RBI ने बैंकों को दी आजादी… बोर्ड बैठक से रिस्क मैनेजमेंट तक पर नया प्रपोजल

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मुख्य बातें

  • रिजर्व बैंक ने बैंक निदेशक मंडल यानी बोर्ड के सामने रखे जाने वाले मामलों में अंतिम संशोधनों की घोषणा की
  • बदले हुए नियमों के अनुसार, बैंक बोर्ड बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू करने का तरीका खुद तय कर सकता है
RBI ने बैंकों को दी आजादी… बोर्ड बैठक से रिस्क मैनेजमेंट तक पर नया प्रपोजल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के कामकाज को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए बोर्ड गवर्नेंस से जुड़े नए नियम जारी किए हैं। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए डेटा रिस्क मैनेजमेंट पर भी नया मसौदा जारी किया है।

क्या कुछ बदला?

रिजर्व बैंक ने बैंक निदेशक मंडल यानी बोर्ड के सामने रखे जाने वाले मामलों में अंतिम संशोधनों की घोषणा की। इसका मकसद बैंकों में कामकाज को आसान बनाना है। आरबीआई ने कहा कि नियमों का नया सेट सिद्धांतों पर आधारित है। इसका मकसद बैंक निदेशक मंडल (बोर्ड) को यह स्वतंत्रता देना है कि वे हर बैंक की खास प्राथमिकताओं के आधार पर अपना एजेंडा तय कर सकें। हालांकि, आरबीआई ने यह भी साफ किया कि जोखिम, नियमों का पालन, वित्तीय प्रदर्शन और ग्राहकों की सुरक्षा जैसे अहम मामलों पर बोर्ड की निगरानी बनी रहेगी। ये नए नियम इस साल एक अक्टूबर से लागू होंगे।

बैंकों को मिले अधिकार

बदले हुए नियमों के अनुसार, बैंक बोर्ड बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू करने का तरीका खुद तय कर सकता है। केंद्रीय बैंक ने कार्रवाई रिपोर्ट व्यवस्था को जारी रखने के सुझाव को स्वीकार नहीं किया। केंद्रीय बैंक ने संबंधित पक्षों की राय के आधार पर महत्वपूर्ण मामलों को परिभाषित करने की जरूरत को खत्म कर दिया है। यह उम्मीद की जाती है कि बैठक का एजेंडा तय करने के लिए पूरे बोर्ड से सलाह ली जाएगी। हालांकि, यह साफ कर दिया गया है कि इसकी मुख्य जिम्मेदारी चेयरमैन की होगी।

रिस्क मैनेजमेंट पर आरबीआई का प्रस्ताव

भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को प्रस्ताव किया कि उसके नियमन के दायरे में आने वाले बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और दूसरी संस्थाओं को अपनी रिस्क मैनेजमेंट फॉर्मेट के तहत आंकड़ों से जुड़े जोखिम को प्रबंधित करने के लिए कदम उठाने चाहिए। केंद्रीय बैंक ने आंकड़ों के मेंटेनेंस, भूमिकाओं, स्ट्रक्चर, आंकड़ों से जुड़ी जानकारी, गुणवत्ता और आंकड़े साझा करने से संबंधित तीसरे पक्ष की व्यवस्था के बारे में दिशानिर्देश का मसौदा जारी किया है। वित्तीय क्षेत्र में बढ़ते डिजिटलीकरण और प्रौद्योगिकी आधारित व्यापार मॉडल को अपनाने के साथ, आंकड़े बैंक और एनबीएफसी के लिए एक जरूरी एसेट्स बन गए हैं। आरबीआई ने नियमों के मसौदे में कहा कि जैसे-जैसे आंकड़े की मात्रा, विविधता और गति बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह जरूरी है कि आंकड़ें सभी प्रणाली में सही, एक जैसा, सुरक्षित और काम के लायक बना रहे।

केंद्रीय रिजर्व बैंक ने कहा कि आंकड़ों के मेंटेनेंस और इसके रिस्क में कमियों से बैंक और एनबीएफसी के लिए बड़े वित्तीय, परिचालन, अनुपालन और साख को लेकर जोखिम पैदा हो सकते हैं। रिजर्व बैंक ने दिशानिर्देशों मसौदे पर 17 अगस्त तक संबंधित पक्षों से टिप्पणियां मांगी है।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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