रिजर्व बैंक ने NBFCs के लिए लागू किया नया नियम, टाटा संस की बढ़ सकती है टेंशन
मुख्य बातें
- भारतीय रिजर्व बैंक ने अपर लेयर में आने वाली NBFCs के लिए नए नियम जारी किए हैं
- इससे टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस को राहत मिलने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है

एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति वाली नॉन-बैंकिग फाइनेंसिंग कंपनी (NBFCs) को अपर लेयर कैटेगरी में रखा जाएगा। इस नए नियम से टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा संस को रेगुलेटरी राहत मिलने की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है। अब टाटा संस को होल्डिंग कंपनी को एक लिस्टेड कंपनी में बदलना ही होगा। इसके लिए पहले आईपीओ लाना पड़ सकता है।
क्यों है आशंका?
दरअसल, टाटा संस की FY25 में स्टैंडअलोन परिसंपत्तियां करीब ₹1.75 लाख करोड़ थीं, जो निर्धारित सीमा से काफी अधिक हैं। हालांकि, फिलहाल रिजर्व बैंक ने न तो टाटा समूह की इस होल्डिंग कंपनी यानी टाटा संस की लिस्टिंग अनिवार्य की है और न ही IPO को लेकर कोई अंतिम फैसला दिया है।
क्या कहा रिजर्व बैंक ने?
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि अपर लेयर में आने वाली NBFCs के लिए व्यापक नियमों की जरूरत है। अपर लेयर में एनबीएफसी की पहचान करने के तरीके और सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी को विभिन्न स्तरों में रखने से जुड़े निर्देशों की समीक्षा के आधार पर मौजूदा नियमों में बदलाव करने की जरूरत है। केंद्रीय बैंक NBFCs को उनके साइज, रिस्क फैक्टर और प्रणाली के लिए उनकी अहमियत के आधार पर नियमन करता है। पैमाना आधारित नियमन के तहत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को एनबीएफसी-बेसिक लेयर, एनबीएफसी-मिड लेयर, एनबीएफसी-हाई लेयर और एनबीएफसी-अपर लेयर में बांटा गया है।
रिजर्व बैंक (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां – पंजीकरण, छूट और पैमाना आधारित नियमन के लिए रूपरेखा) दूसरा संशोधन निर्देश, 2026 के अनुसार, अपर लेयर में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनकी पहचान रिजर्व बैंक हर साल खास तौर पर करता है और जिनके लिए अधिक नियमों की जरूरत होती है।
अपर लेयर में एनबीएफसी की पहचान मानदंडों के बारे में कहा गया, ''उच्च स्तर में वे एनबीएफसी शामिल होंगी जिनका संपत्ति आकार वित्त वर्ष के ताजा वित्तीय विवरण के अनुसार 1,00,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।'' इसमें आगे कहा गया है कि एनबीएफसी-अपर लेयर की पहचान के मानदंड की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए। इसके साथ ही, एनबीएफसी-अपर लेयर की पहचान के लिए संपत्ति आकार की सीमा की समीक्षा हर तीन साल में की जानी चाहिए।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि जो एनबीएफसी किसी कॉमर्शियल बैंक की समूह इकाई हैं और अगर कोई खास व्यापार/गतिविधि एनबीएफसी और उसके मूल बैंक दोनों कर रहे हैं, उन्हें लागू नियमों का पालन करना चाहिए। आरबीआई के अनुसार ये नियम उन एनबीएफसी पर लागू होते हैं जो अनुसूचित कॉमर्शियल बैंकों की समूह इकाई हैं, चाहे इन निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार उनका लेयर के आधार पर वर्गीकरण कुछ भी हो।
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