रुपया पहली बार ₹93 प्रति डॉलर के पार, आप पर क्या पड़ेगा असर, जानें गिरावट की वजह

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

मुख्य बातें

  • रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है
  • आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है
रुपया पहली बार 93 प्रति डॉलर के पार, आप पर क्या पड़ेगा असर, जानें गिरावट की वजह

भारतीय रुपया शुक्रवार, 20 मार्च को पहली बार 93 प्रति अमेरिकी डॉलर के स्तर को पार गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 3 पैसे गिरकर 92.92 पर खुला और बाद में 93.08 तक फिसल गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले 18 मार्च को रुपया 92.63 के स्तर तक गिरा था, जिसे अब पार कर लिया गया है।

क्यों टूट रहा है रुपया?

1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड करीब $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया। हालांकि शुक्रवार को यह घटकर $107 के आसपास आ गया, लेकिन अभी भी ऊंचे स्तर पर है। तेल महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है।

2. डॉलर की बढ़ती मांग: ऊंचे इंपोर्ट बिल के कारण कंपनियां ज्यादा डॉलर खरीद रही हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से $8 अरब से ज्यादा निकाल लिए हैं। यह जनवरी 2025 के बाद सबसे बड़ा आउटफ्लो है।

4. मजबूत होता अमेरिकी डॉलर: वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर डॉलर की ओर जा रहे हैं, जिससे डॉलर मजबूत हो रहा है और अन्य मुद्राएं कमजोर।

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट: आपकी जेब पर कैसे पड़ता है असर?

डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट सिर्फ सरकार की नहीं, बल्कि आम लोगों की मुश्किलें भी बढ़ा देती है। जब रुपया कमजोर होता है, तो इसका सीधा असर महंगाई और आपके महीने के बजट पर पड़ता है। आइए समझते हैं कि रुपये में गिरावट क्यों होती है और इसका असर आप पर कैसे पड़ता है।

महंगाई बढ़ती है

भारत अपनी जरूरत का 75% से 80% कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा हो जाता है। अनुमान के मुताबिक, डॉलर के मुकाबले रुपये में 1 रुपये की गिरावट से तेल कंपनियों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। इस वजह से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ जाते हैं, जिससे महंगाई बढ़ती है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 10% बढ़ोतरी से महंगाई लगभग 0.8% तक बढ़ सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट खर्च पर साफ दिखता है।

दवाएं और पढ़ाई महंगी

कई जरूरी दवाएं भारत में विदेशों से आती हैं। रुपये के कमजोर होने से इन दवाओं की कीमत बढ़ जाती है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई महंगी हो जाती है। विदेश यात्रा का खर्च बढ़ जाता है। होटल और खाने-पीने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है।

विकास योजनाओं पर असर

सरकार तेल कंपनियों को सब्सिडी देती है ताकि जनता को राहत मिल सके, लेकिन जब डॉलर महंगा होता है, तो सरकार का खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को विकास योजनाओं (जैसे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा) पर खर्च कम करना पड़ सकता है। इसका असर आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।

सरकारी खजाने पर दबाव

देश में आने और जाने वाली विदेशी मुद्रा के अंतर को चालू खाता घाटा (CAD) कहते हैं। जब आयात ज्यादा होता है, तो देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाता है और CAD बढ़ जाता है। भारत में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा तेल और सोने के आयात पर खर्च होती है।

गिरावट थामने के लिए RBI क्या कर रहा है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में अब तक 15 अरब डॉलर से ज्यादा बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश की है। वित्तीय वर्ष के अंत (मार्च) में RBI का हस्तक्षेप आमतौर पर बढ़ जाता है, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

रुपये का ट्रेंड (मार्च एंड डेटा)

मार्च एंड लेवल

2017 में 64.85

2018 में 65.11

2019 में 69.18

2020 में 75.33

2021 में 73.13

2022 में 75.90

2023 में 82.15

2024 में 83.35

2025 में 85.45

(नोट: भारतीय रुपया प्रति डॉलर)

ट्रेंड : रुपया लगातार कमजोर होता गया है, खासकर मार्च तिमाही में दबाव ज्यादा रहता है।

एशियाई करेंसी पर असर (USD के मुकाबले गिरावट)

भारतीय रुपया: -1.79%

दक्षिण कोरियाई वॉन: -3.69%

फिलीपीन पेसो: -4.05%

थाई बहत: -5.20%

यानी गिरावट सिर्फ भारत में नहीं, पूरे एशिया में दिख रही है।

आगे क्या?

विश्लेषकों के अनुसार जब तक तेल कीमतें ऊंची रहेंगी, रुपये पर दबाव बना रहेगा, विदेशी निवेश का आउटफ्लो जारी रह सकता है। RBI का हस्तक्षेप ही फिलहाल बड़ा सपोर्ट है। शॉर्ट टर्म में रुपया कमजोर रह सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

बिजनेस न्यूज, आज के पेट्रोल और डीजल के दाम, शेयर बाजार की ताज़ा खबरें, आईटीआर न्यूज से जुड़ी जरूरी जानकारी पढ़ने के लिए Live Hindustan App अभी डाउनलोड करें।