RBI ने बैंकिंग से जुड़े किए बड़े ऐलान, 9000 से ज्यादा सर्कुलर किए गए रद्द
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मू ने मीडिया को बताया कि पिछले पांच महीनों में आरबीआई ने नियामकीय ढांचे को मजबूत बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। इस प्रक्रिया में 9,446 सर्कुलरों (मास्टर सर्कुलर और निर्देशों सहित) को रद्द कर दिया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकिंग से जुड़े कई अहम ऐलान किए हैं। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एससी मुर्मू ने मीडिया को बताया कि पिछले पांच महीनों में आरबीआई ने नियामकीय ढांचे को मजबूत बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया है। इस प्रक्रिया में 9,446 सर्कुलरों (मास्टर सर्कुलर और निर्देशों सहित) को रद्द कर दिया गया है। आरबीआई का यह कदम बैंकों, वित्तीय कंपनियों और अन्य विनियमित संस्थाओं पर वर्षों से बढ़ते जा रहे अनुपालन के बोझ को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कॉमर्शियल बैंकों के लिए 32 मास्टर सर्कुलर
कॉमर्शियल बैंकों के लिए 32 मास्टर निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें बैंक लाइसेंसिंग दिशानिर्देश भी शामिल हैं। अब हितधारकों को केवल इन मास्टर निर्देशों का पालन करना होगा। कहने का मतलब है कि अब पुराने सर्कुलरों की जरूरत नहीं होगी। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि बैंक लाइसेंसिंग से जुड़े अलग-अलग इकाइयों के दिशानिर्देशों को एकीकृत किया गया है। भविष्य में कोई बदलाव होने पर इन्हें ही अपडेट किया जाएगा।
नई मास्टर डायरेक्शंस 11 प्रकार की वित्तीय संस्थाओं—जिनमें कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक, आरआरबी, सहकारी बैंक, एनबीएफसी और क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियां शामिल हैं। ये अलग-अलग तैयार की गई हैं ताकि हर संस्था को यह आसानी से समझ में आ सके कि कौन-सा नियम उस पर लागू होता है।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
-पुराने सर्कुलर बहुत अधिक और जटिल हो चुके थे।
-कई निर्देश समय के साथ अप्रासंगिक हो चुके थे।
-विभिन्न प्रकार की संस्थाओं पर कौन से नियम लागू होते हैं, यह स्पष्ट नहीं था।
-अनुपालन बोझ बढ़ रहा था और लागत भी।





