काम की बात: RERA: छत टपकने और दीवारों से प्लॉस्टर उखड़ने पर होमबॉयर्स क्या करें? कहां जाएं?

Drigraj Madheshia हिन्दुस्तान टाइम्स
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5 साल की वारंटी आपका संवैधानिक अधिकार है। किसी भी स्ट्रक्चरल डिफेक्ट या रिसाव की स्थिति में 30 दिनों के भीतर मुफ्त मरम्मत का दावा करें। बिल्डर के टालमटोल पर सीधे RERA में शिकायत दर्ज कराएं।

RERA: छत टपकने और दीवारों से प्लॉस्टर उखड़ने पर होमबॉयर्स क्या करें? कहां जाएं?

नोएडा का वह वायरल वीडियो याद है, जहां एक व्यक्ति के वायरल वीडियो ने प्रीमियम घर खरीदने वालों की बढ़ती नाराजगी को दिखाया। 22वीं मंजिल पर करीब 1 करोड़ रुपये के फ्लैट में उखड़ते प्लास्टर और बाहर से दीवारों का बदरंग होना देखा गया। मकान मालिक ने कहा कि इतनी कीमत के हिसाब से बिल्डिंग की हालत बेहद खराब है। साथ ही, पड़ोस के खाली फ्लैट में कबूतरों की बीट से पनपे कीड़ों की समस्या ने हाइजीन पर भी सवाल खड़े कर दिए। इस वीडियो ने एनसीआर में बहस छेड़ दी है कि आसमान छूती कीमतों के बीच बिल्डर गुणवत्ता में कहीं पीछे क्यों हैं।

पुणे की होमबॉयर को दो महीने में ही छत से टपकने लगा पानी

29 वर्षीय मैत्रेयी पटेल (बदला हुआ नाम) ने मई 2023 में पुणे, महाराष्ट्र में 60 लाख रुपये का एक अपार्टमेंट खरीदा। यह फ्लैट रिहायशी बिल्डिंग की टॉप फ्लोर पर था, लेकिन कब्जा लेने के सिर्फ दो महीने के भीतर ही उन्हें एक बेडरूम में पानी रिसने की समस्या का सामना करना पड़ा। जब उन्होंने शिकायत की, तो बिल्डर के प्रतिनिधि ने आश्वासन दिया कि बारिश का मौसम खत्म होने के बाद मरम्मत की जाएगी।

बिल्डर को देनी होगी यह गारंटी

खबरों के मुताबिक, कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) ट्रिब्यूनल ने फैसला दिया कि राज्य के सभी डेवलपर्स के लिए धारा 16 के तहत बीमा के कागजात देना अनिवार्य है। अगर वे ऐसा नहीं करते तो मरम्मत का खर्च खुद उठाना होगा।

स्ट्रक्चरल डिफेक्ट मिलने पर होम बॉयर्स के पास क्या विकल्प हैं?

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 की धारा 14(3) में साफ प्रावधान है, "अगर कब्जा मिलने के 5 साल के अंदर होमबायर्स बिल्डर को स्ट्रक्चरल डिफेक्ट, खराब कारीगरी, सर्विस में कमी या सेल एग्रीमेंट की कोई अन्य कमी बताता है, तो बिल्डर का कर्तव्य है कि वह बिना अतिरिक्त शुल्क लिए 30 दिनों के अंदर उसे ठीक करे। अगर बिल्डर ऐसा नहीं करता, तो खरीदार मुआवजे का हकदार होगा।"

क्या कहलाता है 'स्ट्रक्चरल डिफेक्ट'?

महाराष्ट्र RERA के मुताबिक, "स्ट्रक्चरल डिफेक्ट में बिल्डिंग की नींव, कॉलम, बीम, स्लैब या अन्य मुख्य हिस्सों की समस्या, साथ ही कारीगरी, गुणवत्ता या सर्विस में कमी शामिल है। अगर ये डिफेक्ट 5 साल के भीतर सामने आते हैं, तो बिल्डर 30 दिनों में उन्हें घर खरीदार के बिना किसी खर्च के ठीक करेगा। न करने पर मुआवजा देना होगा।" यह नियम मुंबई जैसे शहरों में बहुत अहम है, जहां री-डेवलपमेंट और ऊंची इमारतें आम हैं। यहां लंबी अवधि के लिए संरचना मजबूत रहना बड़ी चिंता है।

कब्जा लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?

महाराष्ट्र RERA की वेबसाइट पर साफ निर्देश है कि घर का कब्जा लेने से पहले सभी डॉक्यूमेंट्स (मूल और फोटोकॉपी) चेक कर लें। ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जरूर देखें, जो कानूनी रूप से इमारत के पूरा होने की पुष्टि करता है। आर्किटेक्ट का फॉर्म 4 MahaRERA पोर्टल पर अपलोड है या नहीं, यह भी सत्यापित करें।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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