₹12 का शेयर ₹10,000 के पार, निवेशकों की छप्परफाड़ कमाई, कंपनी को देनी पड़ी सफाई
कंपनी के शेयर में आई रिकॉर्ड तेजी ने सभी को हैरान कर दिया है। इस शानदार रैली ने एक अपरिचित निवेशक रजेंद्र कमलकांत चोडणकर को अचानक ही भारत के अरबपतियों की सूची में पहुंचा दिया है।
RRP Semiconductor Share: दलाल स्ट्रीट पर अक्सर चौंकाने वाले उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, लेकिन आरआरपी सेमीकंडक्टर लिमिटेड के शेयर में आई रिकॉर्ड तेजी ने सभी को हैरान कर दिया है। इस शानदार रैली ने एक अपरिचित निवेशक रजेंद्र कमलकांत चोडणकर को अचानक ही भारत के अरबपतियों की सूची में पहुंचा दिया है। पिछले 18 महीनों में कंपनी के शेयर में 66,500% की जबरदस्त छलांग लगी है। 31 अक्टूबर को शेयर बीएसई पर ₹10,887.10 के नए शिखर पर पहुंच गया, जिसमें दिनभर में 2% की बढ़त देखी गई। बता दें कि चोडणकर के पास कंपनी की 74.5% हिस्सेदारी (लगभग 1.02 करोड़ शेयर) है। मौजूदा बाजार भाव पर उनकी कुल संपत्ति अब ₹9,000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि चोडणकर कंपनी के प्रमोटर नहीं हैं (उनका नाम केवल रिटेल शेयरधारक श्रेणी में दर्ज है) जिसने बाजार में रहस्य और बढ़ा दिया है।

अफवाहों का तूफान और कंपनी की सफाई
आरआरपी सेमीकंडक्टर लिमिटेड के शेयर में यह तेजी कंपनी के प्रदर्शन या किसी नई तकनीक की वजह से नहीं, बल्कि बाजार में फैल रही अफवाहों और सोशल मीडिया हाइप की वजह से आई है। कई बाजार समूहों में यह चर्चा थी कि क्रिकेट लीजेंड सचिन तेंदुलकर ने कंपनी में निवेश किया है, या महाराष्ट्र सरकार ने कंपनी को 100 एकड़ जमीन आवंटित की है। कंपनी ने दोनों दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि तेंदुलकर का आरआरपी सेमीकंडक्टर लिमिटेड से कोई संबंध नहीं है और किसी भी तरह की भूमि आवंटन की बात गलत है। इसी तरह, सरकारी 'सेमीकंडक्टर मिशन' के तहत ऑर्डर मिलने और ₹6.15 करोड़ के निर्यात की अफवाहें भी झूठी निकलीं। कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके मूलभूत वित्तीय आंकड़े ₹10 से ₹10,000 के शेयर मूल्य को उचित नहीं ठहराते।
केवल 4,000 शेयरों में ट्रेडिंग
कंपनी के अनुसार, लगभग 99% शेयर मार्च 2026 तक लॉक-इन में हैं। यानी बाजार में सिर्फ करीब 4,000 शेयर ही फ्री-फ्लोट में हैं। इतनी सीमित उपलब्धता ने स्टॉक को सट्टेबाजों के लिए खेल का मैदान बना दिया है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि 'अनैतिक' ट्रेडिंग गतिविधियां और अफवाहें इसके शेयर मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ा रही हैं। साथ ही कंपनी ने बताया कि वह कानूनी कार्रवाई कर रही है उन लोगों के खिलाफ जो झूठी खबरें फैलाकर निवेशकों को गुमराह कर रहे हैं।
नवी मुंबई की सादगी से निकला अरबपति
आरआरपी सेमीकंडक्टर लिमिटेड का संचालन नवी मुंबई के एक साधारण औद्योगिक पते से होता है। वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, रजेंद्र चोडणकर को कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव अतिरिक्त निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने FY25 में कंपनी को ₹8 करोड़ का कर्ज दिया था, जिस पर 8% ब्याज तय था। मई 2024 में शेयरधारकों ने एक योजना को मंजूरी दी जिसके तहत कंपनी ने ₹12 प्रति शेयर की दर से चोडणकर को 1 करोड़ से अधिक शेयर जारी किए, जिससे उनकी हिस्सेदारी 74.5% हो गई। इनमें से ₹6 करोड़ कर्ज के रूप में एडजस्ट किए गए, जबकि बाकी राशि नकद में अदा की गई। आज वही ₹12 का शेयर ₹10,000 से ज्यादा पर पहुंच चुका है। यानी भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे चौंकाने वाले कागजी मुनाफों में से एक। बता दें कि कुछ समय पहले तक कंपनी का नाम G D Trading & Agencies था, जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के छोटे व्यापार में लगी थी। बाद में, भारत की सेमीकंडक्टर नीति और “मेक इन इंडिया” मिशन से प्रेरित होकर कंपनी ने खुद को आरआरपी सेमीकंडक्टर के रूप में रीब्रांड किया और इस उभरते क्षेत्र में प्रवेश की घोषणा की। कंपनी की फाइलिंग में भारत की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रॉनिक्स मांग, सरकारी प्रोत्साहन और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं का जिक्र है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया गया है कि सेमीकंडक्टर कारोबार बेहद चुनौतीपूर्ण और अस्थिर है — जहां सप्लाई चेन, वैश्विक तनाव और अनुसंधान लागत जैसे जोखिम लगातार बने रहते हैं।





