GDP पर बवाल: सरकार ने बताया 7.8% ग्रोथ के पीछे का 'सच'
मुख्य बातें
- GDP: सरकार ने साफ किया है कि उसने Q1 2025-26 की मौजूदा कीमतों पर GDP को 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया है, ताकि इस साल की GDP बेहतर दिख सके

जीडीपी के पहली तिमाही के आंकड़े सामने आने के बाद से ही बवाल मचा हुआ है। विपक्ष कह रहा है कि भट्ठा बैठ गया है, जबकि सरकार कह रही कि सब अच्छा है। दरअसल पहली तिमाही कंडीशन विपरीत थे। ईरान-अमेरिका का युद्ध चरम पर था। कच्चे तेल में आग लगी हुई थी और पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ। सोने को टैक्स लगाकर महंगा किया गया। खुद रिजर्व बैंक ने आकलन किया था कि ग्रोथ कम हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है। महंगाई तो बढ़ी लेकिन ग्रोथ कम नहीं हुई। यह राहत की बात है।
यही राहत की बात विपक्ष को खटक रही है। विपक्ष के सवालों के बाद अब सरकार ने साफ किया है कि उसने Q1 2025-26 की मौजूदा कीमतों पर GDP को 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया है, ताकि इस साल की GDP बेहतर दिख सके। मंगलवार को सरकार ने बताया कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.8% रही।
यह सफाई उस वक्त आई है, जब आलोचकों और विपक्ष ने कहा कि सरकार ने Q1 FY26 की GDP (मौजूदा कीमतों पर) को पुराने 2011-12 आधार वर्ष सीरीज के तहत 86.05 लाख करोड़ रुपये से घटाकर नई 2022-23 सीरीज के तहत 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया, ताकि ऊंची ग्रोथ दिखाई जा सके।
तो क्या जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 2.6% होती?
एक पूर्व वित्त सचिव ने कहा, "अगर पिछले साल की GDP में संशोधन नहीं किया होता, तो मौजूदा कीमतों पर ग्रोथ सिर्फ 2.6% होती।" विपक्ष ने इस बयान को उठाया और कहा कि सरकार ने मौजूदा ग्रोथ को बेहतर दिखाने के लिए नई सीरीज का इस्तेमाल किया।
'बदलाव कोई जानबूझकर कमी नहीं की गई'
मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक एंड प्रोग्राम इंप्लमेंटेशन ने एक बयान में कहा कि 2025-26 की पहली तिमाही के अनुमान में बदलाव कोई जानबूझकर कमी नहीं है, ताकि इस साल की ग्रोथ ऊंची दिखे। बल्कि, यह बदलाव GDP सीरीज में लगातार किए गए तरीकों और आंकड़ों में सुधार का नतीजा है।
सरकार ने Q1 GDP आंकड़े कैसे निकाले...
बयान में कहा गया कि सरकार ने पहली तिमाही का GDP अनुमान 86.05 लाख करोड़ रुपये जारी किया था। यह अनुमान उस वक्त के 2011-12 आधार वर्ष सीरीज पर आधारित था, लेकिन इस साल फरवरी में, मंत्रालय ने 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई GDP सीरीज पेश की।
इसके तहत, 'पूरी समय अवधि के GDP अनुमानों को नए डेटा स्रोतों, बेहतर तरीकों, संशोधित कवरेज और दूसरी जरूरी जानकारी को शामिल करके पूरी तरह से संशोधित किया जाता है'।
मंत्रालय ने कहा कि GDP गणना में नए संकेतक और आंकड़े जोड़े गए। इन्हें शामिल करने से 2022-23 के बाद के GDP अनुमानों को अपडेट करना जरूरी हो गया। इस वजह से, Q1 2025-26 की GDP (मौजूदा कीमतों पर) संशोधित होकर 80.00 लाख करोड़ रुपये हो गई।
GDP सीरीज में आधार वर्ष बदला
मोदी सरकार ने कहा कि 86.05 लाख करोड़ रुपये से 80.00 लाख करोड़ रुपये तक का यह बदलाव GDP सीरीज में आधार वर्ष बदलने, बेहतर डेटा सोर्स और तरीकों को शामिल करने तथा उपलब्ध संकेतकों को अपडेट करने की वजह से हुआ है। यह कोई जानबूझकर पिछले साल की GDP को कम दिखाने की कोशिश नहीं थी, ताकि इस साल की ग्रोथ दर मैकेनिकली बढ़ जाए।
सरकार ने कहा कि चूंकि आधार वर्ष बदल गया है, इसलिए 2011-12 सीरीज पर आधारित 86.05 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े की तुलना संशोधित 2022-23 सीरीज के तहत मौजूदा Q1 2026-27 के अनुमान से करना गलत होगा। इसलिए नई सीरीज के तहत सही तुलना यह होगी कि 80 लाख करोड़ रुपये की तुलना 88.27 लाख करोड़ रुपये से की जाए, जो कि 2026-27 की पहली तिमाही का आंकड़ा है ।


