
सत्य नडेला को मिली रिकॉर्ड ₹849 करोड़ सैलरी, AI ग्रोथ के बीच ऐतिहासिक उपलब्धि
संक्षेप: वित्तीय वर्ष 2024-25 में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सत्य नडेला की कुल सैलरी 96.5 मिलियन डॉलर (करीब ₹849 करोड़) तक पहुंच गया। यह उनके अब तक के करियर का सबसे ऊंचा स्तर है। कंपनी ने इस वृद्धि का श्रेय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में अभूतपूर्व प्रगति को दिया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सत्य नडेला की कुल सैलरी 96.5 मिलियन डॉलर (करीब ₹849 करोड़) तक पहुंच गया। यह उनके अब तक के करियर का सबसे ऊंचा स्तर है। कंपनी ने इस वृद्धि का श्रेय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में अभूतपूर्व प्रगति को दिया है।

प्रदर्शन-आधारित वेतन का रिकॉर्ड
ब्लूमबर्ग के मुताबिक कंपनी के नए प्रॉक्सी फाइलिंग में बताया है कि नडेला का वेतन पिछले वर्ष के 79.1 मिलियन डॉलर से 22 प्रतिशत बढ़ा है। इसमें से लगभग 90% हिस्सा शेयरों के रूप में दिया गया है। उनका बेसिक वेतन 2.5 मिलियन डॉलर है, जबकि करीब 9.5 मिलियन डॉलर नकद बोनस के रूप में मिला। माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक मंडल ने कहा कि नडेला के कुल पारिश्रमिक का 95% हिस्सा परफॉर्मेंस-आधारित है, जो कंपनी के मुनाफे और शेयर रिटर्न से जुड़ा है।
माइक्रोसॉफ्ट की आय वर्ष 2025 में 15% बढ़कर 281.7 बिलियन डॉलर पहुंच गई, जबकि शुद्ध लाभ 16% की वृद्धि के साथ 101.8 बिलियन डॉलर रहा। कंपनी के शेयर भी इस साल अब तक 23% उछले हैं, जो S&P 500 इंडेक्स की 15% बढ़त से अधिक है।
शीर्ष अधिकारियों के वेतन में भी उछाल
कंपनी की मुख्य वित्तीय अधिकारी एमी हुड की कुल कमाई 29.5 मिलियन डॉलर दर्ज की गई, जबकि नई कमर्शियल डिवीजन प्रमुख जडसन अलथॉफ को 28.2 मिलियन डॉलर का वेतन पैकेज मिला। इन बढ़ोतरी ने संकेत दिया कि कंपनी अपने शीर्ष प्रबंधन को मौजूदा AI-आधारित दिशा के लिए पुरस्कृत कर रही है।
नडेला का जीवन परिचय
हैदराबाद में जन्मे सत्य नडेला ने 1988 में मैंगलोर यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने अमेरिका जाकर यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मिलवॉकी से 1990 में कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स किया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सन माइक्रोसिस्टम्स से की, लेकिन 1992 में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ने के बाद उन्होंने Windows NT ऑपरेटिंग सिस्टम में योगदान दिया।
धीरे-धीरे वे क्लाउड और सर्वर डिवीजन के प्रमुख बने और फिर 2014 में माइक्रोसॉफ्ट के तीसरे CEO बने।
उनके नेतृत्व में माइक्रोसॉफ्ट ने न केवल अपनी खोई प्रतिस्पर्धा फिर पाई बल्कि दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक बन गई। इस वर्ष उनकी आय का रिकॉर्ड यह दिखाता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता में निवेश ने कंपनी को नए युग में पहुंचा दिया है।





