सैलरी अकाउंट रखने वाले हो जाएं सावधान! वरना आपका अकाउंट हो जाएगा 'आम'
अगर आप भी हर महीने सैलरी का इंतजार करते हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आज हम बात करेंगे सैलरी अकाउंट की। यह कोई आम बचत खाता नहीं है, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई को घर लाने का सबसे स्मार्ट तरीका है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।

अगर आप भी हर महीने सैलरी का इंतजार करते हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है। आज हम बात करेंगे सैलरी अकाउंट की। यह कोई आम बचत खाता नहीं है, बल्कि आपकी मेहनत की कमाई को घर लाने का सबसे स्मार्ट तरीका है। आइए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
क्या है सैलरी अकाउंट?
बहुत ही सीधी-सादी बात है। सैलरी अकाउंट एक खास तरह का बचत खाता होता है, जिसमें आपका नियोक्ता हर महीने आपका वेतन डालता है। यह नियोक्ता के लिए भी आसान है और आपके लिए भी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपके पैसे को सेफ रखने के साथ-साथ कई सुविधाएं भी देता है।
कौन खोल सकता है सैलरी अकाउंट?
यहां थोड़ा ध्यान देने की बात है। यह अकाउंट कोई भी आम आदमी सीधे बैंक जाकर नहीं खोल सकता। इसके लिए जरूरी है कि आपकी कंपनी का उस बैंक के साथ करार हो। कंपनी अपने सभी कर्मचारियों के लिए एक साथ कई अकाउंट खुलवाती है और हर महीने तनख्वाह सीधे इनमें ट्रांसफर कर देती है। तो अगर आपकी कंपनी का किसी बैंक से ऐसा करार है, तो आप भी इस सुविधा का फायदा उठा सकते हैं।
क्यों है सैलरी अकाउंट खास?
अब जान लेते हैं कि आखिर इसे इतना खास क्यों माना जाता है।
1. टेंशन-फ्री जीरो बैलेंस: सबसेबड़ी राहत की बात यह है कि इसमें आपको कोई न्यूनतम राशि अपने खाते में रखने की जरूरत नहीं होती। यानी अगर महीने के आखिर में आपका खाता खाली हो जाता है, तो भी कोई जुर्माना नहीं कटेगा। यह उन लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है जो अपनी पूरी सैलरी का इस्तेमाल कर लेते हैं या दूसरी जगह निवेश कर देते हैं।
2. फ्री में मिलने वाली सुविधाएं: सैलरीअकाउंट पर आपको चेकबुक, पासबुक और ई-स्टेटमेंट जैसी कई सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त मिलती हैं। इससे आपको अलग से पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती और आप अपने लेन-देन का पूरा हिसाब भी आसानी से रख सकते हैं।
3. डिजिटल बैंकिंग की सहूलियत: आज केजमाने में बैंक शाखा के चक्कर काटना कौन पसंद करता है? सैलरी अकाउंट के साथ आपको एक डेबिट कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग (नेटबैंकिंग व मोबाइल ऐप) की सुविधा मिलती है। इससे आप घर बैठे पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं, बिल भर सकते हैं और खरीदारी कर सकते हैं।
4. लोन और क्रेडिट कार्ड पर मिलती है प्राथमिकता: बैंक जानते हैं कि सैलरी अकाउंट वालों के पास आय का एक नियमित स्रोत है। इसलिए अगर आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई करते हैं, तो आपको दूसरे ग्राहकों के मुकाबले तेजी से मंजूरी और कम ब्याज दर जैसे फायदे मिल सकते हैं। यह एक बड़ा फायदा है।
5. निवेश और बिल भुगतान की सुविधा एक साथ: कई बैंक सैलरीअकाउंट के साथ डीमैट अकाउंट (शेयर बाजार में निवेश के लिए) और ऑटोमैटिक बिल भुगतान की सुविधा भी देते हैं। इससे आप अपनी पूरी वित्तीय दुनिया को एक ही जगह से मैनेज कर सकते हैं।
सैलरी अकाउंट बनाम सेविंग अकाउंट: क्या है फर्क?
हालांकि, सैलरी अकाउंट भी एक तरह का सेविंग अकाउंट ही है, लेकिन दोनों में कुछ अहम अंतर हैं। जैसे…
कौन खोल सकता है?
सैलरी अकाउंट सिर्फ आपका नियोक्ता खुलवा सकता है, जबकि कोई भी पात्र व्यक्ति सेविंग अकाउंट खोल सकता है।
न्यूनतम बैलेंस: सैलरी अकाउंट में कोई न्यूनतम बैलेंस नहीं रखना होता, जबकि सेविंग अकाउंट में आमतौर पर एक निश्चित राशि रखनी होती है, नहीं तो जुर्माना लगता है।
मकसद: सैलरी अकाउंट का मुख्य मकसद तनख्वाह को आसानी से क्रेडिट करना है, वहीं सेविंग अकाउंट का मकसद लोगों को बचत करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
ब्याज दर: दोनों तरह के खातों पर मिलने वाला ब्याज लगभग एक जैसा (3 से 6 फीसदी के बीच) होता है।
क्या आपका अकाउंट बदल सकता है?
हां, अगर आपकी तनख्वाह लगातार तीन महीने तक आपके सैलरी अकाउंट में नहीं आती है (मान लीजिए आपने नौकरी बदल ली), तो बैंक उसे आम सेविंग अकाउंट में बदल सकता है। ऐसे में आपको सैलरी अकाउंट वाली सारी सुविधाएं मिलनी बंद हो सकती हैं। यानी आपका सैलरी अकाउंट 'आम' हो जाएगा। एक सेविंग अकाउंट की तरह।
वहीं, अगर आप किसी नई कंपनी में जाते हैं और आपका उसी बैंक में पहले से सेविंग अकाउंट है, जिससे कंपनी का करार है, तो आप बैंक से अपने अकाउंट को सैलरी अकाउंट में बदलने का अनुरोध कर सकते हैं।
और क्या-क्या कर सकते हैं इस अकाउंट में?
तनख्वाह जमा होने के अलावा, आप इस अकाउंट में दूसरे काम भी कर सकते हैं आप इसमें नकदी या चेक भी जमा कर सकते हैं। (हां, अगर बड़ी रकम जमा कर रहे हैं तो स्रोत बताना जरूरी हो सकता है)। आप इस खाते से दूसरे खातों में पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं।आप एटीएम या ब्रांच से पैसे निकाल सकते हैं।
अगर आपके पास अभी सैलरी अकाउंट नहीं है, तो अपनी कंपनी से पूछ सकते हैं कि क्या उनका किसी बैंक के साथ करार है। एचडीएफसी बैंक जैसे कई बैंक इंस्टा अकाउंट जैसी सुविधा भी देते हैं, जिससे आप कुछ ही क्लिक में आसानी से खाता खोल सकते हैं और डिजिटल बैंकिंग की सारी सुविधाओं का लुत्फ उठा सकते हैं।
नोट: HDFC Blog से लिया गया यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए हमेशा अपने बैंक से संपर्क करना सबसे अच्छा रहता है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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