
शॉर्ट सेलिंग पर सेबी की बड़ी तैयारी, ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए है अहम
शॉर्ट सेलिंग एक रणनीति है, जिसमें निवेशक किसी शेयर के दाम गिरने की आशंका में मुनाफा कमाने की कोशिश करता है। एसएलबी प्रणाली के तहत अपने डीमैट खातों में शेयर रखने वाले निवेशक या संस्थान, शुल्क लेकर उन्हें अन्य बाजार सहभागियों को उधार दे सकते हैं।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि बाजार नियामक जल्द ही ‘शॉर्ट सेलिंग’ और प्रतिभूति उधारी (एसएलबी) ढांचे की व्यापक समीक्षा के लिए एक कार्य समूह का गठन करेगा। बता दें कि शॉर्ट सेलिंग शेयर बाजार में कारोबार की एक रणनीति है, जिसमें निवेशक किसी शेयर के दाम गिरने की आशंका में मुनाफा कमाने की कोशिश करता है। वहीं, एसएलबी प्रणाली के तहत अपने डीमैट खातों में शेयर रखने वाले निवेशक या संस्थान, शुल्क लेकर उन्हें अन्य बाजार सहभागियों को उधार दे सकते हैं। यह ट्रांजैक्शन शेयर बाजारों के प्लेटफॉर्म के माध्यम से सैटलमेंट किया जाता है।

शॉर्ट सेलिंग की 2007 से शुरुआत
वर्ष 2007 में शुरू की गई ‘शॉर्ट सेलिंग’ की रूपरेखा अपनी शुरुआत से ही लगभग अपरिवर्तित रही है। इसी तरह 2008 में शुरू की गई और उसके बाद से कई बार संशोधित की गई एलएलबी प्रणाली भी वैश्विक बाजारों के लिए अब भी पूरी तरह तैयार नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि उधारकर्ता आमतौर पर इन सिक्योरिटीज का इस्तेमाल ‘शॉर्ट-सेलिंग’ के लिए या निपटान विफलताओं से बचने के लिए करते हैं। इसके साथ ही सेबी चेयरमैन ने बताया कि ‘स्टॉकब्रोकर’ और म्यूचुअल फंड नियमों की व्यापक समीक्षा पहले से ही जारी है। सेबी प्रमुख ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) से जुड़ी चिंताओं पर भी बात की और इस पर जोर दिया कि वैश्विक निवेशकों का भारत की विकास गाथा में अटूट विश्वास बना हुआ है।
आईपीओ के मूल्यांकन पर नियामकीय कमी नहीं
इस बीच, सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वार्ष्णेय ने कहा कि आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आईपीओ मूल्यांकन को लेकर कोई नियामकीय कमी नहीं है, लेकिन हमें यह देखना होगा कि खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए हम और सुरक्षा उपाय कैसे कर सकते हैं। वार्ष्णेय ने कहा, ''मैं यह नहीं कह रहा कि इसमें नियामकीय कमी है, लेकिन इस बात पर विचार करना अच्छा होगा कि जो मूल्यांकन किया जा रहा है वह सही है या नहीं। हमने देखा है कि बहुत सारे आईपीओ आ रहे हैं, जहां खुदरा निवेशक मूल्यांकन को चुनौती दे रहे हैं।''
इससे पहले सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने गुरुवार को साफ किया था कि पूंजी बाजार नियामक आईपीओ मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने कहा था, ''हम मूल्यांकन तय नहीं करते। यह निवेशकों के ऊपर निर्भर करता है।'' हाल में लेंसकार्ट के 7,200 करोड़ रुपये के आईपीओ की कीमत को लेकर चिंता जताई गई थी। इससे पहले नायका और पेटीएम जैसे आईपीओ पर कई हितधारकों ने मूल्यांकन संबंधी चिंताएं उठाई थीं।





