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बैंकों- NBFC में आंतरिक लोकपाल पर RBI सख्त, ग्राहकों के हित में जारी किए नियम

बैंकों- NBFC में आंतरिक लोकपाल पर RBI सख्त, ग्राहकों के हित में जारी किए नियम

संक्षेप:

आरबीआई ने कहा कि प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करना चाहिए। इसमें कहा गया कि आंतरिक लोकपाल का कार्यालय सीधे शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा।

Jan 14, 2026 09:51 pm ISTDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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रिजर्व बैंक ने बुधवार को बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के भीतर ग्राहकों की शिकायतों के समाधान व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बैंकों और एनबीएफसी में आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति और कामकाज के लिए दिशानिर्देश जारी किए। रिजर्व बैंक ने कॉमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी), नॉन-बैंक प्रीपेड भुगतान उपकरण जारीकर्ताओं और क्रेडिट सूचना कंपनियों के लिए अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। आरबीआई ने कहा कि ये निर्देश विनियमित संस्थाओं (बैंक, एनबीएफसी आदि) के भीतर आंतरिक शिकायत समाधान व्यवस्था को मजबूत करने और संस्थाओं के भीतर एक शीर्ष स्तर के प्राधिकरण द्वारा ग्राहकों की शिकायतों का तेजी से समाधान करने के लिए जारी किए गए हैं।

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कौन होगा आंतरिक लोकपाल में?

आंतरिक लोकपाल (आईओ) या तो सेवानिवृत्त या सेवारत अधिकारी होना चाहिए, जिसका पद विनियमित संस्था में महाप्रबंधक के समकक्ष हो। उसके पास बैंकिंग, गैर-बैंकिंग वित्त, विनियमन, पर्यवेक्षण, भुगतान और निपटान प्रणाली, ऋण सूचना या उपभोक्ता संरक्षण जैसे क्षेत्रों में काम करने का कम से कम सात वर्षों का अनुभव होना चाहिए। आरबीआई ने कहा कि प्रत्येक विनियमित संस्था को कम से कम एक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करना चाहिए। इसमें कहा गया कि आंतरिक लोकपाल का कार्यालय सीधे शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा। उसे उन शिकायतों पर कार्रवाई करनी चाहिए, जिनकी विनियमित संस्था पहले ही जांच कर चुकी है।

शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंस दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव

हाल ही में रिजर्व बैंक ने दो दशक से अधिक समय बाद शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव रखा। इसमें 300 करोड़ रुपये की न्यूनतम पूंजी सहित कड़े नियामकीय मानदंड रखने का प्रावधान शामिल है। बता दें कि आरबीआई ने वर्ष 2004 से शहरी सहकारी बैंकों के लिए नए लाइसेंस जारी करना बंद कर दिया था। उस समय यह देखा गया था कि नए लाइसेंस पाने वाले बैंक बड़ी संख्या में अल्पावधि में ही वित्तीय रूप से कमजोर हो गए थे। पिछले साल अक्टूबर में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि बीते 20 वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में आए सकारात्मक बदलावों और हितधारकों की बढ़ती मांग को देखते हुए नए यूसीबी लाइसेंस पर एक चर्चा पत्र जारी किया जाएगा।

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है। और पढ़ें
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