RCOM केस: CBI गिरफ्तारी के बाद हुआ बड़ा खुलासा, लेकिन रिलायंस ग्रुप ने झाड़ा पल्ला
RCOM Case: रिलायंस कम्यूनिकेशन (Reliance Communications) से जुड़े बैंक फ्रॉड मामले में CBI की कार्रवाई के बाद रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) ने खुद को कंपनी से अलग बताया है। SBI की शिकायत पर शुरू हुई जांच में हजारों करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप है। ग्रुप का कहना है कि उसका उससे कोई संबंध नहीं है।

RCOM Case: CBI (Central Bureau of Investigation) की हालिया कार्रवाई के बाद कॉर्पोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है। ये मामला RCOM (Reliance Communications) से जुड़ा है, जहां जांच एजेंसी ने कंपनी के दो पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों डी. विश्वनाथ और अनिल कालिया को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई SBI (State Bank of India) की शिकायत के आधार पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
आरोपों के मुताबिक, रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंकों से मिली क्रेडिट सुविधाओं का सही उपयोग नहीं किया और कथित तौर पर शेल कंपनियों के जरिए फंड्स का गलत ट्रांसफर किया गया। SBI की शिकायत में कहा गया है कि इस पूरे मामले में करीब ₹2,929 करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि कुल मिलाकर 17 बैंकों और संस्थानों को लगभग ₹19,694 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा। जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी लेन-देन और डिफॉल्टेड लेटर ऑफ क्रेडिट के जरिए बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रिलायंस ग्रुप (Reliance Group) ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया है। ग्रुप के प्रवक्ता ने साफ कहा है कि अब उनका RCOM से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है, वे उस समय कंपनी में काम कर रहे थे, जब 2019 में RCOM दिवाला प्रक्रिया (Insolvency) से गुजर रही थी।
दरअसल, 2019 से ही कंपनी का नियंत्रण और आरकॉम का कामकाज 'दिवाला पेशेवर' अनीश नानावटी देख रहे हैं, जिन्हें स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाली बैंकों की समिति ने नियुक्त किया था। इसका मतलब यह है कि उस समय से कंपनी के फैसले और संचालन सीधे तौर पर प्रमोटर ग्रुप के हाथ में नहीं थे। साथ ही अनिल अंबानी (Anil Ambani) ने भी 2019 में RCOM के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था और वे केवल नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की भूमिका में थे।
आसान भाषा में समझें तो CBI की कार्रवाई कंपनी के पुराने ऑपरेशन्स और वित्तीय लेन-देन से जुड़ी है, जबकि रिलायंस ग्रुप अब इस कंपनी से खुद को पूरी तरह अलग बता रहा है। यह मामला अभी अदालत में लंबित है और आने वाले समय में जांच के और भी पहलू सामने आ सकते हैं।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही
नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।


