रुपया डॉलर के मुकाबले 1.3% उछला, आरबीआई के उपायों ने दिखाया असर
Dollar Vs INR: आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में तेजी देखने को मिल रही है। रुपया 1.3 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.59 पर आ गया है। इस तेजी के पीछे आरबीआई का एक स्टेप है। बता दें भारत में रुपये की लगातार गिरावट को देखते हुए RBI ने बड़ा कदम उठाया है।

आज डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में तेजी देखने को मिल रही है। रुपया 1.3 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.59 पर आ गया है। इस तेजी के पीछे आरबीआई का एक स्टेप है। बता दें भारत में रुपये की लगातार गिरावट को देखते हुए RBI ने बड़ा कदम उठाया है। अब बैंकों के लिए यह सीमा तय कर दी गई है कि वे दिन के अंत तक घरेलू करेंसी बाजार में 100 मिलियन डॉलर से ज्यादा की ओपन पोजिशन नहीं रख सकते। यह नियम 10 अप्रैल से लागू होगा और इसका मकसद रुपये के खिलाफ बड़े सट्टेबाजी दांव को रोकना है।
एशिया की सबसे कमजोर करेंसी
आज की तेजी को छोड़ दें तो पिछले एक महीने में ईरान में चल रहे युद्ध का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है। इस दौरान रुपया 4% से ज्यादा गिरकर लगभग 94.82 के स्तर तक पहुंच गया, जो इसे एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बना रहा है। युद्ध की अनिश्चितता के चलते विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो गई है।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
मार्च महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 11 अरब डॉलर से ज्यादा की निकासी की है। वहीं, बॉन्ड मार्केट में भी रिकॉर्ड आउटफ्लो देखने को मिला। इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना और RBI को हस्तक्षेप करना पड़ा।
RBI की रणनीति में बदलाव
अब तक RBI डॉलर बेचकर और फॉरवर्ड मार्केट में दखल देकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन इस रणनीति से विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ा, जो मार्च के पहले तीन हफ्तों में ही 30 अरब डॉलर तक घट गया। अब RBI सीधे बैंकों की पोजिशन सीमित कर बाजार को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
ऑफशोर बाजार बना सबसे बड़ी चुनौती
रुपये की असली चाल अब भारत से बाहर तय हो रही है। सिंगापुर, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे ग्लोबल फाइनेंशियल हब में डेरिवेटिव्स के जरिए रुपये पर बड़े दांव लगाए जाते हैं। इससे आरबीआई के पारंपरिक कदम कम असरदार हो जाते हैं।
समस्या की जड़ क्या है?
एएनआई के विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्ती से रुपये को लंबे समय तक मजबूत नहीं किया जा सकता। तेल की बढ़ती कीमतें, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पूंजी का बाहर जाना, ये सभी कारण रुपये की कमजोरी के पीछे हैं। जब तक इन मूल कारणों को नहीं सुधारा जाएगा, तब तक स्थायी समाधान मुश्किल है।
आगे क्या होगा?
RBI के इस कदम से फिलहाल रुपये को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में रुपये की चाल पूरी तरह वैश्विक हालात, खासकर तेल कीमतों और युद्ध की स्थिति पर निर्भर करेगी। अनुमान है कि रुपया 93.5 से 96 के दायरे में रह सकता है, लेकिन तेल और बढ़ा तो गिरावट और तेज हो सकती है।
राहत अस्थायी, चुनौती बड़ी
सरकार और RBI के लिए यह एक संतुलन बनाने वाली स्थिति है। एक तरफ उन्हें रुपये को स्थिर रखना है, वहीं दूसरी ओर उसे वैश्विक स्तर पर मजबूत और उपयोगी भी बनाना है। फिलहाल उठाए गए कदम से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


