LIC के फंसे करोड़ों रुपये! SEBI एक्शन के बाद इस कंपनी में फिर लगा 5% लोअर सर्किट, अब तक 90% टूट चुका है यह शेयर
मुख्य बातें
- SEBI द्वारा प्रमोटर राजेश मेहता पर कार्रवाई के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) के शेयर में 5% का लोअर सर्किट लगा
- कंपनी में LIC की 10.8% और करीब 1.94 लाख रिटेल निवेशकों की 14.13% हिस्सेदारी है
- शेयर अपने 2023 के ऑल टाइम हाई ₹1,029 से करीब 90% टूट चुका है

सोना और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ी कंपनी राजेश एक्सपोर्ट (Rajesh Exports) इन दिनों भारी विवादों में घिरी हुई है। कंपनी के शेयरों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और निवेशकों की चिंता बढ़ती जा रही है। बुधवार 10 जून को भी कंपनी का शेयर 5% के लोअर सर्किट पर बंद हुआ, जो लगातार 5वां कारोबारी सत्र था, जब शेयर में बिकवाली का दबाव बना रहा। SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट आई है और निवेशकों की बड़ी रकम डूब चुकी है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
पिछले एक सप्ताह में राजेश एक्सपोर्ट (Rajesh Exports) का शेयर करीब 22.6% टूट चुका है, जबकि एक महीने में इसमें 30% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई है। अगर लंबी अवधि की बात करें तो पिछले 6 महीनों में शेयर 55% और एक साल में लगभग 58% तक गिर चुका है। लगातार गिरावट के चलते बाजार में कंपनी को लेकर नकारात्मक माहौल बन गया है।
मामला तब और गंभीर हो गया, जब खबर सामने आई कि केंद्र सरकार का भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) कंपनी को एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए चल रही PLI योजना से बाहर करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रालय के भीतर कंपनी को योजना से अयोग्य घोषित करने के पक्ष में मजबूत राय बन रही है। अगर ऐसा होता है, तो यह कंपनी के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, क्योंकि ACC बैटरी कारोबार उसके भविष्य की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है।
विवाद की जड़ SEBI की 109 पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में SEBI ने प्राथमिक तौर पर आरोप लगाया है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने कारोबार और राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। नियामक के अनुसार लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी हो सकती है, जो कंपनी की सहायक इकाइयों के कुल राजस्व का लगभग 99.8% हिस्सा बताया गया है।
SEBI ने फंड डायवर्जन, संबंधित पक्षों के साथ संदिग्ध लेन-देन और खुलासों में गंभीर कमियों की भी बात कही है। इसके बाद कंपनी के चेयरमैन और प्रमोटर राजेश मेहता को फिलहाल कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री करने से रोक दिया गया है। साथ ही कंपनी के खातों का नया फॉरेंसिक ऑडिट कराने का भी निर्देश दिया गया है।
हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट (Rajesh Exports) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि SEBI ने उसकी स्विस सहायक कंपनी Valcambi के EBITDA आंकड़ों को गलती से राजस्व मान लिया, जिससे पूरा भ्रम पैदा हुआ। कंपनी का दावा है कि उसके द्वारा घोषित किए गए राजस्व आंकड़े सही हैं और उसने जांच के दौरान 300 से 400 GB तक के दस्तावेज SEBI को उपलब्ध कराए थे।
कंपनी के चेयरमैन राजेश मेहता का कहना है कि नियामक शायद सही दस्तावेजों तक नहीं पहुंच पाया, इसलिए गलत निष्कर्ष निकाले गए। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि अगले 15 दिनों में सभी जरूरी दस्तावेज दोबारा जमा किए जाएंगे, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर परफॉर्मेंस
राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में हाल के दिनों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है। बुधवार को कंपनी का शेयर NSE पर 4.99% टूटकर ₹84.66 पर बंद हुआ और लगातार 5वें कारोबारी सत्र में लोअर सर्किट में फंस गया। SEBI द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों और कंपनी की वित्तीय रिपोर्टिंग को लेकर उठे सवालों के बाद निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 22.6% गिर चुका है, जबकि एक महीने में इसमें लगभग 30% की गिरावट दर्ज की गई है। बीते 6 महीनों में शेयर ने 55% से अधिक और पिछले एक साल में करीब 58% का नुकसान दिया है। कभी ₹1,000 से ऊपर कारोबार करने वाला यह शेयर अब दो अंकों में पहुंच चुका है।
फिलहाल, निवेशकों की नजर दो बड़ी घटनाओं पर टिकी हुई है। पहली SEBI की जांच का अंतिम निष्कर्ष और दूसरी सरकार का ACC बैटरी PLI योजना में कंपनी की पात्रता पर फैसला। जब तक इन दोनों मामलों में स्पष्टता नहीं आती, तब तक राजेश एक्सपोर्ट (Rajesh Exports) के शेयरों में उतार-चढ़ाव और दबाव बने रहने की संभावना है। ऐसे में निवेशकों को कंपनी से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।


