
रिलायंस पावर के शेयर में सोमवार को होगी हलचल? कंपनी ने दी है सफाई
संक्षेप: रिलायंस पावर लिमिटेड ने फर्जी बैंक गारंटी मामले में की गई गिरफ्तारी पर शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने अमरनाथ दत्ता की गिरफ्तारी की है। अब सोमवार को शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी।
अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड ने फर्जी बैंक गारंटी मामले में की गई गिरफ्तारी पर शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने अमरनाथ दत्ता की गिरफ्तारी की है। दत्ता पर आरोप है कि उन्होंने रिलायंस पावर की एक सहायक कंपनी को भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) के टेंडर के लिए योग्य बनाने में मदद करने को ₹68 करोड़ से अधिक की जाली बैंक गारंटी की व्यवस्था करने और जमा करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

अब इसी मामले में रिलायंस की सफाई आई है। शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक दत्ता का रिलायंस पावर या उसकी किसी भी सहायक कंपनी से कोई संबंध नहीं है और इस घटनाक्रम का कंपनी के व्यावसायिक संचालन, वित्तीय प्रदर्शन या हितधारकों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस खबर के बीच निवेशकों की अब सोमवार को रिलायंस पावर के शेयर पर नजर रहेगी। रिलायंस पावर के शेयर अभी 40 रुपये के नीचे हैं। यह शेयर शुक्रवार को 4.48% टूटकर बंद हुआ था।
क्या कहना है जांच एजेंसी का?
जांच एजेंसी के अनुसार, व्यापार वित्त सेवाएं देने का दावा करने वाले कोलकाता के सलाहकार दत्ता ने कंपनी के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी अशोक पाल और ओडिशा स्थित बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पार्थ सारथी बिस्वाल के साथ समन्वय में काम किया, जिन्हें इसी मामले में पहले गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद दत्ता को दिल्ली की एक अदालत में पेश किया गया और चार दिनों की ईडी हिरासत में भेज दिया गया। एजेंसी ने कहा कि वह कई पहलुओं से जांच कर रही है, जिसमें अपराध की आय का पता लगाना, लाभार्थियों की पहचान करना और अन्य संस्थाओं व व्यक्तियों से जुड़ी व्यापक साजिश की जांच करना शामिल है।
अनिल अंबानी से नाम जोड़ने पर आपत्ति
इस बीच, रिलायंस पावर ने दोहराया कि वह और उसकी सहायक कंपनी, रिलायंस एनयू बेस लिमिटेड, अपने कर्मचारियों के साथ जालसाजी और धोखाधड़ी की साजिश का शिकार हैं। कंपनी ने उन मीडिया रिपोर्टों पर भी कड़ी आपत्ति जताई, जिनमें उसके प्रमोटर अनिल अंबानी को इस मामले से जोड़ा गया था। कंपनी ने स्पष्ट किया कि वह साढ़े तीन साल से ज़्यादा समय से रिलायंस पावर के बोर्ड में नहीं हैं और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है।





