सेबी ने गलतफहमी में की कार्रवाई… मार्केट से मालिक हुए बैन तो कंपनी ने दी सफाई
मुख्य बातें
- सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर और सीईओ राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में लेनदेन से अस्थायी रूप से रोक दिया है
- इसके साथ ही कंपनी को वित्तीय विवरण और संबंधित पक्षों के लेनदेन का सही और पारदर्शी खुलासा करने का निर्देश दिया गया है

गोल्ड कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्तीय अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसका घोषित राजस्व पूरी तरह सही है और बाजार नियामक सेबी के साथ किसी गलतफहमी के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। बता दें कि बाजार नियामक सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड के प्रमोटर, चेयरमैन और सीईओ राजेश मेहता को सिक्योरिटी मार्केट में कारोबार करने से रोक दिया है। सेबी ने यह फैसला वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर हेरफेर और फंड की हेराफेरी के आरोप के कारण लिया है।
सेबी की कार्रवाई पर कंपनी ने क्या कहा?
बेंगलुरु की इस आभूषण निर्यातक कंपनी ने बीएसई को दी गई जानकारी में कहा- राजेश एक्सपोर्ट्स द्वारा घोषित राजस्व सही हैं और राजस्व में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का कम्युनिकेशन संबंधी भ्रम और गलतफहमी प्रतीत होती है। कंपनी ने कहा कि सेबी का आदेश अंतरिम प्रकृति का है और किसी भी पहलू पर कोई प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।
कंपनी सभी जरूरी और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत कर सेबी को सभी पहलुओं पर स्पष्टीकरण देने की प्रक्रिया में है। राजेश एक्सपोर्ट्स ने कहा कि उसे विश्वास है कि सेबी प्रस्तुत प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करेगा और सही निष्कर्ष पर पहुंचेगा। सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में कंपनी को वित्तीय विवरणों, संबंधित पक्ष लेन-देन और अन्य नियामकीय खुलासों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सेबी के आरोप क्या हैं?
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के दौरान 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व बढ़ाकर दिखाने का आरोप लगाया है। सेबी के मुताबिक कंपनी ने अपने अधिकांश राजस्व को अपनी विदेशी अनुषंगी कंपनियों, खासकर स्विट्जरलैंड स्थित वलकैम्बी एसए से जोड़कर दिखाया, जबकि इस इकाई के एकल आधार पर वित्तीय विवरण में राजस्व का केवल एक छोटा हिस्सा ही दर्ज है। सेबी के मुताबिक राजेश एक्सपोर्ट्स ने 2020-21 से लेकर 2024-25 की अवधि में अपना राजस्व करीब 15.18 लाख करोड़ रुपये दिखाया। इसमें से 15.15 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 99.8 प्रतिशत राशि सब्सिडयरी कंपनियों से जुड़ी बताई गई। लेकिन इन आंकड़ों का मिलान समूह की प्रमुख सब्सिडयरी वलकैम्बी एसए के ऑडिटेड खातों से नहीं हो पाया।
बाजार नियामक ने कहा कि वलकैम्बी अपने खातों में केवल प्रोसेसिंग चार्ज या वैल्युएशन को ही राजस्व के रूप में दर्ज करती है जबकि राजेश एक्सपोर्ट्स और इसकी मध्यस्थ मूल कंपनी ग्लोबल गोल्ड रिफाइनरीज (जीजीआर) ने सोने के लेनदेन के कुल मूल्य को राजस्व के रूप में दिखाया।
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Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
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