशल कैटेगरी को प्राथमिकता नहीं दी जा रही।





