म्यूचुअल फंड से जुड़े नियम में बदलाव, अब इंट्राडे में भी किया जा सकेगा ये काम
मुख्य बातें
- सेबी ने अब करोबारी सत्र के दौरान ली और चुकाई जाने वाली 'इंट्राडे' उधारी के दायरे का विस्तार किया है
- नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड कंपनियां, यूनिटहोल्डर को पेमेंट करने के लिए इंट्राडे उधारी का इस्तेमाल कर सकते हैं

बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड से जुड़े एक अहम नियम में बदलाव किया है। नए नियम के तहत सेबी ने अब करोबारी सत्र के दौरान ली और चुकाई जाने वाली 'इंट्राडे' उधारी के दायरे का विस्तार किया है। नए नियम एक सितंबर से लागू होंगे। बता दें कि पहले म्यूचुअल फंड को केवल अस्थायी कैश जरूरतों को पूरा करने के लिए ही उधार लेने की अनुमति थी और वह भी नियामकीय सीमाओं के तहत करना होता था।
क्या हैं इसके मायने?
अब नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड कंपनियां, यूनिटहोल्डर को पेमेंट (जैसे रिडेम्पशन, IDCW पेमेंट और ब्याज का पेमेंट) करने के लिए इंट्राडे उधारी का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे इस सुविधा का इस्तेमाल स्कीम द्वारा किए गए निवेश से जुड़े पेमेंट, मार्क-टू-मार्केट देनदारियों, विदेशी मुद्रा सेटलमेंट और मौजूदा लोन को चुकाने के लिए भी कर सकते हैं। हालांकि, सेबी ने सख्त शर्त रखी है कि सभी 'इंट्राडे' यानी कारोबारी सत्र के दौरान लिए गए उधार उसी दिन चुकानी होंगी। यदि कोई उधारी अगले दिन तक जारी रहती है, तो उसे ओवरनाइट उधारी माना जाएगा और उस पर नियामकीय सीमाएं लागू होंगी।
सेबी ने क्यों लिया फैसला?
सेबी ने म्यूचुअल फंड को मार्केट सेटलमेंट के समय में अंतर के कारण होने वाली शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी की कमी को मैनेज करने के लिए यह कदम उठाया है। यह सभी म्यूचुअल फंड, एसेट मैनेजमेंट कंपनियों, ट्रस्टी कंपनियों, ट्रस्टी बोर्ड और AMFI पर लागू होगा। इस फैसले की सबसे बड़ी बात यह है कि इंट्राडे उधार का पूरा खर्च म्यूचुअल फंड कंपनी (AMC) खुद उठाएगी। इसका कोई भी बोझ म्यूचुअल फंड स्कीम या निवेशकों पर नहीं डाला जाएगा।
म्यूचुअल फंड में बढ़ा निवेश
शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच इक्विटी यानी शेयर में निवेश से जुड़ी म्यूचुअल फंड योजनाओं में जून के दौरान निवेश 26 प्रतिशत बढ़कर 28,973 करोड़ रुपये रहा। म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। हालांकि, बॉन्ड आधारित योजनाओं से 1.09 लाख करोड़ रुपये की निकासी के कारण जून में म्यूचुअल फंड उद्योग से कुल 52,949 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। यह मई में हुई 64,131 करोड़ रुपये की निकासी से कम रही।
इस बीच, म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल प्रबंधन अधीन परिसंपत्ति जून के अंत में बढ़कर 82.22 लाख करोड़ रुपये हो गईं, जो मई के अंत में 81.60 लाख करोड़ रुपये थीं। आंकड़ों के अनुसार, जून में इक्विटी योजनाओं में 28,973 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि मई में यह 22,908 करोड़ रुपये था। इससे पहले अप्रैल में 38,440 करोड़ रुपये, मार्च में 40,450 करोड़ रुपये, फरवरी में 25,978 करोड़ रुपये और जनवरी में 24,028 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज किया गया था।
लेखक के बारे में
Deepak Kumarहिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।
और पढ़ें

