RBI ने टाटा संस पर लिया बड़ा फैसला, अब शेयर बाजार में लिस्टिंग का क्या होगा?

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मुख्य बातें

  • टाटा संस को अपर लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के तौर पर वर्गीकृत किया गया है
  • नए नियमों के तहत 1 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा एसेट वाली NBFCs को अपर लेयर में रखा जाता है
Tata Group
टाटा संस को अपर लेयर वाली कैटेगरी में रखा गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस को 'अपर लेयर' नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर वर्गीकृत किया है। दरअसल, रिजर्व बैंक ने साल 2026-27 के लिए अपर लेयर में आने NBFCs की लिस्ट जारी की है। इसमें एक बार फिर से टाटा संस को अपर लेयर वाली कैटेगरी में रखा गया है।

अपर लेयर में कौन सी कंपनियां?

जून से लागू रिजर्व बैंक के नए नियमों के तहत 1 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा एसेट वाली NBFCs को 'अपर लेयर' में रखा जाता है, जिससे उन पर सख्त रेगुलेटरी निगरानी होती है और उन्हें तीन साल के अंदर लिस्ट होना जरूरी हो जाता है। मार्च 2026 तक 2 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा के स्टैंडअलोन एसेट के साथ, टाटा संस इसी कैटेगरी में आती है। टाटा संस को NBFC कैटेगरी के तहत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर पहचाना गया है। कंपनी को अब पब्लिक होना है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आरबीआई उसका CIC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन स्वीकार करता है या नहीं।

कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी की बात करें तो यह एक ऐसी NBFC होती है जिसका मुख्य काम ग्रुप कंपनियों में निवेश करना होता है। नियमों के मुताबिक, उसकी कम से कम 90% नेट एसेट ऐसी कंपनियों के इक्विटी शेयर, प्रेफरेंस शेयर, बॉन्ड, डिबेंचर, डेट या लोन में लगी होनी चाहिए।

17 कंपनियों की लिस्ट

बता दें कि इस बार केंद्रीय रिजर्व बैंक की लिस्ट में 17 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी हैं जबकि FY25 और FY24 में इनकी संख्या 15 थी। REC लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन को इस लिस्ट में शामिल किया गया है। लिस्ट में शामिल कुछ अन्य नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, LIC हाउसिंग फाइनेंस और टाटा कैपिटल वगैरह शामिल हैं।

PNB हाउसिंग फाइनेंस के साथ क्या हुआ?

PNB हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल की पहचान पिछली प्रक्रियाओं में NBFC-अपर लेयर के तौर पर की गई थी लेकिन मौजूदा प्रक्रिया में वे तय मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं। नियमों के अनुसार, एक बार जब किसी NBFC को NBFC-अपर लेयर के तौर पर वर्गीकृत कर दिया जाता है, तो उस पर कम से कम पांच साल तक कड़े रेगुलेटरी नियम लागू रहते हैं, भले ही वह बाद के वर्षों में मानदंडों को पूरा न करे। यही वजह है कि PNB हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल को अपर लेयर में रखा गया है। हालांकि, ये दोनों कंपनियां FY27 की लिस्ट में शामिल नहीं है।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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