शेयर बायबैक से म्यूचुअल फंड तक...सेबी की बैठक में अहम फैसला संभव
मुख्य बातें
- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की बैठक होने वाली है
- इस बैठक में कई अहम फैसले होने की उम्मीद है

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के निदेशक मंडल की शुक्रवार को एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में फ्री मार्केट बायबैक व्यवस्था को दोबारा शुरू करने, वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) योजनाओं की मंजूरी तेज करने और म्यूचुअल फंड के लिए इंट्राडे उधारी नियमों में ढील जैसे कई अहम प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। बाजार नियामक सेबी के इन प्रस्तावित कदमों का मकसद पूंजी बाजार को अपग्रेड करना है।
शेयर बायबैक सबसे पहला एजेंडा
बैठक के एजेंडा में एक प्रमुख प्रस्ताव शेयर बाजार के जरिये ओपन मार्केट में शेयरों की बायबैक को फिर से शुरू करने का है। इसके साथ ही बायबैक पूरा करने की समयसीमा घटाकर इश्यू खुलने की तारीख से 66 वर्किंग-डे करने का प्रस्ताव है जबकि पहले यह अवधि छह महीने तक हो सकती थी। हालांकि, कंपनियों को इश्यू अवधि के पहले आधे हिस्से में कुल निर्धारित राशि का कम-से-कम 40 प्रतिशत उपयोग करने की मौजूदा शर्त बनाए रखने का सुझाव दिया गया है। आपको बता दें कि यह बैठक सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय की अध्यक्षता में होने वाली छठी बोर्ड बैठक होगी। पांडेय ने एक मार्च, 2025 को सेबी प्रमुख का पदभार संभाला था।
इसके अलावा, निदेशक मंडल 'गरुड़' नामक हरित-चैनल व्यवस्था के प्रस्ताव पर भी फैसला ले सकता है। इस व्यवस्था के तहत वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) अपना नियोजन प्रस्ताव दाखिल करने के 10 वर्किंग-डे के भीतर फंड जुटाना शुरू कर सकेंगे जबकि अभी इसके लिए 30 दिन का इंतजार करना पड़ता है। इसका मकसद प्रक्रियाओं को सरल बनाना और पैसे जुटाने में तेजी लाना है।
म्यूचुअल फंड से जुड़े नियमों में ढील का प्रस्ताव
म्यूचुअल फंड के लिए कारोबारी सत्र के दौरान उधारी लेने से संबंधित नियमों में भी ढील देने का प्रस्ताव है। इसके तहत एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (एएमसी) को केवल रिडेम्प्शन भुगतान ही नहीं बल्कि ट्रेड सैटलमेंट, विदेशी मुद्रा देनदारियों, डेरिवेटिव मार्जिन भुगतान और अन्य कैश मैनेजमेंट जरूरतों के लिए भी इंट्राडे उधारी लेने की अनुमति दी जा सकती है।
यह प्रस्ताव म्यूचुअल फंड योजनाओं में कैश फ्लो के समय में अंतर से चुनौतियों को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है। फिलहाल, इंट्राडे उधारी का उपयोग मुख्य रूप से भुगतान और सैटलमेंट को पूरा करने के लिए किया जाता है।
सेबी ने किया आगाह
इस बीच, सेबी ने अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म या वेबसाइट के जरिये गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक हिस्सेदारी वाली कंपनियों के शेयरों की खरीद-बिक्री को लेकर निवेशकों को आगाह किया है। सेबी ने कहा कि ऐसे मंच न तो मान्यता प्राप्त हैं और न ही नियामक के अधीन आते हैं। बाजार नियामक ने बताया कि उसे कुछ ऐसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का पता चला है जो गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक हिस्सेदारी वाली कंपनियों की सिक्योरिटीज में लेनदेन की सुविधा दे रहे हैं, जिससे निवेशकों को बड़ा जोखिम हो सकता है।


