रणबीर कपूर के इन्वेस्टमेंट वाली प्राइम फोकस को सेबी ने दिया क्लीन चिट, शेयर में 5% का लगा अपर सर्किट

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मुख्य बातें

  • सेबी से क्लीन चिट की खबर मिलते ही निवेशकों ने प्राइम फोकस के शेयरों में खरीदारी शुरू कर दी
  • शेयर 5% के अपर सर्किट पर पहुंच गया
  • इसमें रणबीर कपूर ने भी इसके शेयर 120 रुपये के भाव पर खरीदे थे
रणबीर कपूर के इन्वेस्टमेंट वाली प्राइम फोकस को सेबी ने दिया क्लीन चिट, शेयर में 5% का लगा अपर सर्किट

अभिनेता रणबीर कपूर जिस कंपनी के 12.5 लाख शेयर खरीदे हैं, उसे सेबी ने बड़ी राहत दी है। हम बात कर रहे हैं प्राइम फोकस की। सेबी से राहत मिलने के बाद एक बार फिर शेयर उड़ान भरने लगा है। मीडिया और विजुअल इफेक्ट्स (VFX) क्षेत्र की कंपनी प्राइम फोकस के शेयर बुधवार यानी आज एनएसई पर 5% के अपर सर्किट के साथ 245.85 रुपये पर पहुंच गए। यह तेजी तब आई जब SEBI ने कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ चल रही जांच और न्यायिक कार्यवाही को बंद कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

सेबी ने वित्त वर्ष 2020 और 2022 के दौरान प्राइम फोकस द्वारा किए गए कुछ कारोबारी लेनदेन की जांच शुरू की थी। कंपनी ने अपने VFX कारोबार को DNEG क्रिएटिव सर्विसेज और पोस्ट-प्रोडक्शन सर्विसेज कारोबार को DNEG इंडिया मीडिया सर्विसेज को ट्रांसफर किया था। दोनों कंपनियां प्राइम फोकस की अप्रत्यक्ष सहायक इकाइयां थीं और समान नियंत्रण के तहत संचालित हो रही थीं।

SEBI को किस बात पर था संदेह?

सेबी का मानना था कि इन सौदों से कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 में 200.27 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2022 में 250.20 करोड़ रुपये का फायदा हुआ। SEBI को आशंका थी कि इन फायदों के कारण कंपनी का मुनाफा और नेटवर्थ वास्तविक स्थिति से बेहतर दिखाया गया।

जांच में यह भी कहा गया था कि अगर VFX कारोबार के ट्रांसफर से प्राप्त लाभ को हटाया जाए तो प्राइम फोकस को FY20 में 267.83 करोड़ रुपये का घाटा दिखाना पड़ता।

अकाउंटिंग नियमों को लेकर उठा था विवाद

SEBI ने यह भी जांच की कि क्या कंपनी को इन ट्रांजैक्शन्स के लिए भारतीय लेखा मानक के उन प्रावधानों का पालन करना चाहिए था जो कॉमन कंट्रोल वाली यूनिट्स के बीच बिजनेस ट्रांसफर पर लागू होते हैं। नियामक यह देखना चाहता था कि कंपनी ने अकाउंटिंग ट्रीटमेंट सही तरीके से अपनाया था या नहीं।

SEBI की जांच में क्या निकला?

16 जून को जारी आदेश में SEBI के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर अमित कपूर ने कहा कि कंपनी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके। जांच में भ्रामक वित्तीय विवरण, अकाउंटिंग गड़बड़ी, लिस्टिंग नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों के पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

कंपनी को कैसे मिली राहत?

SEBI ने माना कि प्राइम फोकस ने संबंधित कारोबारी ट्रांसफर के लिए उचित अकाउंटिंग ट्रीटमेंट अपनाया था। इसी आधार पर कंपनी और उसके निदेशकों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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