
रूसी कंपनी से तेल खरीदना बंद कर देगी रिलायंस इंडस्ट्रीज, हर दिन 5 लाख बैरल तेल खरीदने की थी डील
संक्षेप: भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) से तेल खरीदना आने वाले समय में बंद कर देगी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। दोनों कंपनियों के बीच लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट साइन हुआ था।
भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) से तेल खरीदना आने वाले समय में बंद कर देगी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। दोनों कंपनियों के बीच लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट साइन हुआ था। जिसके तहत रिलायंस इडंस्ट्रीज, रोसनेफ्ट से रोजाना करीब 5,00,000 बैरेल कच्चा तेल खरीदती है। रिपोर्ट के अनुसार रिलायंस अब रूसी कंपनी तेल खरीदना बंद कर देगी। बता दें, रोसनेफ्ट और लुकोइल पर अमेरिका ना प्रतिबंध लगाया है। भारतीय रिफाइनर नायरा एनर्जी, जिसका सबसे बड़ा शेयरधारक रोसनेफ्ट है, भी रूसी सरकारी कंपनी से तेल खरीदती है।

रिलायंस की तरफ से क्या कुछ कहा गया है?
इससे पहले रिलायंस के एक प्रवक्ता ने कहा था कि भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनरी सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप अपने रूसी तेल आयात को ठीक करने की योजना बना रही है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) सहित भारतीय स्टेट रिफाइनर भी अपने रूसी तेल आयात के दस्तावेजों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि रोसनेफ्ट और लुकोइल से सीधे कोई आपूर्ति ना हो बता दें, रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर आज गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए हैं। मार्केट क्लोजिंग के टाइम पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 1.17 प्रतिशत की गिरावट के बाद बीएसई में 1448.05 रुपये पर था।
अमेरिका, यूरोप लगातार बना रहे हैं भारत पर दबाव
रूस से कच्चे तेल खरीदने के मामले में अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के देश लगातार भारत पर दबाव बढ़ा रहे हैं। उनका मानना है कि इससे भारत, रूस की अप्रत्यक्ष तौर पर मदद कर रहा है। अमेरिका से डील ट्रेड डील ना होने के पीछे की एक वजह रूस से तेल खरीदना है। अमेरिका नहीं चाहता है कि भारत रूस से कच्चा तेल खरीदे। यूक्रेन में युद्ध को लेकर अमेरिका द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदार के रूप में उभरा है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता ने 2025 के पहले नौ महीनों में प्रति दिन 1.7 मिलियन बैरल आयात किया - जो भारत के कच्चे आयात का 34% है।
भारत का क्या पक्ष
देश के विदेश मंत्री एस जयंशकर कई मंचों से यह कह चुके हैं कि जहां से भारत को सस्ता तेल मिलेगा। वहां से वह अपनी जरूरतों के लिए खरीदेगा। बीते कुछ सालों में रूस ने भारत को सस्ता कच्चा तेल उपलब्ध करवाया है। जिसकी वजह से भारत ने भी रूस से खूब तेल खरीदे हैं। चीन और भारत इस समय रूस से तेल खरीदने वाले दो सबसे बड़े देश हैं।
क्या हैं भारत के पास विकल्प
भारत ईरान और वेनेजुएला से भी तेल खरीदना चाहता है। लेकिन मौजूदा समय में यह दोनों देश भी अमेरिकी प्रतिबंधों को झेल रहे हैं। जिसकी वजह से भारत को वहां से तेल की आपूर्ति होने में दिक्तत आ रही है।





