एनबीएफसी के लिए RBI का नया फ्रेमवर्क, टाटा संस की लिस्टिंग पर चर्चा के बीच फैसला
रिजर्व बैंक ने एनबीएफसी की पहचान करने के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव किया। ड्राफ्ट के अनुसार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाली एनबीएफसी को अपर लेयर माना जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को उच्च-स्तरीय गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की पहचान करने के मानदंडों में बदलाव का प्रस्ताव किया। इसके तहत पिछली मानक-आधारित प्रणाली के बजाय संपत्ति आधार को अपनाने और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को इसमें शामिल करने का प्रस्ताव किया गया है। ड्राफ्ट के अनुसार एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाली एनबीएफसी को अपर लेयर माना जाएगा। आरबीआई की वेबसाइट पर जारी ड्राफ्ट में कहा गया कि एनबीएफसी- अपर लेयर की पहचान के लिए पारदर्शी, सरल और पूर्ण मानदंड अपनाने के लिए मौजूदा पद्धति को संपत्ति के आकार के मानदंड से बदलने का प्रस्ताव है, जो इस समय एक लाख करोड़ रुपये और उससे अधिक प्रस्तावित है।
टाटा संस की लिस्टिंग की है चर्चा
यह ड्राफ्ट ऐसे समय में आया है जब नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को सूचीबद्ध किए जाने पर काफी चर्चा हो रही है। सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या इस मुख्य निवेश कंपनी को कोई राहत मिलेगी। आरबीआई के नियमों के अनुसार उच्च-स्तरीय शीर्ष 15 संस्थाओं को सूचीबद्ध होना अनिवार्य है।
इस सूची में शामिल होने के बावजूद अक्टूबर 2025 की समय सीमा बीत जाने के बाद भी केवल टाटा संस सूचीबद्ध नहीं हुई है। ड्राफ्ट में सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी को भी उच्च-स्तरीय सूची में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसमें कहा गया है- इस समय साइज आधारित विनियमन ढांचा सरकारी एनबीएफसी को लोअर या मिड लेयर में रखता है न कि अपर लेयर में।
एनबीएफसी के लिए स्वामित्व तटस्थ नियामक व्यवस्था के सिद्धांत के तहत अब पात्र सरकारी एनबीएफसी को भी संशोधित मानदंडों के आधार पर एनबीएफसी-यूएल की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है। मार्च 2025 तक टाटा संस की संपत्ति का आधार 1.75 लाख करोड़ रुपये था। कई सरकारी उपक्रम अब तक अपर लेयर लेवल से बाहर थे।
टाटा संस के सूचीबद्ध होने पर क्या बोले शापूरजी पलोनजी मिस्त्री
इस बीच, शापूरजी पलोनजी (एसपी) समूह के चेयरमैन शापूरजी पलोनजी मिस्त्री ने एक बार फिर टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि यह केवल नियामक नियमों का पालन नहीं है, बल्कि जनहित में एक जरूरी कदम है। मिस्त्री ने इस मामले में सरकार और आरबीआई द्वारा निर्णायक कार्रवाई किए जाने पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण आधारित तर्क पेश नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने से टाटा ट्रस्ट के हितों को नुकसान होगा या लाभार्थियों की सेवा करने की क्षमता कम हो जाएगी।
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