राजेश एक्सपोर्ट्स के कई ठिकानों पर ED की छापेमारी, SEBI के ₹15.15 लाख करोड़ वाले आरोप के बाद पड़ी रेड
मुख्य बातें
- राजेश एक्सपोर्ट्स एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गई है
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बेंगलुरु में कंपनी और उसके प्रमोटर्स से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है
- यह कार्रवाई SEBI द्वारा कंपनी पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और ₹15.15 लाख करोड़ की गलत बयानी के आरोप लगाने के बाद हुई है

देश की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड एक्सपोर्ट कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। कंपनी और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बेंगलुरु में कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले ही SEBI (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) ने कंपनी के वित्तीय लेनदेन और अकाउंटिंग प्रैक्टिसेस को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ED की टीम सुबह से ही कंपनी और उससे जुड़े लोगों के परिसरों पर तलाशी अभियान चला रही है। जांच एजेंसी कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और फंड फ्लो से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। हालांकि, अभी तक ED की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कार्रवाई SEBI की हालिया रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर की जा रही है।
दरअसल, SEBI ने अपने अंतरिम आदेश में राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports), उसके चेयरमैन राजेश मेहता और कुछ अन्य संबंधित संस्थाओं पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। सेबी का कहना है कि कंपनी ने कई संबंधित संस्थाओं के माध्यम से कॉम्प्लैक्स लेनदेन किए, जिससे पैसों के वास्तविक सोर्स एंड रिसीवर को समझना मुश्किल हो गया। नियामक के अनुसार, इन लेनदेन का स्ट्रक्चर ऐसा था कि फंड ट्रेल को जानबूझकर छिपाने की कोशिश की गई।
SEBI ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज, जैसे लोन एग्रीमेंट, बोर्ड की मंजूरी और अन्य रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी। रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल 2020 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने प्रमोटर राजेश मेहता को लगभग 338.90 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जबकि वापस केवल 232.44 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह रही कि SEBI ने कंपनी के फाइनेंशियल डिटेल में लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये तक की कथित गलत बयानी (Financial Misstatement) का आरोप लगाया। नियामक का दावा है कि कुछ लेनदेन को कई बार रिकॉर्ड कर राजस्व और खरीद के आंकड़ों को आर्टिफिशियल तरीके से बढ़ाकर दिखाया गया। हालांकि, SEBI ने स्पष्ट किया कि यह अमाउंट वास्तविक कैश फ्लो नहीं, बल्कि कथित रूप से गलत तरीके से दर्ज की गई अकाउंटिंग एंट्रीज का कुल मूल्य है।
बाजार एक्सपर्ट का मानना है कि इस तरह के आरोप किसी भी लिस्टेड कंपनी की साख पर असर डाल सकते हैं। निवेशकों के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) लंबे समय से भारतीय ज्वेलरी उद्योग की प्रमुख कंपनियों में गिनी जाती रही है।
अब ED की एंट्री के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अगर जांच एजेंसी को मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य वित्तीय अपराधों से जुड़े सबूत मिलते हैं, तो कंपनी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल, निवेशकों की नजर जांच के अगले चरण और कंपनी की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।
आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े नए खुलासे शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) के प्रदर्शन और निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
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भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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