हम बेपरवाह होने का जोखिम नहीं उठा सकते, RBI गवर्नर को है इस बात का डर

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मुख्य बातें

  • आरबीआई गवर्नर ने कहा कि वित्तीय स्थिरता का लक्ष्य झटकों को रोकने पर नहीं बल्कि फाइनेंशियल सिस्टम को इस तरह मजबूत बनाने पर होना चाहिए कि वह इनके असर को झेल सके और उन्हें सीमित रख सके

हम बेपरवाह होने का जोखिम नहीं उठा सकते, RBI गवर्नर को है इस बात का डर
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शनिवार को कहा कि आज फाइनेंशियल सिस्टम की मजबूती भविष्य के खतरों से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानी जा सकती। उन्होंने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए लगातार सतर्क रहने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''पिछले दो दशकों का हमारा अनुभव सबक सिखाता है कि बैंकिंग क्षेत्र पर दबाव तेजी से बन सकता है और इसे सुलझाने में वर्षों लग जाते हैं। साल 2000 के दशक की शुरुआत के ज्यादा कर्ज और एनपीए की विरासत को साफ करने में लगभग एक दशक लग गया। हम बेपरवाह होने का जोखिम नहीं उठा सकते, कमजोरियों को पनपने देने की आर्थिक और वित्तीय कीमत बहुत ज्यादा होती है।''

आज की मजबूती का मतलब कल की सुरक्षा नहीं

आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (एनबीएफसी) के मजबूत बही-खातों के दम पर टिकी फाइनेंशियल सिस्टम की मजबूती का जिक्र करते हुए कहा, ''आज की मजबूती का मतलब कल की सुरक्षा नहीं हो सकता। हम आने वाली कमजोरियों को लेकर सतर्क रहने और अपनी फाइनेंशियल सिस्टम को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।'' उन्होंने कहा कि आंतरिक या बाहरी वित्तीय झटकों को रोका नहीं जा सकता। ऐसे में हमारा मकसद एक ऐसा फाइनेंशियल सिस्टम तैयार करना होना चाहिए जो भारी दबाव के बीच भी सेवाएं देने में सक्षम हो।

आने वाले संकट का बदलेगा तरीका?

मल्होत्रा ने नई तरह के व्यवस्थागत जोखिमों की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा कि अगला वित्तीय संकट जरूरी नहीं कि किसी बैंक या वित्तीय क्षेत्र के भीतर से ही शुरू हो, बल्कि यह किसी वैश्विक घटना, साइबर हमले या तकनीकी विफलता से पैदा हो सकता है और कई रास्तों से फाइनेंशियल सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने नेटवर्क पर निर्भरता और संकट के एक जगह से दूसरी जगह फैलने के रास्तों को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत पर जोर दिया। आरबीआई गवर्नर ने बेहतर और बारीक आंकड़ों के जरिए निगरानी तथा आकलन व्यवस्था में सुधार की वकालत भी की। मल्होत्रा ने कहा कि मजबूती पूरे तंत्र के स्तर पर होनी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि एक मजबूत बैंकिंग प्रणाली जरूरी तो है, लेकिन अकेले यही काफी नहीं है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा, ''हमारे सामने चुनौती एक ऐसी फाइनेंशियल सिस्टम बनाने की है, जो उन झटकों को भी झेल सके जिनका हम अंदाजा लगा सकते हैं और उन झटकों को भी जिनका हम अभी अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं।''

उन्होंने बढ़ते वैश्विक कर्ज, एआई से जुड़ी संपत्तियों के बढ़े हुए मूल्यांकन, अत्यधिक कर्ज, निजी ऋण और साइबर जोखिमों को वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए प्रमुख खतरों के रूप में गिनाया। उन्होंने कहा कि कर्ज में वृद्धि एक बड़ी चिंता है।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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