
SBI- बैंक ऑफ बड़ौदा को कंपनी बनाने की मंजूरी, क्या होगा काम, समझें
दोनों बैंकों ने अपनी-अपनी नियामकीय फाइलिंग में बताया कि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने उन्हें प्रस्तावित कंपनी IDPIC में 30% से अधिक हिस्सेदारी रखने की अनुमति अक्टूबर 2026 तक दी है।
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से डिजिटल पेमेंट्स इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के लिए धारा 8 कंपनी बनाने की मंजूरी मिल गई है। दोनों बैंकों ने अपनी-अपनी नियामकीय फाइलिंग में बताया कि केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने उन्हें प्रस्तावित कंपनी इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉरपोरेशन (IDPIC) में 30% से अधिक हिस्सेदारी रखने की अनुमति अक्टूबर 2026 तक दी है।
क्या होगा फायदा?
यह नया प्लेटफॉर्म देश में डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा बढ़ाने, धोखाधड़ी रोकने और पेमेंट सिस्टम की पारदर्शिता व विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे डिजिटल पेमेंट्स से जुड़े डेटा विश्लेषण, जोखिम आकलन और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और भी बेहतर हो सकेगी। दोनों बैंक के शेयर की बात करें तो एसबीआई में मामूली गिरावट आई और यह 0.14% नीचे बंद हुआ। इसके बावजूद, शेयर ने साल की शुरुआत से अब तक लगभग 21% की बढ़त दर्ज की है। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा का शेयर 1.6% गिरावट के साथ बंद हुआ लेकिन यह स्टॉक भी साल 2025 में अब तक 18% तक चढ़ चुका है।
क्रेडफ्लो को एनबीएफसी लाइसेंस मिला
छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए लोन और कैश फ्लो प्लेटफॉर्म क्रेडफ्लो को भारतीय रिजर्व बैंक से नई गैर-जमा लेने वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) का लाइसेंस प्राप्त हुआ है। क्रेडफ्लो ने कहा कि एनबीएफसी अपनी समूह इकाई 'कैशपॉजिटिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड' के माध्यम से 'कैशफ्लोट' ब्रांड नाम से काम करती है। कंपनी ने बताया कि यह मंच पहले से ही चालू है और लोन वितरित कर रहा है, साथ ही यह भी कहा कि क्रेडफ्लो भारत की पहली सही मायने में डेटा-आधारित एनबीएफसी है।





