5 मिनट में ₹50 हजार का लोन, लेकिन बड़ा जाल! तुरंत पैसे मिलने के चक्कर में फंस रहे लाखों लोग

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मुख्य बातें

  • सिर्फ पैन कार्ड और आधार देकर कुछ ही मिनटों में 50 हजार रुपये तक का लोन मिल रहा है
  • लेकिन यही आसान दिखने वाला कर्ज हजारों लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है
  • ऊंची ब्याज दर, भारी पेनल्टी और रिकवरी एजेंटों की लगातार कॉल ने कई ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं
quick loan is big trap

सिर्फ पैन कार्ड और आधार देकर कुछ ही मिनटों में 50 हजार रुपये तक का लोन मिल रहा है। लेकिन यही आसान दिखने वाला कर्ज हजारों लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। ऊंची ब्याज दर, भारी पेनल्टी और रिकवरी एजेंटों की लगातार कॉल ने कई ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आखिर क्यों 50 हजार रुपये का छोटा लोन लोगों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है? जानिए पूरी कहानी।

देश में 50 हजार रुपये से कम के छोटे पर्सनल लोन बाजार पर मोबाइल ऐप और फिनटेक कंपनियों का कब्जा होता जा रहा है। बिना किसी गारंटी के केवल पैन और आईडी प्रूफ के जरिए तुरंत कर्ज बांटने वाली इन कंपनियों की हिस्सेदारी में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने जोखिम को देखते हुए ऐसे बिना गारंटी वाले छोटे लोन से दूरी बना ली है। फिनटेक कंपनियां मोबाइल ऐप और वेबसाइट के जरिए कुछ ही मिनटों में लोन मंजूर कर देती हैं, इसलिए लोगों का रुझान तेजी से इनकी ओर बढ़ा है। ऐसे कर्ज में जोखिम भी अधिक होता है क्योंकि इसके बदले कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखी जाती।

रिकवरी एजेंट करते हैं परेशान

राजकुमार मैती नाम के एक ग्राहक ने सोशल मीडिया पर आरबीआई को टैग करते हुए शिकायत की कि रिकवरी एजेंट तय समय से पहले उन्हें और उनके परिवार के लोगों को फोन कर अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आरबीआई के नियमों का उल्लंघन है। समीर नाम के एक अन्य ग्राहक ने कहा कि वसूली एजेंट बिना अधिकृत लेटर के उनके घर पहुंचे और उनके बेटे को लोन की जानकारी दे दी, जबकि नियमों के अनुसार उधारकर्ता की जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति के साथ शेयर नहीं की जा सकती। उन्हें हर दिन 50-60 फोन कॉल की जा रही हैं।

महंगा पड़ रहा झटपट मिलने वाला लोन

फिनटेक कुछ ही मिनटों में युवाओं को बिना गारंटी 50 हजार रुपये तक का लोन दे देती हैं लेकिन इसके बदले वे 14 से 18 फीसदी तक मोटा ब्याज वसूलती हैं। ग्राहक समय पर किस्त नहीं चुकाता तो उस पर पेनल्टी लग जाती है और ब्याज 18 से 24 फीसदी या उससे भी अधिक हो सकता है। किस्त नहीं भर पाने युवाओं के माता-पिता को नोटिस जारी किया जाता है।

कर्ज वसूली का तरीका बन रहा चिंता की वजह

फिनटेक से कर्ज लेने वाले आधे लोगों की उम्र 35 साल से कम है। वॉयस ऑफ बैंकिंग के फाउंडर अश्वनी राणा का कहना है कि फिनटेक कंपनियां तेजी से ऐसे लोन बांट रही हैं। आरबीआई के निर्देशों के बावजूद समय पर किस्त नहीं देने पर कुछ कंपनियां ग्राहकों को लगातार परेशान करती हैं और जानबूझकर उनका सिबिल स्कोर खराब कर देती हैं।

तमाम बड़े बैंक छोटे लोन नहीं दे रहे?

पिछले एक साल में 50 हजार रुपये तक के छोटे लोन में बैंकों की हिस्सेदारी 30.8 फीसदी घट गई। इससे पहले भी मार्च 2025 में उनकी हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी घटी थी। एनबीएफसी ने अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। मार्च 2026 तक उनकी हिस्सेदारी 17.5 फीसदी बढ़ी है। सबसे बड़ा फायदा फिनटेक को हुआ है, जिन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म से तेजी से ग्राहकों तक पहुंच बनाई है।

50 हजार रुपये तक के लोन पर फिनटेक कंपनियां हुईं हावी

आरबीआई की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2026 तक 50,000 रुपये से कम के छोटे लोन बाजार में फिनटेक कंपनियों की हिस्सेदारी बढ़कर 56.8 फीसदी हो गई है। वहीं, एक साल में इनके लोन बांटने में 41.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि पूरे छोटे लोन बाजार की बढ़ोतरी 20.1 फीसदी रही। यानी छोटे लोन के बाजार में सबसे तेज विस्तार फिनटेक कंपनियों का हुआ है।

क्या होती है फिनटेक कंपनी?

फिनटेक ऐसी कंपनी होती है, जो मोबाइल ऐप, वेबसाइट और डिजिटल तकनीक के जरिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं देती है। इनमें पर्सनल लोन, पेमेंट, निवेश, बीमा और क्रेडिट जैसी सेवाएं शामिल हैं। इन कंपनियों में लोन की मंजूरी जल्दी मिल जाती है और दस्तावेज भी कम लगते हैं, लेकिन ब्याज दर और अन्य शुल्क बैंक से अधिक हो सकते हैं।

कर्ज डूबने के मामले भी तेजी से बढ़े

आरबीआई के मुताबिक चिंता की बात यह है कि फिनटेक कंपनियों के कर्ज डूबने के मामले भी तेजी बढ़े हैं। इस आसान कर्ज के जाल में फंसकर कर्ज नहीं चुका पाने वाले लोगों यानी डिफॉल्टर्स की संख्या भी तेजी से बढ़कर 6.4% पर पहुंच गई है, जबकि मार्च 2025 में यह दर 6.2 और मार्च 2024 में 4.5 प्रतिशत थी। फिनटेक कंपनियों के कुल लोन पोर्टफोलियो में 70.5 फीसदी हिस्सेदारी बिना किसी गारंटी वाले लोन की है। ऐसे में इनके डूबने की आशंका भी ज्यादा है। आरबीआई का कहना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में फिनटेक कंपनियों के खराब कर्ज (NPA) का जोखिम और बढ़ सकता है।

फिनटेक के खिलाफ शिकायतों की भरमार

आरबीआई ने रिकवरी एजेंटों के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इसके बावजूद फिनटेक कंपनियों के खिलाफ ग्राहकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। बैंकिंग लोकपाल और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग अपनी परेशानी शेयर कर रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक के नियम क्या कहते हैं?

रिकवरी एजेंट धमकी या अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते।

ग्राहक की कर्ज संबंधी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति के साथ साझा नहीं की जा सकती।

वसूली के दौरान ग्राहक की निजता का सम्मान करना जरूरी है।

बार-बार फोन करके या मानसिक दबाव बनाकर वसूली नहीं की जा सकती।

शिकायत होने पर ग्राहक पहले संबंधित कंपनी से और समाधान न मिलने पर आरबीआई के एकीकृत लोकपाल के पास शिकायत कर सकता है।

लोन लेने से पहले इन बातों को जरूर करें चेक

कर्ज पर ब्याज की दर कितनी है, यह पहले समझें।

प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी और अन्य शुल्क भी देखें।

किस्त समय पर नहीं भरने पर कितनी पेनल्टी लगेगी, यह पढ़ें।

कंपनी आरबीआई के साथ पंजीकृत है या नहीं, इसकी जांच करें।

ऐप को कौन-कौन सी मोबाइल अनुमति (कॉन्टैक्ट, फोटो, लोकेशन आदि) देनी होगी, यह भी देखें।

जरूरत से ज्यादा कर्ज लेने से बचें और शर्तें पढ़े बिना ‘ओके’ या ‘एग्री’ पर क्लिक न करें।

Arun Chattha

लेखक के बारे में

Arun Chattha

प्रिंट मीडिया में लगभग 18 वर्षों का अनुभव। राष्ट्रीय स्तर पर नीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं सरकारी मंत्रालयों से जुड़ी रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव। केंद्र सरकार से जुड़े मंत्रालयों की कवरेज के साथ-साथ श्रम, रोजगार, नागरिक उड्डयन और संचार से जुड़े विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग। पत्रकारिता में तथ्यों की गहराई, विश्लेषण और जमीनी समझ को प्राथमिकता।

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