रिटायरमेंट के बाद हर महीने कैसे होगी ₹1 लाख की इनकम? यहां समझिए पूरा गणित, बगैर किसी टेंशन कटेगा बुढ़ापा
मुख्य बातें
- अगर किसी व्यक्ति के पास रिटायरमेंट के समय ₹1.5 करोड़ का फंड हो और उसे 6% सालाना रिटर्न मिले, तो वह लगभग 22 साल तक हर महीने ₹1 लाख निकाल सकता है
- हालांकि, एक्सपर्ट्स 3% से 5% की सुरक्षित निकासी दर अपनाने की सलाह देते हैं, ताकि रिटायरमेंट फंड लंबे समय तक चलता रहे
- आइए इसकी गणित समझते हैं

रिटायरमेंट के बाद हर महीने एक मोटी और बंधी-बंधाई रकम मिलना हर किसी का सपना होता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि हम हर महीने कितना पैसा निकालें (Withdrawal Rate) ताकि हमारा जमा किया गया फंड बुढ़ापे में बीच रास्ते में ही खत्म न हो जाए। मान लीजिए, अगर आज आपके पास ₹1.5 करोड़ का रिटायरमेंट फंड है, तो क्या आप अगले 20 सालों तक बिना किसी टेंशन के हर महीने ₹1 लाख निकाल सकते हैं और 20 साल बाद आपके पास कितना पैसा बचेगा? आइए फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स और कैलकुलेटर के गणित से इसे बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।
क्या कहता है SBI सिक्योरिटीज कैलकुलेटर का गणित?
चूंकि यह पैसा आपके बुढ़ापे की लाठी है, इसलिए हम इसे सुरक्षित म्यूचुअल फंड्स (जैसे डेट या हाइब्रिड फंड्स) में निवेश करेंगे, जहां हम सालाना 6% रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं।
केस 1 (6% रिटर्न पर):- अगर आपका ₹1.5 करोड़ का फंड सालाना 6% की दर से बढ़ता है और आप हर महीने ₹1 लाख निकालते हैं, तो यह पैसा पूरे 22 साल तक चलेगा। हालांकि, इसके बाद आपका पूरा फंड लगभग खाली (निल) हो जाएगा।
केस 2 (7% रिटर्न पर):- अगर आपको थोड़ा बेहतर यानी 7% का रिटर्न मिल जाता है, तो इसी ₹1.5 करोड़ के फंड से आप अगले 22 सालों तक हर महीने ₹1.10 लाख निकाल सकते हैं। (22 साल बाद आपके पास करीब ₹5.44 लाख बचेंगे)।
केस 3 (8% रिटर्न पर):- अगर रिटर्न 8% रहता है, तो आप अगले 22 सालों तक हर महीने ₹1.20 लाख की मोटी रकम निकाल सकते हैं। (इसके बाद आपके पास करीब ₹90,000 बचेंगे)।
एक्सपर्ट्स क्यों दे रहे हैं चेतावनी
ऊपर का गणित देखने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वित्तीय सलाहकार (Financial Experts) इसमें एक बड़ा जोखिम देखते हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि डेट फंड्स (सुरक्षित फंड्स) में भी रिटर्न कभी फिक्स या गारंटीड नहीं होता। ऐसा भी समय आ सकता है जब बाजार खराब हो और आपको 6% का रिटर्न भी न मिले। बढ़ती महंगाई (Inflation) के इस दौर में अगर आप शुरुआत में ही ज्यादा पैसा निकालने लगेंगे, तो आपका फंड बहुत जल्दी खत्म हो सकता है।
इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति के पास ₹1.5 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस है और उसे हर साल औसतन 6% रिटर्न मिलता है, तो वह लगभग 22 साल तक हर महीने ₹1 लाख निकाल सकता है। हालांकि, इस दौरान उसका लगभग पूरा फंड खत्म हो जाएगा और अंत में बहुत कम रकम बचेगी, यानी शुरुआत में यह प्लान आकर्षक लग सकता है, लेकिन लंबे समय के लिए इसमें जोखिम भी मौजूद है।
| रिटायरमेंट फंड | ₹1.5 करोड़ |
| हर महीने निकासी | ₹1 लाख प्रति माह |
| अनुमानित रिटर्न | 6% |
| निकासी की अवधि | 22 साल |
| 22 साल बाद बची राशि | ₹10.71 लाख |
अगर रिटर्न थोड़ा ज्यादा यानी 7% या 8% मिल जाए, तो वही कॉर्पस हर महीने ₹1.10 लाख से ₹1.20 लाख तक की इनकम दे सकता है। लेकिन, यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 20-22 साल तक लगातार इतना रिटर्न मिलना संभव है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि खासकर डेट फंड्स में रिटर्न कभी भी फिक्स नहीं होता। कई बार बाजार की स्थिति कमजोर होने पर रिटर्न 6% से भी नीचे आ सकता है। ऐसे में ज्यादा निकासी करने से रिटायरमेंट फंड जल्दी खत्म होने का खतरा बढ़ जाता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट के दौरान सुरक्षित निकासी दर 3% से 5% के बीच होनी चाहिए, यानी अगर आपके पास ₹1.5 करोड़ हैं, तो हर महीने ₹75,000 या उससे कम निकालना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इससे आपका फंड लंबे समय तक टिक सकता है और बढ़ती महंगाई का सामना करने में भी मदद मिलती है।
| रिटायरमेंट फंड (Retirement corpus) | ₹ 1.5 करोड़ | ₹ 1.5 करोड़ |
|---|---|---|
| मासिक निकासी (Monthly withdrawal) | ₹ 1.10 लाख | ₹ 1.20 लाख |
| अनुमानित रिटर्न (Return) | 7% | 8% |
| निकासी की अवधि (Years of withdrawal) | 22 वर्ष | 22 वर्ष |
| निकासी के बाद बची राशि (Amount left after withdrawal) | ₹ 5.44 लाख | ₹ 90 हजार (90K) |
फिर सुरक्षित रास्ता क्या है?
मीरा मनी (MIRA Money) के इन्वेस्टमेंट रिसर्च एनालिस्ट रोहन गोयल के अनुसार, भारतीय रिटायरमेंट धारकों को महंगाई (जो 5-6% की दर से बढ़ रही है) को ध्यान में रखते हुए अपने कुल फंड का केवल 4% से 5% हिस्सा ही सालाना निकालना चाहिए। इससे ज्यादा निकालने पर बुढ़ापे के आखिरी सालों में पैसा खत्म होने का खतरा (Outliving your money) बहुत बढ़ जाता है।
वीएसआरके कैपिटल (VSRK Capital) के डायरेक्टर स्वप्निल अग्रवाल और सेंट्रिसिटी वेल्थटेक के विनायक मगोत्रा तो और भी सुरक्षित चलने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक, सुरक्षित विड्रॉल रेट 3% से 5% के बीच होना चाहिए। उनका कहना है कि बुढ़ापे में आक्रामक रिटर्न (High Returns) के पीछे भागने के बजाय पूंजी को सुरक्षित रखने (Capital Preservation) और नियमित आय पर ध्यान देना चाहिए।
| सालाना निकासी दर | हर महीने निकासी | 20 साल बाद बची रकम |
|---|---|---|
| 3% | ₹38,000 | ₹3.21 करोड़ |
| 4% | ₹50,000 | ₹2.65 करोड़ |
| 5% | ₹63,000 | ₹2.05 करोड़ |
| 6% | ₹75,000 | ₹1.5 करोड़ |
| 7% | ₹87,000 | ₹94.5 लाख |
| 8% | ₹1,00,000 | ₹34.4 लाख |
रिटायरमेंट फंड को कहां निवेश करें?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, पूरे पैसे को कभी भी सीधे शेयर बाजार (Equity) में नहीं डालना चाहिए। इसके बजाय एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाना चाहिए।
लिक्विड फंड (Liquid Fund):- सबसे पहले अपने अगले 3 साल के खर्च के बराबर की रकम पूरी तरह सुरक्षित लिक्विड फंड में रख दें, ताकि आपातकाल में तुरंत पैसा मिल सके।
हाइब्रिड और शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड:- बाकी बचे पैसे को कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड्स, बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स या शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फंड्स में लगाएं। ये फंड्स बाजार के उतार-चढ़ाव को झेल लेते हैं और बिना किसी बड़े जोखिम के नियमित कमाई देते रहते हैं।
₹1.5 करोड़ के फंड से हर महीने ₹1 लाख निकालना बिल्कुल मुमकिन है और यह 22 साल तक चल भी जाएगा। लेकिन, भविष्य की अनिश्चितताओं और महंगाई को देखते हुए समझदारी इसी में है कि शुरुआत में ₹1 लाख के बजाय ₹75,000 जैसी थोड़ी कम राशि से शुरुआत की जाए, ताकि आपका पैसा आपके जीवन के आखिरी पड़ाव तक आपका साथ निभाए।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही
नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।


