रिफंड से लिमिट तक... डिजिटल वॉलेट को लेकर RBI का तगड़ा प्लान

Deepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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केंद्रीय रिजर्व बैंक, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। इसके जरिए ना सिर्फ वॉलेट में आपकी पैसे की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि समस्या आसानी से सुलझाया जाएगा और रिफंड भी जल्दी मिल सकेगा।

रिफंड से लिमिट तक... डिजिटल वॉलेट को लेकर RBI का तगड़ा प्लान

अगर आप फोनपे, गूगल पे जैसे डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल करते हैं तो ये खबर आपके काम की हो सकती है। दरअसल, केंद्रीय रिजर्व बैंक एक नए नियम बनाने की तैयारी में है। इसके जरिए ना सिर्फ वॉलेट में आपकी पैसे की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि समस्या आसानी से सुलझाया जाएगा और रिफंड भी जल्दी मिल सकेगा। आइए डिटेल में जान लेते हैं।

क्या है मामला?

केंद्रीय रिजर्व बैंक, प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के लिए एक नए फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। PPIs ही डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के पीछे का सिस्टम है। यह एक ऐसा पेमेंट इंस्ट्रूमेंट है जिसमें पैसे पहले से ही लोड कर दिए जाते हैं और फिर बाद के ट्रांजैक्शन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें सामान्य इस्तेमाल वाले PPI के अलावा गिफ्ट PPI, ट्रांजिट PPI और एनआरआई के लिए PPI जैसी कैटेगरी शामिल हैं। इनमें मोबाइल वॉलेट और दूसरे प्रीपेड टूल्स जैसी आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली सुविधाएं भी आती हैं। अब रिजर्व बैंक ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स पर एक ड्राफ्ट 'मास्टर डायरेक्शन' जारी किया है और 22 मई 2026 तक इस पर टिप्पणियां आमंत्रित की गई हैं।

क्या है ड्राफ्ट में?

रिजर्व बैंक के ड्राफ्ट के मुताबिक जिन बैंकों को RBI द्वारा डेबिट कार्ड जारी करने की अनुमति है, वे मुंबई स्थित अपने केंद्रीय कार्यालय में 'पेमेंट और सेटलमेंट सिस्टम विभाग' (DPSS) को सूचित करने के बाद प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स भी जारी कर सकते हैं। इसके अलावा, गैर-बैंकिंग संस्थाएं सिर्फ RBI से मंजूरी के बाद ही प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स जारी कर सकती हैं। इसके लिए न्यूनतम नेटवर्थ ₹5 करोड़ होनी चाहिए। वहीं, मंजूरी के तीसरे वित्तीय वर्ष के अंत तक न्यूनतम ₹15 करोड़ की नेटवर्थ हासिल करनी होगी।

वॉलेट बैलेंस पर लिमिट

ड्राफ्ट में वॉलेट की लिमिट भी तय की गई है ताकि बहुत ज्यादा पैसे एक जगह जमा न रहें। सामान्य वॉलेट में आपका बैलेंस कभी भी 2 लाख रुपये से ज्यादा नहीं हो सकता। आम इस्तेमाल वाले पीपीआई में कैश लोड करने की सीमा हर महीने ₹10,000 तक हो सकती है। ड्राफ्ट के मुताबिक गिफ्ट वॉलेट की अधिकतम राशि 10,000 रुपये और ट्रांजिट वॉलेट (मेट्रो-बस आदि के लिए) की 3,000 रुपये तक रखी गई है। इसके अलावा, विदेशी नागरिकों या NRI को पासपोर्ट और वीजा के फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद एक PPI वॉलेट जारी किया जा सकता है, जिससे उन्हें भारत में रहने के दौरान पर्सन टू मर्चेंट (P2M) को पेमेंट करने में मदद मिलेगी।

ऐसे प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में पैसे कैश के रूप में या किसी अन्य पेमेंट इंस्ट्रूमेंट के जरिए विदेशी मुद्रा मिलने पर ही लोड किए जाएंगे। किसी भी महीने के दौरान ऐसे प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स से डेबिट की गई कुल राशि ₹5 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ट्रांजैक्शन फेल होने पर क्या होता है?

ड्राफ्ट में कहा गया है कि फेल, वापस किए गए, रिजेक्ट किए गए या कैंसिल किए गए ट्रांजैक्शन के मामले में रिफंड तुरंत संबंधित प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में जमा किया जाना चाहिए। ड्राफ्ट के मुताबिक भले ही ऐसे रिफंड के कारण उस खास प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स कैटेगरी के लिए तय सीमाएं पार हो जाएं। मतलब ये कि रिफंड करते वक्त लिमिट की बाध्यता नहीं होगी। हालांकि, किसी अन्य पेमेंट इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल करके किए गए ट्रांजैक्शन का रिफंड प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स में जमा नहीं किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो आपने कोई पेमेंट किया लेकिन वो फेल हो गया, रद्द हो गया या दुकान से सामान वापस करना पड़ा तो वो पैसा तुरंत आपके वॉलेट में वापस आ जाएगा। पहले रिफंड में काफी देरी हो जाती थी और ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता था।

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लेखक के बारे में

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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