
विदेशी निवेशकों को रिझाने के लिए सेबी का बड़ा प्लान, 30 की जगह 5 दिन में होगा यह काम
SEBI Plans: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय शेयर मार्केट से दूर हो रहे विदेशी निवेशकों को रिझाने का एक प्लान बनाया है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि बाजार नियामक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा काफी कम करने की योजना बना रहा है।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भारतीय शेयर मार्केट से दूर हो रहे विदेशी निवेशकों को रिझाने का एक प्लान बनाया है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा है कि बाजार नियामक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रजिस्ट्रेशन की समयसीमा काफी कम करने की योजना बना रहा है। पांडेय के अनुसार, लक्ष्य है कि यह प्रक्रिया केवल 5 दिनों में पूरी हो, जबकि वर्तमान में इसके लिए 30 दिनों का प्रावधान है। हालांकि, लोगों की धारणा है कि इसमें कई महीने लग जाते हैं।
भारतीय बाजार को आकर्षक बनाने की कोशिश
विदेशी निवेशकों को और आकर्षित करने के लिए, सेबी उन्हें भारतीय बाजारों में प्रवेश करने के तरीके समझाने के लिए वेबिनार आयोजित कर रहा है ताकि उनकी ऑन बोर्डिंग प्रक्रिया आसान और तेज हो। पांडेय ने बताया कि सेबी अधिकारियों द्वारा आयोजित ऐसे वेबिनार में लगभग 2,000 एफपीआई शामिल हुए हैं। नियामक भारतीय पूंजी बाजार को विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना चाहता है, क्योंकि हाई वैल्युएशन और कमजोर कमाई जैसे कारण निवेशकों के रुख को प्रभावित कर रहे हैं।
घरेलू शेयर बाजार से बड़ी निकासी कर रहे FPI
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में एफपीआई ने शेयर बाजार से 1.66 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की थी, जबकि एक साल पहले उनका 427 करोड़ रुपये का निवेश आया था। वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी से लगभग 35,962 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है।
क्यों भाग रहे विदेशी निवेशक
माना जा रहा है कि हाई वैल्यूएशन और कमाई में लंबे समय तक मंदी ने विदेशी निवेशकों को भारतीय शेयरों से पैसा निकालकर ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे एआई-संचालित बाजारों में लगाने के लिए प्रेरित किया है।
जापानी निवेशकों में भारत पर भरोसा
सेबी चीफ ने कहा कि जापान में एफपीआई के साथ हाल की बातचीत से पता चला है कि उन देशों के साथ गहन संलग्नता की जरूरत है जिनके भारत के साथ पहले से मजबूत आर्थिक संबंध हैं। पांडेय ने जापानी निवेशकों में भारत को लेकर उच्च स्तर का विश्वास महसूस किया और बहुत कम चिंताएं सामने आईं। कई निवेशक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से आगे बढ़कर भारत में अपना पोर्टफोलियो एक्सपोजर बढ़ाना चाहते हैं। पांडेय के अनुसार, वे इस बात से खुश थे कि भारत में सूचीबद्ध कुछ जापानी सहायक कंपनियां बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं।
प्रक्रिया होगी आसान
पांडेय ने यह भी कहा कि कुछ छोटी जापानी इकाइयों ने न केवल भारत आने, बल्कि वहां लिस्ट होने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वे भारत में शोध कार्य करना और एक आरएंडडी सुविधा स्थापित करना चाहते हैं जो सूचीबद्ध हो। अनुमति समयसीमा कम करने का यह प्रयास प्रक्रिया के अधिक डिजिटलीकरण से जुड़ा हुआ है, जिसमें डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग भी शामिल है। एक बार प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल हो जाने के बाद, नियामक समयसीमा को अधिक पारदर्शी तरीके से ट्रैक और गणना करने की योजना बना रहा है।
SWAGAT-FI प्लेटफॉर्म
विदेशी निवेशकों की ऑन बोर्डिंग को आसान बनाने के लिए सेबी ने हाल ही में कई पहल की हैं। वर्ष 2025 में, इसने 'SWAGAT-FI' नामक एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो एफपीआई के लिए रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंटेशन और कंप्लेन के समधान के लिए सिंगल-विंडो इंटरफेस के रूप में कार्य करता है। इस प्लेटफॉर्म के साथ, बाजार नियामक का लक्ष्य एफपीआई, बिचौलियों और नियामक के बीच समन्वय में सुधार करना है, ताकि देरी कम हो और एफपीआई रजिस्ट्रेशन और पोस्ट-रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता आए।
कैपिटल गेन टैक्स एक चुनौती
हालांकि, एफपीआई को अभी भी भारतीय बाजारों में कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि उनके निवेश लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स। पांडेय ने माना कि अधिकांश अधिकार क्षेत्रों में विदेशियों के लिए कैपिटल गेन टैक्स नहीं है, लेकिन यह मामला सेबी के दायरे में नहीं आता है। भारत में, निवेश पर कर निवेश की अवधि के आधार पर लगाया जाता है। 12 महीने से पहले बुक किए गए लाभ को शॉर्ट टर्म निवेश माना जाता है, जिस पर 20% टैक्स लगता है, जबकि 12 महीने के बाद बुक किए गए प्रॉफिट पर लॉन्ग टर्म निवेश होते हैं और उन पर 12.5% टैक्स लगता है।





